प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बार-बार संयुक्त राष्ट्र और सुरक्षा परिषद जैसे बड़े वैश्विक संस्थानों में सुधारों की पुरजोर वकालत की है। उन्होंने G7 के मंच से कहा कि अगर ऐसे संस्थान मौजूदा विश्व की वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित नहीं करते हैं तो ये महज चर्चा का मंच बनकर रह जाएंगे। मोदी ने अचंभा जताया कि यह सोचने की बात है कि हमें शांति और स्थिरता की बातें अलग-अलग मंच पर क्यों करनी पड़ रही हैं? संयुक्त राष्ट्र की शुरुआत ही शांति स्थापित करने की कल्पना से की गई थी। ऐसे में यह आज संघर्ष रोकने में सफल क्यों नहीं होता? आखिर क्यों, संयुक्त राष्ट्र में आतंकवाद की परिभाषा तक मान्य नहीं हो पाई है?
भारत संयुक्त राष्ट्र में सुधार की मजबूती से वकालत करता रहा है। भारत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता चाहता है। अभी सुरक्षा परिषद में पांच स्थायी सदस्य- अमेरिका, रूस, चीन, ब्रिटेन और फ्रांस हैं, जिन्हें वीटो की ताकत मिली है। सुरक्षा परिषद में 10 अस्थायी सदस्य होते हैं और इनका चयन संयुक्त राष्ट्र महासभा दो साल के लिए करती है।
