हड़ताल का कारण क्या है?
ट्रेड यूनियनों का दावा है कि उनकी चिंताओं को लगातार नजरअंदाज किया गया है। उन्होंने पिछले साल श्रम मंत्री मनसुख मंडाविया को 17 सूत्रीय मांगों का एक चार्टर सौंपा था, लेकिन उनका कहना है कि इस पर कोई गंभीर प्रतिक्रिया नहीं हुई है।यूनियन फोरम ने कहा कि सरकार ने देश की कल्याणकारी राज्य की स्थिति को त्याग दिया है। यह विदेशी और भारतीय कंपनियों के हित में काम कर रही है। यह उन नीतियों से स्पष्ट है जिनका सख्ती से पालन किया जा रहा है। यूनियन ने ये लगाए सरकार पर आरोप
- पिछले दस वर्षों में भारतीय श्रम सम्मेलन आयोजित नहीं किया है।
- चार नए श्रम कानूनों को आगे बढ़ा रही है जो यूनियनों को कमजोर करते हैं और काम के घंटे बढ़ाते हैं।
- संविदात्मक नौकरियों और निजीकरण को बढ़ावा दे रही है।
- अधिक सार्वजनिक क्षेत्र की भर्ती और वेतन वृद्धि की मांगों को नजरअंदाज कर रही है।
- युवा बेरोजगारी से निपटने के बिना नियोक्ताओं को प्रोत्साहन दे रही है।
