अहमद खान बोले- मैंने तो नाना पाटेकर से भी हिप हॉप करवाया है, सनी देओल ओल्ड स्कूल हैं
Updated on
29-04-2025 04:49 PM
बॉलिवुड को 'यायी रे, यारी रे' से लेकर 'बचना ऐ हसीनों' और 'जुम्मे की रात' तक जैसे अनेकों डांस नंबर्स से समृद्ध करने वाले कोरियोग्राफर-डायरेक्टर अहमद खान तमाम सुपरस्टार्स को अपने इशारों पर नचा चुके हैं। ऐसे में, आज 'अंतरराष्ट्रीय डांस डे' के अवसर पर हमने अहमद से उनके इस सफर पर की खास बातचीत।
डांस से आपका पहली बार रिश्ता कैसे जुड़ा? और उस दौर में जब डांस को अच्छा नहीं माना जाता था, आपने इसे करियर कैसे चुना? डांस मैं बचपन से कर रहा हूं। जब मैं 9 साल का था, तो मेरे बड़े भाई के दोस्तों का एक डांसिंग ग्रुप था तो उनसे मैंने सीखा। ये मैंने अनजाने में डांस सीख लिया, मगर बाद में मेरा प्रफेशन बन गया, क्योंकि मुझे डांस से बहुत प्यार है। आपने सही कहा, उस वक्त डांस को समय बर्बाद करना माना जाता था। घरवाले कहते थे कि पढ़ो लिखो, कुछ बनो क्योंकि डांस में कोई भविष्य नहीं होता था, पर मेरी मम्मी ने मुझे बचपन से बहुत सपोर्ट किया। उस वजह से मैं इसमें आगे बढ़ पाया। मुझे ज्यादा संघर्ष भी नहीं करना पड़ा, मैंने 9 की उम्र में डांस शुरू किया, 1-2 साल कुछ प्रतियोगिताएं जीतीं और 11 की उम्र में मुझे फिल्म 'मिस्टर इंडिया' मिल गई। उस वक्त एक चाइल्ड ऐक्टर के लिए बहुत बड़ी बात थी कि आपको डांस की वजह से फिल्म मिल गई, तो मुझे किसी तरह की मुश्किल का सामना नहीं करना पड़ा। जब मैं 16 साल का था तो मैंने सरोज खान जी को बतौर असिस्टेंट डायरेक्टर जॉइन कर लिया और यह सफर चल पड़ा।
'मिस्टर इंडिया' के बाद ऐक्टिंग के मोह ने नहीं जकड़ा कि कोरियोग्राफर के बजाय ऐक्टर बनते हैं? देखो, जब आप बच्चे होते हैं न तो आपको चाइल्ड ऐक्टर का रोल मिल सकता है। मगर एक वक्त आता है, जब आप ना जवान होते हैं, ना बच्चे रहते हैं, उस 13 से 17 की उम्र में आप ना चाइल्ड ऐक्टर होते हैं, ना हीरो बन सकते हैं, न हीरो के दोस्त, तो वो जो गैप होता है वो बहुत मुश्किल होता है। तब लगा कि मैं क्या करूं? तो सोचा कि ऐक्टिंग में काम नहीं है तो चलो डांस में ही आगे बढ़ते हैं। इसलिए, मैंने मैंने सरोज जी को जॉइन किया। वो भी एक तुक्का था, क्योंकि 16 साल की उम्र ऐसी तो होती नहीं है कि आपको करियर का आइडिया होता है। मैंने अपनी किस्मत आजमाई। वो मुझे मिस्टर इंडिया की वजह से चाइल्ड ऐक्टर के तौर पर जानती थीं। उनके पास ऐसे वेस्टर्न डांसर नहीं थे जो सही हों तो उन्हें भी मेरे में कुछ दिखा तो उन्होंने मुझे मौका मिला। सरोज जी नंबर वन कोरियोग्राफर थीं, मैं उनको आंटी कहा करता था, तो एक कंफर्ट भी था
डांस से आपकी पहली कमाई कितनी हुई थी? ओह, ये आपने मुझे किस दौर में पहुंचा दिया हंसते हैं। मुझे याद भी नहीं है, क्योंकि वो 80 का दौर था। मेरा पहला चेक 'मिस्टर इंडिया' के लिए ही मिला था। उस वक्त मेरी उम्र 11-12 साल थी, तो मैंने उसका क्या किया, मुझे याद नहीं। निश्चित तौर पर मम्मी को ही दिया होगा। मुझे ये याद है कि मम्मी ने मेरा एक मेरा अकाउंट खोला था, टाउन में, हाजी अली के पास, तो अपने दोस्तों के बीच मैं इकलौता बच्चा था, जिसका बैंक अकाउंट था
आप सरोज खान के शिष्य रहे हैं, जो डांस में एक्सप्रेशन को बहुत महत्व देती थीं। लेकिन अब उसमें स्पीड और एक्रोबैटिक ज्यादा हावी होता है। इस बदलाव पर क्या कहेंगे? अहमद खान बोले- मैं तो इसे तरक्की की तरह देखता हूं। पहले जो गाने और डांस होते थे, वे अमूमन पेड़ों के इर्द-गिर्द होते थे। रोमांटिक गाना हो या डांस नंबर हो, सारे डांसर लाइन से खड़े होकर एक ही स्टेप करते थे। गाने में एक पेड़ होता था और ऐक्टर उसके इधर-उधर घूमते थे। मेरे हिसाब से तो वहां सोच के लिहाज से तंगी थी। फिर देव आनंद साहब, शम्मी जी डांस में अपना एक स्टाइल लेकर आए। फिर ऐक्टर्स बेहतर होने लगे और वेस्टर्न डांसिंग फॉलो करने लगे, तो मैं इसे बेहतरी के तौर पर देखता हूं। ये एक्रोबैटिक नहीं है। आज ऐक्टर को अपनी ऑडियंस को इंप्रेस करने के लिए बहुत कुछ करना पड़ता है। अब जो मिथुन दा डिस्को डांस करते थे, वो आज नहीं चलेगा ना, क्योंकि आज की आम जनता इतनी टैलंटेड है, इतना अच्छा डांस कर रही है तो हीरो को तो उससे ऊपर होना ही होगा। आज के समय में वो हाव भाव आउटडेटेड लगते हैं कि हर बोल पर एक्सप्रेशन देना, वो सब आज नहीं चलता।
आपने इंडस्ट्री के लगभग सभी ऐक्टर्स को नचाया है, फिर वो डांसर हो या नॉन डांसर, ज्यादा मजा किसके साथ आता है? देखिए, हमारे पास ये ऐक्टर स्टूडेंट की तरह आते हैं। उनको जो बोलो, वे सुन लेते है। जो सिखाओ, वे सीखते हैं। हां, जो खुद बहुत अच्छा डांसर होता है, वो कभी-कभी अपनी कुछ सोच के साथ भी आते हैं, जो हमारे मूड पर होता है कि उसे रखना है या नहीं। जबकि, नॉन डांसर कुछ लाते ही हैं। वे ऐसे ही आते हैं कि भइया जो कराना है करा लो, तो उनके साथ आसान होता है, पर उनकी एक लिमिटेशन होती है तो आप ग्रो नहीं करते, क्योंकि आप उनसे उतना ही कराओगे, जितनी उनकी लिमिट है। बाकी, मैंने तो सनी देओल, जैकी श्रॉफ, संजय दत्त से लेकर ऋतिक, शाहिद, टाइगर तक के साथ काम किया है तो मैंने दोनों नॉन डांसर और डांसर दोनों के साथ काम किया। नॉन डांसर पहले ही बोल देते हैं कि मुझसे इतना ही होगा यार। मगर, जैसे अक्षय कुमार कुछ भी करने को तैयार हो जाता है। टाइगर अलग ही लेवल का डांसर है। सनी देओल ओल्ड स्कूल हैं, लेकिन वे भी कभी-कभी कहेंगे कि अहमद मुझसे करा ले कुछ तो मैं कहता हूं- ठीक है, ये ये करा लेते हैं। मैं तो नाना पाटेकर को नचा चुका हूं और हिप हॉप कराया।
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