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यूपी में सपा के साथ नहीं, अकेले मैदान में उतरना चाहते हैं कांग्रेस नेता, राहुल- खड़गे लेंगे आखिरी निर्णय

Updated on 20-07-2023 12:50 PM
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में लोकसभा चुनाव 2024 की तैयारियां शुरू हो गई है। कांग्रेस की ओर से चुनाव के समीकरणों की तलाश शुरू की गई है, जिससे पार्टी को विशेष तौर पर तैयारियों को पूरा कराया जा रहा है। ऐसे में बेंगलुरु में हुई बैठक में विपक्षी गठबंधन को नया नाम, नई पहचान मिली है। इस विपक्षी एकता गठबंधन में समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव और राष्ट्रीय लोक दल प्रमुख जयंत चौधरी भी शामिल हुए थे। ऐसे में कयासों का दौर शुरू हो गया है। माना जा रहा है कि लोकसभा चुनाव 2024 में समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय लोक दल और कांग्रेस का गठबंधन यूपी में हो सकता है। हालांकि, गठबंधन को लेकर स्थानीय कांग्रेसी नेताओं के बीच उलझन साफ दिख रही है।

कांग्रेस के स्थानीय नेता पुरजोर तरीके से अकेले चुनाव लड़ने की वकालत करते दिख रहे हैं। पिछले एक पखवाड़े में स्थानीय कांग्रेस नेताओं की दो बैठकें हो चुकी हैं। इसमें अकेले चुनाव लड़ने पर चर्चा हुई। समाजवादी पार्टी से गठबंधन को लेकर तमाम सीनियर नेताओं के बीच एकमत नहीं दिख रहा है। हालांकि, इस मामले में कोई भी नेता खुलकर कुछ भी कहने से बच रहे हैं। उनका कहना है कि हाइकमान आखिरी निर्णय लेगा ऐसे में अखिलेश यादव के साथ 2024 के चुनाव में गठबंधन होगा या नहीं। यह फैसला अब राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मलिकार्जुन खरगे करेंगे।

आखिर अखिलेश पर सर्वसम्मति क्यों नहीं?

कांग्रेस के भीतर अखिलेश यादव के साथ गठबंधन को लेकर सर्वसम्मति नहीं दिख रही है। दरअसल, यूपी में लंबे समय बाद कांग्रेस ने यूपी चुनाव 2022 में पूरी ताकत के साथ चुनावी मैदान में उतरी। इसने प्रदेश भर में कांग्रेस कार्यकर्ताओं में भरोसा दिलाया है कि पार्टी भी भाजपा की तर्ज पर अकेले दम पर प्रदेश में उतर सकती है। ऐसे में एक बार फिर पार्टी किसी बड़े क्षेत्रीय दल के साथ कुछ सीटों पर उम्मीदवार उतारने के मूड में नहीं दिख रही है। साथ ही, पिछले दिनों अखिलेश यादव को लेकर मुस्लिम वोट बैंक के भीतर से नाराजगी के मामले सामने आए हैं। इस प्रकार की स्थिति को देखते हुए पार्टी किसी प्रकार का जोखिम उठाने के मूड में नहीं दिख रही है।

अंडरकरेंट होने का दावा

कांग्रेस के प्रदेश स्तर के नेताओं का दावा है कि पार्टी को लेकर एक अंडरकरेंट है। कर्नाटक चुनाव रिजल्ट के बाद स्थिति बदली है। भाजपा के खिलाफ जमीन पर असंतोष का भाव होने का दावा किया जा रहा है। वहीं, कांग्रेस के प्रति लोगों की उम्मीद दिखती है। कांग्रेस मुस्लिम, पिछड़ा से लेकर सवर्ण वोट बैंक में पार्टी के प्रति माहौल बनने का दावा करती दिखती है। पार्टी नेताओं का कहना है कि कांग्रेस के प्रति लोगों के झुकाव का कारण अन्य पार्टियों पर अविश्वास है। दरअसल, 80 के दशक के बाद से कांग्रेस यूपी की सत्ता से बाहर रही है। ऐसे में पार्टी नेताओं का दावा है कि पार्टी के प्रति लोगों का भरोसा बढ़ा है।

स्थिति तो अलग दिख रही

पार्टी नेताओं के दावे भले ही कुछ हों, जमीन पर कांग्रेस की स्थिति खराब दिखती है। पार्टी का एक वर्ग किसी गठबंधन की बात करता दिख रहा है। पार्टी ने लोकसभा चुनाव 2014 में 2 सीटों पर जीत दर्ज की। 2019 में कांग्रेस को महज एक सीट पर जीत मिली। पार्टी के गढ़ अमेठी से राहुल गांधी चुनाव हार गए। केवल रायबरेली सीट पर पार्टी जीती। 6.3 फीसदी वोट शेयर और सोनिया गांधी की जीत के साथ इस चुनाव में पार्टी आगे बढ़ती दिखी। यूपी चुनाव 2022 में किसी भी बड़े दल से गठबंधन नहीं होने के कारण पार्टी को नुकसान झेलना पड़ा। कांग्रेस प्रदेश में 2.33 वोट शेयर के साथ 2 सीटों पर जीत दर्ज करने में कामयाब हुई।

2019 में भाजपा ने करीब 50 फीसदी वोट शेयर के आंकड़े को छुआ। सपा-बसपा गठबंधन के कारण समाजवादी पार्टी करीब 18 फीसदी वोट शेयर और 5 सीटें जीतने में कामयाब रही है। यूपी चुनाव में 403 में से 399 सीटों पर चुनाव लड़ने वाली कांग्रेस नेताओं का कहना है कि विधानसभा और लोकसभा चुनाव में स्थिति अलग होती है। यह चुनाव में दिखेगी।

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