बिटकॉइन, बाइनेंस, पाई नेटवर्क... क्या क्रिप्टोकरेंसी भारत में बैन होंगी? सरकार ने कर दिया दूध का दूध, पानी का पानी
Updated on
07-10-2025 01:30 PM
नई दिल्ली: क्या सरकार बिटकॉइन , बाइनेंस, पाई नेटवर्क समेत सभी क्रिप्टोकरेंसी पर बैन लगाने जा रही है? यह बात अक्सर सामने आती रहती है। इसे लेकर अब सरकार ने सारी बातें स्पष्ट कर दी हैं। साथ ही सरकार ने यह भी बताया है कि इस क्रिप्टोकरेंसी पर ज्यादा टैक्स क्यों लगाया जाता है। इसके अलावा सरकार ने देश की डिजिटल करेंसी के बारे में भी जानकारी दी है।
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि भारत उन क्रिप्टोकरेंसी को बढ़ावा नहीं देता है जिनका कोई सरकारी समर्थन या संपत्ति का आधार नहीं होता है। इसका मतलब है कि ऐसी क्रिप्टोकरेंसी जो भारतीय रिजर्व बैंक (RBI), फेडरल बैंक या किसी स्थानीय मुद्रा द्वारा समर्थित नहीं हैं, उन्हें भारत में प्रोत्साहित नहीं किया जाएगा
क्या क्रिप्टोकरेंसी पर बैन लगेगा?
केंद्रीय मंत्री ने क्रिप्टोकरेंसी पर बैन लगाने के बारे में भी सरकार का रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि जिन क्रिप्टोकरेंसी का केंद्र सरकार से कोई समर्थन नहीं है, उन पर कोई सीधा प्रतिबंध नहीं है। हालांकि, उनके इस्तेमाल को हतोत्साहित करने के लिए उन पर भारी टैक्स लगाया जा रहा है। ऐसा इसलिए किया जा रहा है क्योंकि ऐसी क्रिप्टोकरेंसी में जोखिम ज्यादा होता है, क्योंकि उनका कोई आधार या जवाबदेही तय नहीं होती।
डिजिटल करेंसी पर क्या है प्लान?
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने यह भी बताया कि भारत जल्द ही एक डिजिटल करेंसी पेश करेगा। यह डिजिटल मुद्रा रिजर्व बैंक द्वारा समर्थित होगी, यानी इसे सरकार की गारंटी मिलेगी। इस नई डिजिटल मुद्रा का मुख्य उद्देश्य लेन-देन को आसान बनाना, कागज के इस्तेमाल को कम करना और पारंपरिक बैंकिंग सिस्टम की तुलना में ज्यादा तेज और पता लगाने योग्य (traceable) लेन-देन को संभव बनाना है
बिटकॉइन से अलग होगी डिजिटल करेंसी
भारत की डिजिटल मुद्रा, जिसे सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) भी कहा जाता है, ब्लॉकचेन तकनीक पर आधारित हो सकती है। हालांकि यह बिटकॉइन जैसी अन्य क्रिप्टोकरेंसी से अलग होगी क्योंकि इसे सरकार का समर्थन प्राप्त होगा। इसका मतलब है कि यह ज्यादा स्थिर और सुरक्षित मानी जाएगी।
व्यापारियों को भी होगा फायदा
इस नई डिजिटल मुद्रा से छोटे व्यवसायों और आम लोगों को भी फायदा हो सकता है। वे बिना किसी बिचौलिए के सीधे पैसे भेज और प्राप्त कर सकेंगे, जिससे समय और पैसा दोनों की बचत होगी। साथ ही, सरकार के पास सभी लेन-देन का रिकॉर्ड होगा, जिससे काले धन और मनी लॉन्ड्रिंग जैसी गतिविधियों पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी। यह कदम भारत को डिजिटल अर्थव्यवस्था की ओर तेजी से बढ़ने में मदद करेगा और वैश्विक स्तर पर डिजिटल मुद्राओं के बढ़ते चलन में भारत की स्थिति को मजबूत करेगा।
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