मुर्गी हुई दाल बराबर, आलू-प्याज-टमाटर ने उड़ाए होश
Updated on
07-06-2024 01:22 PM
नई दिल्ली: एक कहावत है 'घर की मुर्गी दाल बराबर'। मतलब कि यदि घर की मुर्गी हो तो लोग उसकी महंगाई पर ध्यान नहीं देते और दाल की तरह उसका जम कर उपभोग करते हैं। लेकिन पिछले महीने बाजार में कुछ ऐसा ही नजारा दिखा। दालें जहां 21 फीसदी महंगी हो गईं वहीं ब्रॉयलर चिकन 16 फीसदी सस्ता हो गया। आलू, टमाटर और प्याज की तो बात ही मत पूछिए। टमाटर जहां 39 फीसदी महंगा हो गया वहीं प्याज 43 फीसदी और आलू 41 फीसदी चढ़ गया।
वेज थाली 9 फीसदी महंगी
क्रिसिल मार्केट इंटेलिजेंस एंड एनालिसिस की मंथली ‘रोटी-राइस रेट’ रिपोर्ट के मुताबिक बीते मई में एक साल पहले के मुकाबले वेज थॉली 9 फीसदी महंगी हो गई। रिपोर्ट में बताया गया है कि आलू, प्याज और टमाटर की महंगाई के चलते घरों में तैयार की जाने वाली वेज थॉली की कॉस्ट मई में सालभर पहले के मुकाबले 9% बढ़कर 27.80 रुपये रही। अप्रैल में यह सालभर पहले के मुकाबले 8% बढ़ी थी।
नॉन-वेज थाली 7 फीसदी सस्ती
आलोच्य महीने में ब्रॉयलर चिकन की कीमतों में नरमी के चलते मई में नॉन-वेज थाली की लागत 7% घटकर 55.90 रुपये रही। इससे पहले अप्रैल में भी नॉन-वेज थाली की कॉस्ट सालभर पहले के मुकाबले 4% घटी थी।
क्यों महंगी हुई प्याज
इस रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले साल मई के मुकाबले इस बार टमाटर के दाम 39% बढ़े हैं। प्याज की कीमत बढ़ने के कई कारण हैं। एक तो रबी सीजन में प्याज की आवक घटी है। दूसरी तरफ सरकार ने प्याज का निर्यात खोल दिया है। इस समय बंगलादेश में प्याज की कीमत 100 रुपये किलो के आसपास है। जाहिर है कि भारतीय निर्यातक वहां महंगे कीमत पर प्याज भेज रहे हैं। इससे घरेलू बाजार में भी प्याज के दाम चढ़ गए।
आलू के दाम क्यों चढ़े
देश में आलू उत्पादन के लिए कुछ इलाके फेमस हैं। जैसे उत्तर भारत में दिल्ली एनसीआर के पास आगरा-फरूखाबाद का क्षेत्र और पश्चिम बंगाल के कुछ इलाके। इस साल आगरा-फरूरखाबाद के क्षेत्र में तो सबकुछ नार्मल है, लेकिन पश्चिम बंगाल में आलू की फसल को नुकसान हुआ है। दरअसल वहां बेमौसम की बारिश से आलू की फसल पर असर पड़ा है। इस वजह से आलू के दाम में 41 फीसदी का इजाफा देखा गया। गर्मी बढ़ने से टमाटर की कीमत भी 40 फीसदी बढ़ गई।
चावल-दाल भी हुए महंगे
रिपोर्ट के मुताबिक, वेज थाली की लागत में 13% हिस्सेदारी चावल की और 9% हिस्सेदारी दालों की है। मई में चावल के दाम सालभर पहले के मुकाबले 13% और दालों के 21% बढ़ गए। अप्रैल में चावल के दाम में 14% और दालों में 20% की बढ़त दिखी थी।
कई चीजों के दाम घटे भी हैं
मई में जीरा के दाम 37%, मिर्च के 25% और वेजिटेबल ऑयल के दाम 8% घटे। अगर ऐसा नहीं होता तो वेज थाली की लागत और बढ़ जाती। अप्रैल में जीरा 40 प्रतिशत, मिर्च 31 प्रतिशत और वेजिटेबल ऑयल 10 प्रतिशत सस्ते हुए थे। मई में नॉन-वेज थाली की कॉस्ट 7% घटने में बड़ा योगदान ब्रॉयलर की कीमतों में सालभर पहले के मुकाबले 16% कमी का रहा। अप्रैल में ब्रॉयलर के दाम 12% घटे थे।
मांसाहारियों ने थाली से दाल हटा कर चिकन शामिल कर लिया
हालांकि अप्रैल से तुलना करने पर मई में वेज थाली की कॉस्ट 1% बढ़ी दिख रही है और नॉन-वेज थाली की लागत 1% कम रही। अप्रैल के मुकाबले मई में वेज थाली महंगी होने में आलू के दाम में 9% बढ़त का बड़ा हाथ रहा। वहीं, नॉन-वेज थाली की लागत में 50% हिस्सा रखने वाले ब्रॉयलर का दाम अप्रैल के मुकाबले मई में 2% घटा। इससे नॉन-वेज थाली सस्ती हुई। क्रिसिल के मुताबिक, उसने इस स्टडी में जो वेज थाली चुनी, उसमें रोटी, चावल, दाल, तेल-मसाले, दही और सलाद के अलावा सब्जियों (आलू, प्याज और टमाटर) को शामिल किया गया। नॉन-वेज थाली में दाल को हटाकर उसकी जगह पर चिकन ला दिया गया।
मुंबई: विदेशी मुद्रा भंडार के मोर्चे पर भारत की स्थिति अभी कुछ बेहतर हुई है। यह लगातार चौथा सप्ताह रहा जबकि भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में बढ़ोतरी दिखी है।…
मुंबई: वेलोरा इम्पैक्ट लिमिटेड (BSE: 531257) ने इस साल की पहली तिमाही में अच्छा प्रदर्शन किया है। इस कंपनी को पहले प्रतीक्षा केमिकल्स लिमिटेड (Vellora Impact Ltd) के नाम से…
नई दिल्ली: अनिल अग्रवाल की कंपनी वेदांता एल्युमीनियम मेटल (Vedanta Aluminium Metal) ने चालू वित्त वर्ष की जून (पहली) तिमाही के शानदार वित्तीय परिणाम घोषित किए हैं। मजबूत राजस्व वृद्धि…
नई दिल्ली: भारतीय रेल (Indian Railways) की ट्रेन में आप अक्सर यात्रा करते होंगे। उसमें आप ऐसी ढेरों चीजें नोट करते होंगे जो कि किसी 'ग्राहक के अधिकार' के विपरीत…
नई दिल्ली: टाटा ग्रुप की कंपनी टाटा स्टील जर्मनी की कंपनी मार्ट्रेड के साथ अपनी 25 साल पुरानी पार्टनरशिप खत्म करने जा रही है। दोनों कंपनियों ने 2001 में जॉइंट…
नई दिल्ली: कंपनियां अब अपने कर्मचारियों के स्वास्थ्य का ख्याल रखने के लिए पुराने ढर्रे के इंश्योरेंस से आगे बढ़ रही हैं। अब साधारण मेडिकल इंश्योरेंस के अलावा कैंसर जैसी…