चीन ने दी दुनिया को धमकी, कहा- अमेरिका के साथ किसी ने बिजनेस डील की तो खैर नहीं, जवाबी कार्रवाई की चेतावनी
Updated on
21-04-2025 02:03 PM
नई दिल्ली: चीन ने उन देशों को सीधी चेतावनी दी है जो अमेरिका के साथ व्यापार समझौता करने की सोच रहे हैं। चीन का कहना है कि ऐसे समझौतों से बीजिंग को नुकसान हो सकता है। यह चेतावनी सोमवार को आई। खबरों के अनुसार, डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका दूसरे देशों को चीन के साथ व्यापार कम करने के बदले में टैरिफ में छूट दे सकता है।
चीन की कॉमर्स मिनिस्ट्री ने कहा कि वह सभी पक्षों का सम्मान करता है कि वे अमेरिका के साथ बराबरी के आधार पर बातचीत करके अपने आर्थिक और व्यापारिक मतभेदों को सुलझाएं। लेकिन चीन ने यह साफ कर दिया कि अगर ऐसे समझौते से उसे नुकसान होता है तो वह चुप नहीं रहेगा।
...तो अमेरिका की तरह कदम उठाएगा चीन
मंत्रालय ने कहा कि चीन किसी भी ऐसे समझौते को कभी स्वीकार नहीं करेगा जो चीन की कीमत पर हो। मंत्रालय ने आगे कहा कि अगर ऐसा कोई समझौता किया जाता है, तो चीन इसे कभी स्वीकार नहीं करेगा और इसका दृढ़ता से और उसी तरह से जवाब देगा। इसका मतलब है कि चीन भी वैसे ही कदम उठाएगा जैसे अमेरिका ने उठाए हैं।
यह प्रतिक्रिया ट्रंप के उन प्रयासों के बाद आई है जिसमें वे चीन के साथ व्यापारिक रिश्ते कम करने वाले देशों को प्रोत्साहन देकर वैश्विक व्यापार संबंधों को फिर से बनाने की कोशिश कर रहे हैं। चीन इसे आर्थिक दबाव का एक तरीका मानता है।
'चापलूसी' पर क्या कहा?
बीजिंग ने उन सरकारों की भी आलोचना की जो अमेरिका की मांगों के आगे झुक सकती हैं। चीन के वाणिज्य मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने कहा कि चापलूसी से शांति नहीं मिलेगी और समझौते का सम्मान नहीं किया जाएगा। उन्होंने इसे अमेरिका के दबाव के आगे नासमझी से झुकना बताया।
चीन का मानना है कि सभी पक्षों को टैरिफ के मुद्दे पर निष्पक्षता और न्याय के साथ खड़ा होना चाहिए। चीन को उम्मीद है कि उसके व्यापारिक साझेदार इन मूल्यों का पालन करेंगे।
अपने वैश्विक भागीदारों के लिए एक सुलह वाले लहजे में मंत्रालय ने कहा कि वह सभी पक्षों के साथ एकजुटता और समन्वय को मजबूत करने, स्थिति से निपटने के लिए हाथ मिलाने और एकतरफा दादागिरी का संयुक्त रूप से विरोध करने के लिए तैयार है।
क्या है चीन का संकेत?
यह आह्वान अमेरिकी प्रभाव को संतुलित करने के लिए समान विचारधारा वाली अर्थव्यवस्थाओं के साथ सहयोग को मजबूत करने के चीन के इरादे को दर्शाता है। यह संदेश इस बात का भी संकेत है कि चीन सक्रिय रूप से उन देशों का गठबंधन बनाने की कोशिश कर रहा है जो वाशिंगटन की आक्रामक टैरिफ नीतियों का विरोध करते हैं।
नई दिल्ली: देश के सबसे बड़े औद्योगिक समूह टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी टाटा संस की सालाना आम बैठक (AGM) अगले महीने होनी है। लेकिन इसमें अड़चन आ सकती है।…
नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में तनाव कम होने से आज शुरुआती कारोबार में कच्चे तेल में गिरावट आई है। अमेरिका और ईरान ने फिलहाल एकदूसरे के ठिकानों पर हमले रोक…
नई दिल्ली: मार्च से जून के बीच विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार में भारी बिकवाली की। लेकिन जुलाई में यह सिलसिला टूट गया। जुलाई में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने…
नई दिल्ली: रेयर अर्थ को नए जमाने की टेक्नोलॉजी की रीढ़ कहा जाता है। इनका यूज इलेक्टिक वीकल, इंडस्ट्रियल ऑटोमेशन और डिफेंस में होता है। अभी इसकी सप्लाई चेन पर…
नई दिल्ली: होर्मुज जलडमरूमध्य में एक बार फिर से संकट गहरा गया है। यही वजह है कि कच्चे तेल की ढुलाई पर एक बार फिर से जियोपोलिटकल रिस्क प्रीमियम (Geopolitical…
नई दिल्ली: सरकार ने अनुराग जैन को नीति आयोग का नया सीईओ नियुक्त किया है। अनुराग जैन मध्य प्रदेश कैडर के 1989 बैच के IAS अधिकारी हैं। कैबिनेट की नियुक्ति…