जवाब-पूरी तरह राजनीतिक प्रहार है। लालू यादव की सेहत ठीक नहीं है, लेकिन तेजस्वी पर दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है, क्योंकि उन्होंने जेडीयू से हाथ मिला लिया। मनीष सिसोदिया पर कार्रवाई भी राजनीतिक है। अगर वास्तव में करप्शन के खिलाफ मुहिम चल रही होती तो इस सवाल का जवाब दीजिए कि क्या 2014 के बाद ईडी, सीबीआई ने किसी मंत्री से पूछताछ की? सीबीआई सरकार की टेंपरेरी गर्लफ्रेंड और ईडी परमानेंट वैलंटाइन है।
सवाल- ईडी पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद आप लोग इसके खिलाफ रिव्यू याचिका के साथ गए। क्या वजह रही?
जवाब- हम ईडी को असीमित अधिकार दिए जाने वाले एक्ट के खिलाफ हैं और इस पर समीक्षा के लिए सुप्रीम कोर्ट में गए हैं। इसके लिए सभी विपक्षी राजनीतिक दल प्रयास कर रहे हैं। जिस तरह सरकारी एजेंसियों की ओर से सिर्फ विपक्षी दलों को टारगेट किया जा रहा है, वह बहुत खतरनाक है। इसे सुप्रीम कोर्ट को देखना चाहिए। अगर ऐसा ही चलता ही रहा तो बिना केस या सबूत के किसी को भी जेल भेजा जा सकता है। हजारों की तादाद में लोग देश छोड़ रहे हैं। बिजनेस यहां कर रहे हैं, लेकिन रहते बाहर हैं।
सवाल- तो क्या आप देश के सामने नया राजनीतिक विकल्प देंगे? विपक्ष को साथ लाएंगे?
जवाब- हम विकल्प देंगे। विजन देंगे। सकारात्मक दृष्टि से आगे बढ़ेंगे। समस्या भी बताएंगे और उसे लड़ने के लिए विजन भी देंगे। सभी मानते हैं कि राष्ट्रीय स्तर पर कोई अभियान शुरू हो और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चुनौती दी जाए। मुझे लगता है कि इसके लिए गंभीर मंथन की जरूरत है। इसके लिए मैं साधन बन सकता हूं। मेरा कोई राजनीतिक अजेंडा नहीं है।
सवाल-जजों की नियुक्ति को लेकर सरकार से जुडिशरी का विवाद चल रहा है। पूर्व कानून मंत्री और सीनियर वकील के रूप में आपका इस मामले में क्या मानना है?
जवाब-मेरा मानना है कि दोनों सिस्टम में कुछ न कुछ खामियां हैं। लेकिन जजों की नियुक्ति में सरकार का कोई दखल हो, मैं इसके बिल्कुल खिलाफ हूं। यह देश के लिए आपदा जैसा होगा।
