पहले फिल्म को देखकर लोग अपनी राय बनाते थे, अब फिल्म का ट्रेलर आते ही या उसकी रिलीज से पहले ही उसके बारे में पॉजिटिव या नेगेटिव माहौल बनाया जाता है। इसका कितना असर होता है। क्या फिल्म रिलीज के पहले दिन पर इसका कोई प्रभाव दिखता है?
मुल्क का पहले दिन यानी शुक्रवार का कलेक्शन 1.10 करोड़ थो और सोमवार को फिल्म ने सवा करोड़ कमाए थे। तो अब बताएं आपके लिए फर्स्ट डे कौन सा था? ये ऑडियंस का काम ही नहीं है और ना ही कभी था। वो कभी इस तरह की बातें करते ही नहीं थे। दर्शक फिल्म देखते हैं, उनको अच्छी लगती है या बुरी लगती है। मुझे लगता है कि दर्शकों को इतना ही करना चाहिए। वरना फिल्म को देखने और उसे एंजॉय करने का जो मोटिव होता है वो करप्ट हो जाता है। आप फिल्म देख रहे हैं और उस समय सोच रहे हैं कि फिल्म का क्या बजट है, कितना नुकसान हुआ कितना फायदा, शनिवार को क्या हुआ सोमवार को क्या होगा, इस बीच में फिल्म कहीं खो जाती है। अब दर्शकों ने सोशल मीडिया पर फिल्म को समझने के नए-नए तरीके सीख लिए हैं, वो अब फर्स्ट और सेकेंड हॉफ पर चर्चा कर रहा है। पहले कभी कोई बोलता था कि फिल्म स्लो है या फास्ट है? उनके लिए फिल्म अच्छी या बुरी होती थी। दर्शकों का इतना ही काम है। आप मेरे संकट से डील ना करें आप अपने एंजॉयमेंट से डील करें।
रीमेक का कल्चर इन दिनों थोड़ा ज्यादा देखने को मिल रहा है। लेकिन उनको वैसा रिस्पॉन्स नहीं मिल रहा है। इस बारे में क्या कहेंगे?
खूब अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है। जितना हमेशा अनुपात था, उतना आज भी है। हम इस बारे में बात भी कुछ ज्यादा कर रहे हैं। मैं कहना चाहूंगा कि इतनी बातें ना करें। कोई ट्रेंड नहीं है, सब पहले जैसा है कुछ भी नया नहीं हुआ है। बॉलिवुड में पहले भी 10 प्रतिशत फिल्में चलती थीं आज भी उतनी ही चल रही हैं। बाकी बची फिल्मों में से कुछ अपना पैसा निकाल लेती हैं और कुछ ज्यादा भी निकाल लेती हैं, कुछ कम कमा पाती हैं, तो उनकी सफलता का अनुपात तो वो ही है।
