कंपनियों का दांव! बड़े सियासी दलों को दिया करोड़ों का चंदा, देखिए किसको कितने रुपये मिले
Updated on
22-03-2024 01:14 PM
नई दिल्ली: भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने इलेक्टोरल बॉन्ड (Electoral Bond) से जुड़ा पूरा डेटा निर्वाचन आयोग को सौंप दिया है। एसबीआई ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक, चुनावी बॉन्ड्स से जुड़ी सारी जानकारी तय समय सीमा यानी 21 मार्च शाम पांच बजे से पहले उपलब्ध करा दी है। इसके बाद चुनाव आयोग ने इसे अपनी ऑफिशियल वेबसाइट पर अपलोड भी कर दिया है। इसमें बॉन्ड का अल्फा न्यूमेरिक नंबर भी बताया गया है। इससे पता चला है कि किस कंपनी ने कौन से राजनीतिक दल को कितना चुनावी चंदा दिया है। नए डेटा से खुलासा हुआ है कि ऐसी कई कंपनियां हैं, जिन्होंने बीजेपी और कांग्रेस दोनों दलों को करोड़ों का चंदा दिया है। मेघा ग्रुप सबसे ज्यादा इलेक्टोरल बॉन्ड खरीदने वाली कंपनियों में से एक है। इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (MEIL) हैदराबाद बेस्ड है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, महाराष्ट्र प्रोजेक्ट से पहले इस कंपनी ने करोड़ों के इलेक्टोरल बॉन्ड (Electoral Bond) खरीदे थे। मेघा इंजीनियरिंग ने भाजपा-कांग्रेस दोनों को सबसे ज्यादा चंदा दिया है।
बड़े सियासी दलों को दिए करोड़ों रुपये
बीजेपी और कांग्रेस दोनों को मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रा और उसकी सब्सिडियरी वेस्टर्न यूपी पावर ने सबसे ज्यादा चंदा दिया है। कंपनी ने भाजपा को 664 करोड़ रुपये और कांग्रेस को 128 करोड़ का चंदा दिया है। इसी कंपनी ने केसीआर की भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) को भी 390 करोड़ रुपये का चंदा दिया है। इसके बाद वेदांता ने कांग्रेस को दूसरा सबसे बड़ा चंदा 104 करोड़ का दिया है। वहीं फ्यूचर गेमिंग एंड होटल तृणमूल की सबसे बड़ी डोनर रही है। बॉन्ड से 623 करोड़ रुपये गोपनीय रूप से पार्टियों को मिले हैं। इनमें 466.31 करोड़ रुपये भाजपा और 70.77 करोड़ रुपये कांग्रेस को मिले हैं। ये रकम अप्रैल 2019 की है। इस दौरान कंपनियां गुप्त चंदा दे सकती थीं।
इतने वर्षों का है डेटा
इलेक्टोरल बॉन्ड की लेटेस्ट लिस्ट में अप्रैल 2019 से फरवरी 2024 तक का डेटा है। इसमें मार्च 2018 से 1 अप्रैल 2019 तक का डेटा नहीं है। इस दौरान 4002 करोड़ रुपये के 9159 इलेक्टोरल बॉन्ड खरीदे गए थे। इसकी जानकारी के लिए सुप्रीम कोर्ट में अलग याचिका लगाई गई है।
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