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कांग्रेस की नई प्रदेश कार्यकारिणी में दिखा Ashok Gehlot का रुतबा, Sachin Pilot समर्थकों को कम तव्वजो क्यों? यहां पढ़ें असली वजह

Updated on 11-07-2023 12:56 PM
Jaipur News In Hindi | जयपुर: लम्बे इंतजार के बाद कांग्रेस की प्रदेश कार्यकारिणी घोषित कर दी गई है। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव केसी वेणुगोपाल ने सोमवार देर रात को 48 महासचिव, 21 उपाध्यक्ष, 121 सचिव, 25 जिलाध्यक्षों के साथ कोषाध्यक्ष की नियुक्तियां की है। कांग्रेस संगठन में नियुक्तियों की जम्बो लिस्ट जारी होने के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं हो रही हैं कि संगठन में किसका पलड़ा भारी रहा। चूंकि प्रदेश में अशोक गहलोत और सचिन पायलट गुट में लम्बे समय से खींचतान चल रही है। ऐसे में लोग नई नियुक्तियों की सूची में गहलोत और पायलट के कट्टर समर्थकों के नाम ढूंढ़ रहे हैं। यह भी कहा जा रहा है कि गहलोत गुट को नई कार्यकारिणी में पायलट गुट से ज्यादा तवज्जो दी गई है। यहां समझें किसे और क्यों मिली अधिक तवज्जो?

दोनों गुट के समर्थकों को मौका लेकिन गहलोत पलड़ा भारी

कांग्रेस की प्रदेश कार्यकारिणी में नियुक्तियों की लिस्ट जारी होने के बाद से गहलोत और पायलट के समर्थकों के नाम लिस्ट में ढूंढे़ जा रहे हैं। इस लिस्ट में साफ नजर आ रहा है कि सचिन पायलट के बजाय अशोक गहलोत का पलड़ा भारी रहा है। इसके पीछे दो बड़े कारण हैं। पहला प्रमुख कारण तो यह है कि गहलोत का कुनबा यानी समर्थकों की संख्या पायलट समर्थकों से कई गुना ज्यादा है। दूसरा पार्टी के सबसे सीनियर और अनुभवी नेता होने के साथ गहलोत सरकार के मुखिया भी है। इस नाते गहलोत समर्थकों को ज्यादा तवज्जो दी गई है। इस लिहाज से नई नियुक्तियों की सूची में गहलोत समर्थकों की संख्या काफी ज्यादा नजर आ रही है।

पायलट समर्थकों को भी दिया गया है मौका


ऐसा नहीं कहा जा सकता कि नई नियुक्तियों में सचिन पायलट समर्थकों को नजर अंदाज किया गया है। जुलाई 2020 में गहलोत के खिलाफ बगावत करने औ पायलट के कट्टर समर्थक कांग्रेस विधायक गजेन्द्र खटाणा को प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया गया है। इसी सूची में शामिल रहे दर्शन सिंह भी पायलट के कट्टर समर्थक हैं। कुल 48 महासचिव में से कई नेता पायलट के कट्टर समर्थक हैं। इनमें राकेश पारीक, मुकेश भाकर, राजेश चौधरी, सुरेश मिश्रा, प्रशांत शर्मा इंद्राज गुर्जर शामिल हैं। इसी तरह 121 सचिवों की सूची में कई नेता पायलट के कट्टर समर्थक हैं।

तीन साल से पायलट के पास कोई पद नहीं


जुलाई 2020 में अशोक गहलोत के खिलाफ बगावत करने से पहले पायलट सत्ता और संगठन में बड़े पदों पर आसीन थे। पायलट प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष थे और सरकार में उपमुख्यमंत्री भी थे। बगावत के दिनों में कांग्रेस आलाकमान ने पायलट से उपमुख्यमंत्री और पीसीसी चीफ के पदों से बर्खास्त कर दिया। तब से पायलट का न तो सत्ता में दखल है और न ही संगठन में। वे केवल एक सामान्य विधायक हैं। हालांकि पूर्व केन्द्रीय मंत्री, पीसीसी चीफ और उपमुख्यमंत्री के पदों पर रहने के नाते पायलट को केन्द्रीय नेतृत्व विशेष महत्व देता है। ऐसा माना जा रहा है आने वाले दिनों में पायलट को कांग्रेस की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में विशेष स्थान मिलने वाला है। (रिपोर्ट - रामस्वरूप लामरोड़

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