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केजरीवाल के PA बिभव कुमार की याचिका पर फैसला आज:दिल्ली हाईकोर्ट में अपनी गिरफ्तारी को चुनौती दी थी

Updated on 01-07-2024 02:15 PM

दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल के पीए बिभव कुमार की याचिका पर आज हाईकोर्ट फैसला सुनाएगा। बिभव ने सीएम आवास पर आप सांसद स्वाति मालीवाल से मारपीट के सिलसिले में अपनी गिरफ्तारी को चुनौती दी है। जस्टिस स्वर्णकांत शर्मा ने 31 मई को फैसला सुरक्षित रख लिया था।

वहीं, 14 जून को कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया। जस्टिस अमित शर्मा की वेकेशन बेंच ने पुलिस से मामले में अब तक हुई जांच की स्टेटस रिपोर्ट मांगी थी।

बिभव पर AAP की राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल से 13 मई को सीएम आवास पर मारपीट का आरोप है। उन्हें 18 मई को गिरफ्तार किया गया था। कोर्ट ने बिभव को 14 जून तक ज्यूडिशियल कस्टडी में भेजा है।

बिभव ​​​​​​ ने जमानत को लेकर ​ट्रायल कोर्ट का रुख किया था। हालांकि, कोर्ट ने 27 मई को उन्हें जमानत देने से इनकार कर दिया। इसके बाद 8 जून को तीस हजारी कोर्ट ने बिभव की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। कोर्ट ने कहा था कि अगर आरोपी को रिहा किया जाता है तो वह गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं। इसके बाद बिभव ने हाईकोर्ट का रुख किया था।

केजरीवाल के PA ने गिरफ्तारी को चुनौती दी थी
बिभव ने 29 मई को याचिका लगाकर अपनी गिरफ्तारी को अवैध बताते हुए मुआवजे और दिल्ली पुलिस के अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच की मांग की थी।

जस्टिस शर्मा ने इस मामले में दिल्ली पुलिस और बिभव कुमार के वकीलों की दलीलें सुनीं हैं। बिभव की याचिका पर पहले जस्टिस नवीन चावला की बेंच सुनवाई करने वाली थी। हालांकि, जस्टिस चावला ने मामले को जस्टिस शर्मा की बेंच को ट्रांसफर कर दिया था।

दिल्ली पुलिस ने जताई थी याचिका पर आपत्ति
दिल्ली पुलिस की ओर से पेश वकील संजय जैन ने सुनवाई के दौरान बिभव की याचिका पर आपत्ति जताई और कहा कि यह सुनवाई योग्य नहीं है। बिभव के वकील एन हरिहरन ने कहा कि दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तारी मेमो और गिरफ्तारी का आधार नहीं बताया है। यह मामला व्यक्तिगत स्वतंत्रता का मुद्दा है, जिसे हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए।

दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट ने 27 मई को बिभव की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। अगले दिन यानी 28 मई को बिभव को कोर्ट ने 3 दिन की पुलिस कस्टडी में भेजा था। बिभव पर AAP की राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल से CM हाउस में मारपीट का आरोप है। उन्हें 18 मई को CM हाउस से गिरफ्तार किया गया था।

जनहित याचिका दायर करने वाले एक वकील को HC की फटकार
दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार (31 मई) को स्वाति मालीवाल मामले में जनहित याचिका दायर करने वाले वकील संसारपाल सिंह को फटकार लगाई। याचिकाकर्ता ने मारपीट मामले में मीडिया को रिपोर्टिंग करने से रोकने की मांग की गई थी।

इस पर कोर्ट ने कहा कि जब पीड़ित (मालीवाल) खुद सामने आकर केस को लेकर बात रही हैं, तो याचिकाकर्ता को क्या दिक्कत है। आप कौन होते हैं कुछ कहने वाले। पीड़ित शिकायत नहीं कर रही हैं, लेकिन आप शिकायत कर रहे हैं। कोर्ट ने कहा कि ऐसा लग रहा है कि याचिका केवल पब्लिसिटी के दायर लिए गई है।

ट्रायल कोर्ट में सुनवाई के दौरान रो पड़ी थीं स्वाति
बिभव कुमार ने 25 मई को ट्रायल कोर्ट में जमानत के लिए याचिका लगाई थी, जिस पर 27 मई को सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान स्वाति भी कोर्ट में मौजूद थीं। बिभव के वकील हरिहरन ने सुनवाई के दौरान आरोप लगाया कि जब सेंसिटिव बॉडी पार्ट्स पर चोट के निशान नहीं मिले तो गैर इरादतन हत्या की कोशिश का सवाल ही नहीं है। न ही बिभव का स्वाति को निर्वस्त्र करने का कोई इरादा था। ये चोटें खुद को पहुंचाई जा सकती हैं।

बिभव के वकील ने यह भी कहा कि पुराने जमाने में ऐसे आरोप कौरवों पर लगे थे, जिन्होंने द्रौपदी का चीरहरण किया था। स्वाति ने यह FIR पूरी प्लानिंग करके 3 दिन बाद दर्ज कराई है। ये दलीलें सुनकर स्वाति कोर्ट रूम में ही रो पड़ीं। 

बिभव सरकारी कर्मचारी के साथ मारपीट के मामले में बर्खास्त हुए
मार्च 2024 में बिभव को CM के पर्सनल सेक्रेटरी के पद से बर्खास्त कर दिया गया था। स्पेशल सेक्रेटरी विजिलेंस वाईवीवीजे राजशेखर ने आदेश जारी कर कहा था कि बिभव की सेवाएं तत्काल प्रभाव से खत्म कर दी गई हैं। उनकी नियुक्ति के लिए निर्धारित प्रक्रिया और नियमों का पालन नहीं किया गया। इसलिए ये नियुक्ति अवैध और शून्य करार दी जाती है। राजशेखर ने ये आदेश 2007 के एक मामले के आधार पर दिया।

दरअसल, 2007 में बिभव पर एक सरकारी अधिकारी के साथ कथित तौर पर मारपीट का आरोप लगा था। नोएडा विकास प्राधिकरण में तैनात महेश पाल ने बिभव पर आरोप लगाया था कि उन्होंने अपने तीन साथियों के साथ मिलकर शिकायतकर्ता (एक पब्लिक सर्वेंट) को उसकी ड्यूटी करने से रोका, उसे गाली और धमकी दी। महेश ने 25 जनवरी 2007 को नोएडा सेक्टर-20 के पुलिस थाने में इसकी शिकायत दर्ज करवाई थी। इस मामले में दिल्ली के उपराज्यपाल की ओर से भी एक्शन लिया गया था।



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