देश में एंटी मोदी महाजुटान इधर UP में पूर्वांचल की 'चाबी' अखिलेश यादव के मिशन पर लगा सकती है ताला
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18-07-2023 04:50 PM
अभय सिंह, लखनऊ: लोकसभा चुनाव 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को केंद्र की सत्ता की हैट्रिक लगाने से रोकने के लिए विपक्ष एकजुट हो चुका है। कांग्रेस के नेतृत्व में बेंगलुरु में बुलाई गई विपक्षी दलों की बैठक में यूपी से मुख्य विपक्ष के दल में तौर पर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव पहुंचे हैं। समाजवादी पार्टी के अलावा इस बैठक में हिस्सा लेने के लिए आरएलडी से जयंत चौधरी और अपना दल कमेरावादी की कृष्णा पटेल भी पहुंची हैं। इन तमाम कोशिशों के बीच यूपी से समाजवादी पार्टी को तगड़ा झटका लग सकता है। इसलिए ऐसा क्यों कहा जा रहा है, दिल्ली की सत्ता का रास्ता तय करने वाले देश के सबसे ज्यादा 80 लोकसभा सीटों वाले सूबे उत्तर प्रदेश की चाबी पूर्वांचल के पास है। इस बार अखिलेश यादव की साइकिल पर यह चाबी (पूर्वांचल की 26 लोकसभा सीटें) ताला मारकर सपा के साथ-साथ महागठबंधन के मिशन पर भी पानी फेर सकती है।
क्षेत्र में सपा के साथ सिर्फ कृष्णा पटेल
जानकारों का कहना है कि सपा मुखिया और यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव भले ही आगामी लोकसभा चुनाव को लेकर विपक्षी दलों के महागठबंधन में शामिल हो गए हैं। लेकिन, यूपी के पूर्वांचल में अभी उनकी स्थिति कुछ ज्यादा मजबूत दिखाई नहीं दे रही है। उधर, बीजेपी के साथ सुभासपा के गठबंधन करने के बाद अखिलेश यादव पूर्वांचल में बिल्कुल अकेले पड़ गए हैं। हालांकि, पूर्वांचल में गठबंधन के नाम पर सपा के साथ सिर्फ अपना दल कमेरावादी पार्टी ही दिख रही है। भाजपा के साथ निषाद पार्टी, अपना दल एस और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी मजबूती के साथ खड़ी दिखाई दे रही है। यह सभी ऐसी पार्टियां है, जो अपने दम पर पूर्वांचल की एक दो नहीं बल्कि दर्जन भर से ज्यादा सीटों को जिताने का दम रखती है। अकेले 16 लोकसभा सीट पर राजभर का खासा दबदबा है। वहीं, सपा गठबंधन वाली अपना दल कमेरावादी का पूर्वांचल में कोई ज्यादा खास प्रभाव नहीं है।
पूर्वांचल में 26 लोकसभा सीट पर मुकाबला
लोकसभा सीटों के हिसाब से पूर्वांचल, लोकसभा चुनाव हो या विधानसभा चुनाव सभी चुनावों में अपनी अहम भूमिका निभाता है। यूपी की 80 लोकसभा सीटों में से अकेले पूर्वांचल में 26 लोकसभा सीटें है, जो दिल्ली की सत्ता तक पहुंचाने की ताकत अकेले दम पर रखती है। ऐसे में अखिलेश यादव के साथ पूर्वांचल में कोई मजबूत सहयोगी ना होने के कारण समाजवादी पार्टी और महागठबंधन के लिए मुसीबतें खड़ा कर सकता है। उधर BJP गठबंधन में शामिल होते ही सुभासपा नेता अरुण राजभर ने पूर्वांचल को लेकर समाजवादी पार्टी गठबंधन के लिए पहले ही भविष्यवाणी कर दी है, अरुण राजभर ने दावे के साथ कहा कि पूर्वांचल में सपा एक भी सीट जीतने नहीं जा रही है। वहीं पूर्वांचल पीएम मोदी और सीएम योगी का संसदीय क्षेत्र होने के नाते पूर्वांचल बीजेपी का एक तरह से गढ़ भी बन चुका है।
पिछले चुनावों का टूट सकता है रिकॉर्ड
लोकसभा चुनाव 2014 और 2019 की बात करे तो भाजपा का दबदबा दिखा है। 2014 लोकसभा चुनाव में मोदी मैजिक के चलते पूर्वांचल की 26 सीटों में से बीजेपी ने 25 लोकसभा सीट पर दर्ज की थी। 2019 के लोकसभा चुनाव में 26 में से मात्र 19 सीटें ही बीजेपी जीत पाई थी। लेकिन ऐसा तब हुआ था जब सपा और बसपा मिलकर चुनाव लड़े थे। जिसमें से 6 सीट पर बसपा के उम्मीदवार जीते थे और सिर्फ आजमगढ़ लोकसभा सीट पर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने जीत दर्ज की थी। जिसपर मौजूदा समय में बीजेपी का कब्जा है। बसपा के साथ न होने और राजभर के साथ छोड़कर जाने से पूर्वांचल में बीजेपी क्लीनस्वीप करके अपने 80 के 80 लोकसभा सीटों जीतने के दावे को साकार कर सकती है।
MY फैक्टर तक ही सिमटते जा रहे अखिलेश
वरिष्ठ पत्रकार योगेश मिश्र ने कहा कि सपा मुखिया अखिलेश यादव को सामाजिक संतुलन साधने की जरूरत है, इसे कास्ट केमेस्ट्री कहते है उसको एक जगह इकट्ठा करने और कैरी ऑन करने की स्थिति में नहीं है। अब वो MY फैक्टर तक ही सिमटते चले जा रहे हैं। MY फैक्टर से यही है कि सब जगह जमानत बचा ले, जीत की गुंजाइश बहुत कम होती है। जब तक दूसरी जातियां साथ नहीं आएंगी तबतक सरकार नहीं बना सकते हैं। अखिलेश यादव किसी दूसरी जाति को जोड़ने में कामयाब नहीं हो रहे हैं इसलिए उनसे किसी बड़े परिवर्तन या सरकार बनाने की उम्मीद नहीं की जा सकती है।
बदल रहा है समीकरण
वरिष्ठ पत्रकार ने बताया कि बीजेपी जो सीटें पिछली बार हारी थी, वह राजभर के प्रभुत्व वाली थी। इसीलिए बीजेपी ने रणनीतिक तौर पर राजभर को अपने गठबंधन में शामिल कराने का काम किया है। उन्होंने बताया कि जितने वोटों से बीजेपी हारी थी उतने वोट राजभर विधानसभा चुनाव में पाकर दिखा चुके है। सपा के साथ होने के बाद भी राजभर ने 14 लाख वोट हासिल किए थे जबकि निषाद पार्टी कुल 13 लाख वोट हासिल कर पाई थी। इससे हारी हुई सीटों में 5 सीट पर बीजेपी की स्थिति मजबूत हुई है। योगेश मिश्र ने बताया कि सिर्फ पूर्वांचल ही नहीं अखिलेश यादव को ओवरऑल घाटा हो सकता है। वरिष्ठ पत्रकार की माने तो राजभर के साथ आने से बीजेपी हारी सीट पर फिर से जीत सकती है, साथ ही इस बार पूर्वांचल की 24 से 25 सीटों पर कमल खिल सकता है। हालांकि आजमगढ़ में जीतना बीजेपी के लिए आसान नहीं होगा।
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