चीन ने भारत की दुखती रग पर रखा हाथ, किसानों की बढ़ेगी मुश्किल, बिगड़ जाएगा सरकार का बजट
Updated on
27-06-2025 01:21 PM
नई दिल्ली:चीन ने रेयर अर्थ मैग्नेट्स के बाद भारत को स्पेशिएलिटी फर्टिलाइजर्स की सप्लाई भी रोक दी है। इस बीच डाई-अमोनिया फॉस्फेट यानी डीएपी की कीमत में हाल में काफी तेजी आई है। इससे किसानों की मुश्किलें बढ़ सकती है और साथ ही सरकार पर भी सब्सिडी का बोझ बढ़ सकता है। जून में इसकी कीमत 800 डॉलर प्रति टन पहुंच गई जो हाल के महीनों में सबसे ज्यादा है। इंडस्ट्री के मुताबिक भारत ने पिछले साल करीब 46 लाख टन डीएपी का आयात किया था। इसमें चीन की हिस्सेदारी 8.5 लाख टन यानी करीब 18.4 फीसदी है। डीएपी की कीमत बढ़ने से इसे आयात करने वाली कंपनियों का मार्जिन भी प्रभावित हो सकता है।
यूरिया के बाद डीएपी भारत में सबसे ज्यादा यूज होने वाला फर्टिलाइजर्स है। देश में इसकी सालाना खपत 10 से 11 मिलियन टन है जिसमें से करीब 5-6 मिलियन टन आयात किया जाता है। साथ ही भारत डीएपी में यूज होने वाले फॉस्फोरस और अमोनिया का भी आयात करता है। बिजनस स्टैंडर्ड की एक रिपोर्ट के मुताबिक इंडस्ट्री के जानकारों का कहना है कि आयातित फॉस्फोरस में प्रति टन 10 डॉलर कीमत बढ़ने से फिनिश्ड डीएपी की कीमत प्रति टन 5 डॉलर बढ़ जाती है।
चीन से आयात में गिरावट
ट्रेडर्स का कहना है कि चीन से डीएपी के आयात में गिरावट आई है। फाइनेंशियल ईयर 2024 में भारत ने चीन से 22 लाख टन डीएपी का आयात किया था जो उसके कुल इम्पोर्ट का 39.2 फीसदी था। भारत अब पश्चिम एशिया खासकर सऊदी अरब से इसका आयात कर रहा है। लेकिन ईरान-इजरायल युद्ध और ईरान की स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद करने की धमकी से डीएपी की कीमत में काफी उछाल देखी गई। जनवरी में इसकी कीमत 633 डॉलर प्रति टन थी जो जून में 780 डॉलर पहुंच गई। अप्रैल के बाद से भारत में फिनिश्ड डीएपी की कीमत में प्रति टन 100 डॉलर की तेजी आई है।
जानकारों का कहना है कि चीन के स्पेशिएलिटी फर्टिलाइजर्स की सप्लाई रोकने से किसानों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। भारत सालाना 6 लाख टन स्पेशिएलिटी फर्टिलाइजर्स का आयात करता है। इसमें से 80 फीसदी आयात डायरेक्ट या इनडायरेक्ट चीन से होता है। देश में इनका केवल 10 फीसदी उत्पादन होता है और बाकी 10 फीसदी हिस्सा दूसरे देशों से आता है। परंरागत फर्टिलाइजर्स की तुलना में इसकी कीमत बहुत ज्यादा है और यह वजह है कि भारत में इनका ग्रोथ रेट ज्यादा नहीं है।
कैसे बदलेंगे हालात
एक किलो परंपरागत फर्टिलाइजर की कीमत जहां 5 से 6 रुपये बैठती है, वहीं एक किलो स्पेशिएलिटी फर्टिलाइजर्स की कीमत 80 से 100 रुपये होती है। इसकी कमी से फलों, सब्जियों और फसल की उत्पादकता, क्वालिटी और किसानों की इनकम असर हो सकता है। इसके लिए देश में ही स्पेशिएलिटी फर्टिलाइजर्स के उत्पादन के लिए काम करने की जरूरत है। इसके लिए सरकार को स्टार्टअप कंपनियों के साथ मिलकर काम करने की जरूरत है।
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