कांग्रेस के वकील भी शुवेंदु के समर्थन में, बंगाल पंचायत चुनाव की सुप्रीम सुनवाई के बाद अकेली पड़ीं ममता बनर्जी
Updated on
21-06-2023 07:20 PM
कोलकाता: बंगाल पंचायत चुनावों में केंद्रीय बलों की तैनाती को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा है। इसके साथ ही निर्देश का पालन न करने को लेकर राज्य चुनाव आयोग समेत ममता सरकार (Mamata Government) को फटकार लगाई है। सबसे खास बात यह कि कांग्रेस ने भी इस पूरे मामले में बीजेपी का समर्थन करते हुए टीएमसी (Tmc) का विरोध किया है। कांग्रेस की ओर से वकील ने सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में दलील रखते हुए बीजेपी नेता सुवेंदु अधिकारी (Suvendu Adhikari) के पक्ष को स्वीकार किया। इसके बाद ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) की मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं। बीते कुछ दिनों पहले ही ममता ने कांग्रेस (Congress) पर तंज कसते हुए निशाना साधा था कि अगर ऐसा हाल रहा तो फिर लोकसभा चुनाव (Lok sabha election 2024) में समर्थन की उम्मीद न करें।
टीएमसी पक्ष के वकीलों ने रखी यह दलील
बंगाल सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ अग्रवाल और राज्य चुनाव आयोग की ओर से मीनाक्षी अरोड़ा ने सुप्रीम कोर्ट के सामने दलील रखी। दोनों ने सुप्रीम कोर्ट को समझाने की कोशिश की कि कलकत्ता हाई कोर्ट ने 8 जुलाई को होने वाले पंचायत चुनावों के लिए केंद्रीय बलों की तैनाती का आदेश देने में गलती की थी। मतदान की तिथि घोषित होने के एक दिन बाद ही यह फैसला जल्दबाजी जैसा था। उन्होंने कहा कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने की तैयारियों में कोई कमी है या नहीं, इसका पता लगाने के लिए हाई कोर्ट को कुछ दिन इंतजार करना चाहिए था।
राज्य चुनाव आयोग की वकील ने कही अधिकार क्षेत्र की बात
राज्य चुनाव आयोग की ओर से वकील अरोड़ा ने कहा कि केंद्रीय बलों की मांग करना राज्य आयोग के अधिकार क्षेत्र में नहीं है। राज्य की ओर से बताया गया कि सुरक्षा बलों की आवश्यकताओं के संबंध में आयोग के मूल्यांकन से पहले ही हाई कोर्ट ने दखल किया था। साथ ही कहा कि कुल 61,000 से अधिक बूथों में से केवल 189 संवेदनशील बूथ हैं, जहां अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की आवश्यकता थी। ऐसे में राज्य भर में केंद्रीय बलों की तैनाती पर सवाल खड़ा होता है।
सुप्रीम कोर्ट की ओर से मिला यह जवाब
सुप्रीम कोर्ट की ओर से मामले की सुनवाई कर रही पीठ ने कहा कि बंगाल के चुनावों में पहले भी हिंसा देखी गई थी। तथ्य यह है कि हाई कोर्ट आदेश का यह सुनिश्चित करने के लिए है कि पूरे पश्चिम बंगाल राज्य में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव आयोजित किए जाएं। क्योंकि राज्य एक ही दिन स्थानीय निकायों के लिए चुनाव कर रहा है और ऐसे में हमें लगता है कि उच्च न्यायालय के आदेश में किसी हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है।'
क्या बोले बीजेपी और कांग्रेस के वकील
बीजेपी नेता शुवेंदु अधिकारी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे ने कहा कि ममता सरकार राज्य में केंद्रीय बलों की तैनाती को रोकने के लिए एक एजेंडा चला रही है। दरअसल शुवेंदु की ही याचिका पर हाईकोर्ट ने आदेश पारित किया था। साल्वे ने पीठ से कहा कि राज्य में कई उम्मीदवारों को धमकाया जा रहा है और नामांकन पत्र दाखिल करने से रोका जा रहा है। इस दौरान कांग्रेस की ओर से भी वकील विवेक तन्खा ने टीएमसी सरकार का विरोध जताते हुए शुवेंदु अधिकारी का समर्थन किया। कांग्रेस सांसद अधीर रंजन चौधरी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तन्खा ने कहा कि उनके मुवक्किल हाई कोर्ट के आदेश से पहले अप्रैल से केंद्रीय बलों के लिए दबाव बना रहे थे।
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