मोबाइल छीना तो महज 13 साल की बच्ची ने मां को मारने की रची साजिश, आपको डरा देगी यह खबर
Updated on
19-06-2023 07:25 PM
अहमदाबाद: पश्चिम अहमदाबाद में रहने वाली 45 वर्षीय कोमल परमार (बदला हुआ नाम) को एक दिन चीनी में कुछ अजीब सा नजर आया। उन्होंने चीनी को सूंघने के बाद उसे फेंक दिया। ऐसा एक या दो बार नहीं बल्कि कई बार हुआ। वह हैरान थीं कि किचन के कंटेनर में रखी चीनी में यह क्या था। जब उन्होंने इस पर निगरानी शुरू की तो दंग रह गईं। बाथरूम में भी हमेशा लिबलिबा सा पदार्थ फर्श पर मिलता था। उन्हें पता चला कि उनकी 13 साल की बेटी शक्कर में बाथरूम क्लीनर और फिनायल जैसे पदार्थ मिला रही। महज 13 साल की बेटी का यह बर्ताव उनके लिए बहुत ही चौंकाने वाला था। काउंसलिंग के बाद पता चला कि उनकी बेटी उन्हें मारना चाहती थी क्योंकि वह उसे मोबाइल नहीं देती थीं। वह मोबाइल की एडिक्ट हो चुकी थी।
कोमल को जब बेटी की इस करतूत के बारे में पता चला तो उन्होंने हेल्पलाइन में फोन किया। काउंसलर ने बताया कि हमारी बातचीत से पता चला कि किशोर लड़की माता-पिता को नुकसान पहुंचाना चाहती थी। वह चाहती थी कि वे कीटनाशक युक्त चीनी का सेवन करें या फिसलन वाले फर्श पर फिसलें और सिर में चोट लगें। हमें पता चला कि मां ने कुछ दिन पहले उसका फोन छीन लिया था।
मां ने छीन लिया था मोबाइल
अभयम 181 महिला हेल्पलाइन की एक काउंसलर ने कहा कि जब मां ने बेटी से फोन छीना तो वह हिंसक हो गई। चिल्लाने लगी, जिद करने लगी। इस दौरान मां ने उसे पीटा और आगे से कभी मोबाइल न देने की चेतावनी दी।
पूरी रात मोबाइल पर बिताती थी बेटी
माता-पिता ने काउंसलर को बताया कि लड़की लगभग पूरी रात फोन पर बिताती थी, ऑनलाइन दोस्तों के साथ चैट करती थी या सोशल मीडिया पर रील या पोस्ट देखते हुए समय बिताती थी। इससे वह पढ़ाई से दूर हो गई। किसी से भी मिलती-जुलती नहीं थी। पुरा समय सिर्फ मोबाइल पर ही बिताती थी।
लाड़-प्यार में लाकर दिया था मोबाइल
माता-पिता भौचक्के रह गए क्योंकि उन्होंने ऐसी प्रतिक्रिया की कल्पना नहीं की थी। काउंसलरों ने कहा कि वे अधिक हैरान थे। बच्ची अपने माता-पिता की बहुत प्यारी और लाडली है क्योंकि वह उनकी शादी के 13 साल बाद हुई। वह उनकी इकलौती संतान है। शुरू में वह उसे रोता नहीं देख सकते थे। उसकी सारी डिमांड पूरी करते। उसे मोबाइल भी दिया और धीरे-धीरे पर मोबाइल की अडिक्ट हो गई।
अभयम हेल्पलाइन की समन्वयक फाल्गुनी पटेल ने कहा, लेकिन हेल्पलाइन के साथ यह कोई अकेला मामला नहीं है। 2020 से पहले या कहें कि कोविड महामारी से पहले, हमें एक दिन में बमुश्किल 3-4 कॉल मिलते थे। पिछले कुछ वर्षों में यह एक दिन में लगभग 12-15 कॉल के साथ तीन गुना बढ़ोत्तरी हुई है।
काउंसलर ने बताया कि अधिक चिंताजनक प्रवृत्ति में बच्चे और किशोर शामिल हैं। कुल कॉल में से, लगभग 20% कॉल 18 वर्ष से कम आयु के व्यक्तियों से संबंधित हैं।
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