प्रशांत किशोर के 'भावनात्मक चक्रव्यूह' में फंसी बीजेपी! बांकीपुर उपचुनाव में जनसुराज की तैयारी से हैरान
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04-07-2026 02:54 PM
पटना: जनसुराज के नायक प्रशांत किशोर ने बांकीपुर उपचुनाव को लेकर अपनी गंभीरता क्या दिखाई सत्ता के होश उड़ने लगे हैं। सबसे हैरत की बात तो ये है कि प्रशांत किशोर ने जीत के जो रास्ते तय किए हैं, उससे से तो बीजेपी की मुश्किलें और भी बढ़ने वाली है। बांकीपुर उपचुनाव को जिस मुद्दे के सहारे वे लड़ना चाह रहे हैं, वो भावनात्मक तो है ही, साथ ही बीजेपी के चुनावी समीकरण को कमजोर करने वाली। प्रशांत किशोर की सोची-समझी रणनीति कामयाब हो गई तो चुनाव का एक नया ट्रेंड विकसित हो सकता है। चलिए जानिए बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के लिए प्रशांत किशोर की रणनीति क्या है?
नीतीश कुमार को बना रहे हैं टूल
बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के मद्देनजर प्रशांत किशोर नीतीश कुमार को टूल बना रहे हैं। एनडीए की सत्ता से नीतीश कुमार को बाहर करने की जो भी व्यूह रचना तैयार की गई, उसे बिहार की जनता के सामने रख रहे हैं। अपने संबोधन में बार-बार ये सवाल उठा रहे हैं कि क्या नीतीश कुमार अभी जिस हाल में हैं, आप उसी रूप में देखना चाहते हैं? उनके समय की शिक्षा, स्वास्थ और विकास योजना का वर्तमान से तुलना कर बदहाल बिहार की तस्वीर पेश कर वर्तमान सरकार को कठघरे में खड़ा कर बीजेपी के विरुद्ध आग उगलने में लगे है।
पीके के संबोधन नीतीश जरूर आते हैं
बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में जनसभा को संबोधित करते प्रशांत किशोर नीतीश के कार्यकाल के बहाने सम्राट चौधरी के कार्यकाल पर बोलना शुरू कर देते हैं। अभी जिस हाल में नीतीश कुमार हैं, उनके चाहने वाले ऐसा ही नीतीश कुमार को देखना चाहते हैं? पीके का ये भी बताते हैं कि जब नीतीश कुमार कमजोर पड़े तो उनके आसपास के ही नेताओं ने उनके राजनीतिक वजूद को बेच दिया। नितिन नवीन के राज्यसभा सांसद बन जाने से यहां चुनाव हो रहा है।
पीके क्यों उठा रहे हैं नीतीश का मुद्दा?
दरअसल, बांकीपुर विधानसभा के जातीय समीकरण में कायस्थ, सवर्ण, वैश्य, मुस्लिम, यादव और कुर्मी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। स्थिति ये है कि कुर्मी जाति वर्तमान एनडीए की राजनीति से नाराज है। जदयू कार्यालय में जातिवादी नारे लगे। इधर, भरत तिवारी एनकाउंटर से सवर्ण की नाराजगी सामने आई है। प्रशांत किशोर पहले ही खुद भरत तिवारी के गांव जाकर अपनी सद्भावना प्रकट कर चुके हैं। ऐसे में सवर्ण के साथ नाराज कुर्मी को जोड़ने की रणनीति पर काम भी करने लगे हैं। सफलता तो वोट के दिन मजबूती से समीकरण साधने के बाद मिलेगी।
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