देश के 78 प्रतिशत बुजुर्गों के पास नहीं पेंशन, नीति आयोग ने की अनिवार्य बचत योजना की सिफारिश
Updated on
20-02-2024 02:17 PM
नई दिल्ली: देश में 78% सीनियर सिटीजंस के पास पेंशन का सहारा नहीं है। 60 साल से ऊपर के केवल 18% लोगों के पास हेल्थ इंश्योरेंस है। बुजुर्गों के जीवन-यापन के मासिक खर्च का 13% हिस्सा हेल्थ से जुड़े खर्चों का है। इनका हवाला देते हुए नीति आयोग ने कहा है कि रिटायरमेंट के बाद बुजुर्गों की आर्थिक स्थिति खराब होने का खतरा है, लिहाजा सरकार को बुजुर्गों के लिए अनिवार्य बचत योजना, कर सुधारों और हाउसिंग के मोर्चे पर कदम उठाने चाहिए। NITI आयोग ने एक रिपोर्ट जारी की है, ‘सीनियर केयर रिफॉम्स इन इंडिया – रीइमैजिनिंग द सीनियर केयर पैराडाइम।’ इसमें कहा गया है कि बुजुर्गों के लिए एक नैशनल पोर्टल बनाया जाना चाहिए, जिसके जरिए वे सेवाओं का उपयोग कर सकें। इसमें कहा गया कि अभी 12.8% लोग 60 साल से ज्यादा उम्र के हैं। साल 2031 तक ऐसे करीब 13.2% लोग होंगे और 2050 तक आंकड़ा लगभग 19% हो जाएगा। 2021 से 2031 के बीच डिपेंडेंसी रेशियो 15.7% से बढ़कर 20.1% हो जाने का अनुमान जताते हुए कहा गया कि इससे वर्किंग पॉपुलेशन की आर्थिक जिम्मेदारियां बढ़ेंगी।
जो लोग अफोर्ड कर सकें, उनके लिए अनिवार्य सेविंग्स प्लान पर जोर देते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि ‘भारत में सोशल सिक्योरिटी फ्रेमवर्क का दायरा सीमित है। अधिकतर बुजुर्ग अपनी बचत से होने वाली इनकम पर निर्भर हैं, लेकिन ब्याज दरों में उतार-चढ़ाव से उनकी इनकम प्रभावित होती है और कभी-कभी वह उनके जीवन-यापन के लिए नाकाफी हो जाती है। लिहाजा एक रेगुलेटरी मैकेनिजम की जरूरत है जिससे बुजुर्गों की जमा रकम पर ब्याज दर की एक तर्कसंगत निचली सीमा तय हो सके।’ आयोग ने कहा है कि बुजुर्ग महिलाओं को और रियायत देने से उनकी माली हालत बेहतर करने में मदद मिलेगी। रिपोर्ट में कहा गया, ‘सरकार को रिवर्स मॉर्गेज के नियमों में जरूरी बदलाव करने चाहिए ताकि बुजुर्गों के लिए लिक्विडिटी बढ़ सके।’ रिवर्स मॉर्गेज के तहत बुजुर्ग अपनी प्रॉपर्टी में रहते हुए उस पर लोन ले सकते हैं और एक तय मंथली इनकम हासिल कर सकते हैं।
बुजुर्गों पर वित्तीय बोझ न पड़े
टैक्स और जीएसटी रिफॉर्म्स की जरूरत बताते हुए आयोग ने कहा कि सीनियर सिटीजंस की देखभाल से जुड़े प्रॉडक्ट्स पर लगने वाले टैक्स में बदलाव की आवश्यकता है जिससे इन्हें अपनाने में आसानी हो और बुजुर्गों पर वित्तीय बोझ भी न पड़े। बुजुर्गों की जरूरतों का खयाल रखने वाले हाउसिंग सेक्टर और सीनियर केयर होम्स को बढ़ावा देने की जरूरत है। आयोग के मुताबिक, देश में 19% बुजुर्ग या तो तलाकशुदा हैं या उनके घरवालों ने उनको अलग कर दिया है। ट्रडिशनल हाउसिंग सिस्टम में बुजुर्गों को ध्यान में रखकर घर नहीं बनाए जाते और यह भी खयाल नहीं रखा जाता कि मेडिकल फैसिलिटी भी आसपास हो।
हेल्थ से जुड़ी जरूरतें शामिल हों
आयोग ने कहा, ‘असंगठित क्षेत्र के बुजुर्गों को भी पेंशन सपोर्ट दिया जाना चाहिए। महंगाई को देखते हुए पेंशन की रकम में बदलाव की भी जरूरत है। प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के दायरे में पूरी बुजुर्ग आबादी को शामिल कर लेना चाहिए और इसका कवरेज कई नॉन-मेडिकल चीजों तक बढ़ाते हुए घर में पड़ने वाली हेल्थ से जुड़ी जरूरतों को भी इसमें शामिल कर लेना चाहिए।’
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