देश में कितनी तेजी से फैली है कोचिंग इंडस्ट्री, GST कलेक्शन देखकर फटी रह जाएंगी आंखें
Updated on
01-08-2024 02:56 PM
नई दिल्ली: देश में कोचिंग इंडस्ट्री कितनी तेजी से फल-फूल रही है, इसका अंदाजा कोचिंग इंस्टिट्यूशन से मिल रहे जीएसटी कलेक्शन को देखकर लगाया जा सकता है। पिछले चार-पांच साल में कोचिंग इंस्टिट्यूशन से मिलने वाले जीएसटी कलेक्शन में दोगुनी से ज्यादा बढ़ोतरी हुई है। वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग के आंकड़ों के मुताबिक 2019-20 में जहां कोचिंग संस्थानों से 2240.73 करोड़ रुपये का जीएसटी कलेक्शन मिला, वहीं 2023-24 में यह संख्या बढ़कर 5517.45 करोड़ हो गई है। 2020-21 में कोविड के दौरान भी यह आंकड़ा 2215.24 करोड़ का रहा। 2021-22 में 3045.12 करोड़ और 2022-23 में 4667.03 करोड़ रुपये कलेक्शन रहा। राज्यसभा के सदस्य प्रमोद तिवारी की ओर से पूछे गए एक सवाल के लिखित जवाब में यह जानकारी दी गई है।
लिखित जवाब के मुताबिक राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में भी यह माना गया है कि छात्रों के साथ-साथ उनके पैरंट्स बेहतर रिजल्ट के लिए कोचिंग को चुन रहे हैं। विषय को समझाने की जगह रटने पर फोकस कराया जा रहा है। समाधान के लिए नई शिक्षा नीति में रेगुलर फोरमेटिव असेसमेंट की सिफारिश की गई है। सिर्फ रटने और परीक्षा-केंद्रित तैयारी पर जोर देने वाली कोचिंग संस्कृति के प्रभाव को कम करने के लिए जरूरी कदम उठाने की बात कही गई है। वीएसपीके एजुकेशन सोसायटी के चेयरमैन एस. के. गुप्ता का कहना है कि पैरंट्स व छात्रों पर कोचिंग का बुखार इस कदर हावी है कि वे डमी स्कूलों में चले जाते हैं। डमी स्कूलों में जाकर एडमिशन ले लेते हैं और क्लास कोचिंग में लेते हैं। जबकि स्कूल जाने से बच्चा ज्यादा सीखता है, उस पर तनाव कम हावी होता है।
CUET, NEET, JEE... बोर्ड सब्जेक्ट बेस्ड
2024 में सरकार ने जेईई मेन के साथ-साथ मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG 2024 के सिलेबस में भी कटौती की थी। CUET, NEET, JEE जैसे बड़े एंट्रेस टेस्ट बोर्ड स्तर की परीक्षाओं में पढ़े गए कोर सब्जेक्ट के आधार पर कराए गए हैं। यानी बोर्ड क्लासेज में अच्छी तरह से पढ़ने वाले छात्र इन बड़े एंट्रेंस टेस्ट को बिना कोचिंग के भी क्रैक कर सकते हैं। जेईई एक वर्ष में दो बार होती है ताकि छात्र बेस्ट स्कोर चुन सके। सीयूईटी, जेईई और नीट देश की 13 भारतीय भाषाओं में कराई जाती है। अब सरकार ने परीक्षा सुधारों के लिए हाई लेवल कमिटी भी बनाई है, जो तीन स्तर की रणनीति पर काम कर रही है। 2025 के एंट्रेंस टेस्ट में कुछ और बदलाव की उम्मीद है।
गाइडलाइंस ही काफी नहीं
छात्रों से ज्यादा फीस वसूलने, छात्रों पर ज्यादा तनाव थोपने जैसी समस्याओं को देखते हुए शिक्षा मंत्रालय ने कोचिंग सेंटरों के लिए 16 जनवरी 2024 को गाइडलाइंस तो जारी की थी, लेकिन यह काफी नहीं। कोचिंग सेंटर अपने इंफ्रास्ट्रक्चर पर ध्यान नहीं देते, नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं। इस वजह से छात्रों की जान पर खतरा है। इसे हर हाल में रोकना होगा। केंद्र को राज्यों के साथ मिलकर छात्रों के हित वाली पॉलिसी पर काम करना होगा।
मुंबई: विदेशी मुद्रा भंडार के मोर्चे पर भारत की स्थिति अभी कुछ बेहतर हुई है। यह लगातार चौथा सप्ताह रहा जबकि भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में बढ़ोतरी दिखी है।…
मुंबई: वेलोरा इम्पैक्ट लिमिटेड (BSE: 531257) ने इस साल की पहली तिमाही में अच्छा प्रदर्शन किया है। इस कंपनी को पहले प्रतीक्षा केमिकल्स लिमिटेड (Vellora Impact Ltd) के नाम से…
नई दिल्ली: अनिल अग्रवाल की कंपनी वेदांता एल्युमीनियम मेटल (Vedanta Aluminium Metal) ने चालू वित्त वर्ष की जून (पहली) तिमाही के शानदार वित्तीय परिणाम घोषित किए हैं। मजबूत राजस्व वृद्धि…
नई दिल्ली: भारतीय रेल (Indian Railways) की ट्रेन में आप अक्सर यात्रा करते होंगे। उसमें आप ऐसी ढेरों चीजें नोट करते होंगे जो कि किसी 'ग्राहक के अधिकार' के विपरीत…
नई दिल्ली: टाटा ग्रुप की कंपनी टाटा स्टील जर्मनी की कंपनी मार्ट्रेड के साथ अपनी 25 साल पुरानी पार्टनरशिप खत्म करने जा रही है। दोनों कंपनियों ने 2001 में जॉइंट…
नई दिल्ली: कंपनियां अब अपने कर्मचारियों के स्वास्थ्य का ख्याल रखने के लिए पुराने ढर्रे के इंश्योरेंस से आगे बढ़ रही हैं। अब साधारण मेडिकल इंश्योरेंस के अलावा कैंसर जैसी…