पाकिस्तान के रेलवे कर्मचारियों पर संकट, न पेंशन मिल रही और न फंड, देनदारियों का 2136 करोड़ रुपया बकाया
Updated on
19-05-2026 12:24 PM
नई दिल्ली: वित्तीय प्रदर्शन में सुधार के तमाम दावों के बावजूद पाकिस्तान रेलवे ( Pakistan Railways ) इस समय भारी वित्तीय संकट से जूझ रहा है। एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, रेलवे पर अपने रिटायर्ड और वर्तमान कर्मचारियों की देनदारियों का 2136 करोड़ पाकिस्तानी रुपया (भारतीय मुद्रा में करीब 735 करोड़ रुपये) बकाया है, जिसका भुगतान अब तक नहीं किया गया है।
समा टीवी (SAMAA TV) की ओर से पेश आधिकारिक दस्तावेजों के मुताबिक, इस बकाया राशि को मंजूरी देने और फंड जारी करने को लेकर रेल मंत्रालय और वित्त मंत्रालय के बीच एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। रेलवे मंत्रालय ने इस पूरी देरी की जिम्मेदारी वित्त मंत्रालय पर मढ़ दी है और इस संबंध में सभी जरूरी दस्तावेज देश की नेशनल असेंबली (संसद) को सौंप दिए हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि मार्च 2023 के बाद रिटायर हुए कर्मचारियों को अभी तक उनके हक का पैसा नहीं मिला है।
कहां और कितना पैसा अटका है?
दस्तावेजों के अनुसार, कुल लंबित राशि का एक बड़ा हिस्सा रिटायर्ड कर्मचारियों और उनके परिवारों से जुड़ा है। प्रमुख देनदारियां इस प्रकार हैं:
कुल राशि में से 1000 करोड़ रुपये रिटायर कर्मचारियों की ओर दायर किए गए 5,578 ग्रेच्युटी दावों से जुड़े हैं।
प्रधानमंत्री सहायता पैकेज के तहत आने वाले 4,135 मामलों में 752 करोड़ रुपये का भुगतान अभी बाकी है।
इनके अलावा 118 करोड़ रुपये मैरिज ग्रांट (विवाह अनुदान) के रूप में और 152 करोड़ रुपये बेनेवोलेंट फंड (परोपकारी कोष) के तहत लंबित हैं।
दिसंबर 2025 से अटकी है फाइल
पाकिस्तान सरकार (रेल मंत्रालय) का कहना है कि बार-बार अनुरोध किए जाने के बावजूद वित्त मंत्रालय द्वारा अतिरिक्त फंड आवंटित नहीं किया गया है। इस बीच 819 करोड़ रुपये की अतिरिक्त ग्रांट की मांग वाली एक समरी दिसंबर 2025 से वित्त मंत्रालय के पास लंबित पड़ी है। पिछले पांच महीनों के दौरान आर्थिक समन्वय समिति (ECC) ने भी इस मामले पर कोई विचार नहीं किया है।
डॉक्यूमेंट्स से यह भी पता चलता है कि पाकिस्तान रेलवे ने पिछले वित्तीय वर्ष के दौरान 9300 करोड़ रुपये का राजस्व कमाया था, जबकि उसे सरकारी अनुदान के रूप में 6400 करोड़ रुपये प्राप्त हुए थे। इसके बावजूद कर्मचारियों की देनदारियां पूरी नहीं की जा सकीं।
संकट में पाकिस्तान
एक अन्य आर्थिक रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि बुनियादी ढांचागत सुधारों के बिना केवल आर्थिक स्थिरता पर पाकिस्तान का लगातार ध्यान केंद्रित रखना देश को बार-बार आने वाले संकटों और मंदी के जाल में फंसा सकता है।
यह रिपोर्ट तब आई है जब प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ ने खुद यह स्वीकार किया है कि अमेरिका-ईरान संघर्ष ने उच्च ऊर्जा कीमतों, भू-राजनीतिक अनिश्चितता और व्यापार व सप्लाई चेन में आए व्यवधानों के माध्यम से पाकिस्तान और अन्य क्षेत्रीय अर्थव्यवस्थाओं पर बेहद नकारात्मक प्रभाव डाला है।
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