म्यूचुअल फंड के नियमों में सेबी ने किया अहम बदलाव, आम निवेशकों को क्या होगा फायदा
Updated on
19-02-2025 02:38 PM
नई दिल्ली: मार्केट रेगुलेटर SEBI ने म्यूचुअल फंड के नियमों में बदलाव करते हुए असेट मैनेजमेंट कंपनियों (AMCs) को निर्देश दिया है कि वे नए फंड ऑफर (NFOs) से जुटाए गए पैसे को तय समय सीमा के अंदर निवेश करें। साथ ही, रेगुलेटर ने निवेशकों को ज्यादा पारदर्शिता देने के लिए म्यूचुअल फंड स्कीम्स के स्ट्रेस टेस्टिंग की जानकारी देने का भी आदेश दिया है। ये बदलाव 1 अप्रैल, 2025 से लागू होंगे। इसका मकसद म्यूचुअल फंड्स के लिए कामकाज में लचीलापन लाना और निवेशकों के बीच ज्यादा जवाबदेही और भरोसा सुनिश्चित करना है।
सेबी ने निवेश समयसीमा के बारे में 14 फरवरी को जारी एक अधिसूचना में कहा, 'एनएफओ में मिली राशि का उपयोग तय समयसीमा में किया जाएगा। इस बारे में बोर्ड समय-समय पर निर्देश जारी कर सकता है। यह बदलाव सेबी बोर्ड द्वारा दिसंबर में एक प्रस्ताव को मंजूरी देने के बाद आया है। इसमें फंड मैनेजरों को NFO के दौरान इकट्ठा किए गए धन को स्कीम के तय असेट एलोकेशन के अनुसार 30 दिनों के भीतर निवेश करने के लिए कहा गया था।'
निवेशकों के सामने ये विकल्प
रेगुलेटर ने कहा था कि अगर तय समय सीमा के अंदर पैसा निवेश नहीं किया जाता है, तो निवेशकों को बिना एग्जिट लोड चुकाए स्कीम से बाहर निकलने का विकल्प होगा। ये बदलाव AMCs को NFO के दौरान ज्यादा पैसा इकट्ठा करने से रोकता है। इसकी वजह ये है कि निवेशक बाद में मौजूदा नेट असेट वैल्यू (NAV) पर ओपन-एंडेड स्कीम्स में निवेश कर सकते हैं।
कर्मचारियों के लिए भी निर्देश
असेट मैनेजमेंट कंपनियों के कर्मचारियों के लिए काम करने में आसानी के लिए भी सेबी ने कदम उठाए हैं। सेबी का कहना है कि AMC ऐसे कर्मचारियों के वेतन का एक प्रतिशत म्यूचुअल फंड स्कीम की यूनिट में निवेश करेगा। यह कर्मचारियों के पोस्ट या भूमिका के आधार पर होगा।
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