पिछली सुनवाई में जस्टिस एसके कौल ने कहा था कि 2018 में समलैंगिकता को अपराध की कैटिगरी से बाहर करने के बाद कई कपल नजदीकी संबंध में आ गए। ऐसे में केंद्र को कभी इस बारे में सोचा जो रोजाना की जिंदगी में ये लोग फेस कर रहे हैं। लिव इन रिलेशनशिप भी एक कैटगरी है। उसमें भी कुछ दायित्व हैं जिनका निर्वाह होता है। जैसे बैंक अकाउंट, गोद लेने की प्रक्रिया और दूसरे मसले हैं। इन तमाम मसलों को सरकार को देखना चाहिए। सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने इस पर कहा कि हम कोर्ट को आश्वास्त करना चाहते हैं कि वह इस मामले में कोर्ट को सहयोग करेंगे।
