क्या है पूरा विवाद?
मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह मस्जिद का विवाद चार शताब्दी से भी अधिक पुराना है। पूरा विवाद 13.37 एकड़ विवादित भूमि के स्वामित्व और संरचना संबंधी विवाद का है। श्रीकृष्ण जन्मभूमि और ईदगाह मस्जिद विवाद वर्ष 1618 में पहली बार सामने आया था। यानी करीब 406 सालों से विवाद लगातार गहराता रहा है। मुस्लिम पक्ष का दावा है कि यहां सदियों से मस्जिद है। वहीं, हिंदू पक्ष दावा करता है कि मूल मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाई गई।- वर्ष 1618 के आसपास राजा वीर सिंह बुंदेला ने श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर भव्य मंदिर बनवाया। कहा जाता है कि उन्होंने 33 लाख मुद्रा खर्च की।
- वर्ष 1670 में मुगल शासक औरंगजेब ने मंदिर को तोड़ने का आदेश दिया। इटालियन इतिहासकार निकोलस मनुची ने अपनी किताब स्टोरिया डो मोगोर में इसका विवरण दिया है। इसमें दर्ज है कि रमजान में मंदिर ढहाया गया। यहां शाही ईदगाह मस्जिद बनाने का आदेश दिया गया।
- मुगलों की ओर से मंदिर तोड़े जाने के बाद मराठाओं ने युद्ध छेड़ दिया। 1770 में गोवर्धन युद्ध में मराठा विजयी हुए। उन्होंने ईदगाह के पास 13.37 एकड़ भूमि पर श्रीकृष्ण मंदिर का निर्माण कराया। बाद में उपेक्षा और भूकंप के कारण मंदिर क्षतिग्रस्त हो गया।
- वर्ष 1803 में अंग्रेजों ने मथुरा पर कब्जा किया। 1815 में कटरा केशवदेव की जमीन नीलाम की गई। राजा पटनीमल ने इसे 1410 रुपये में खरीदा। बाद में वर्ष 1944 में जुगल किशोर बिरला ने यह जमीन खरीद ली।
- देश की स्वतंत्रता के बाद 1951 में श्रीकृष्ण जन्मस्थान ट्रस्ट बना। 13.37 एकड़ जमीन मंदिर निर्माण के लिए ट्रस्ट को हस्तांतरित की गई। वर्ष 1953–58 के बीच मथुरा में नया मंदिर बना। इसी दौरान मस्जिद का भी निर्माण हो गया।
- वर्ष 1968 में जन्मस्थान सेवा संस्थान और ईदगाह ट्रस्ट के बीच समझौता हुआ। तय हुआ कि जमीन पर मंदिर और मस्जिद दोनों रहेंगे। जन्मस्थान ट्रस्ट ने हमेशा इस समझौते को धोखापूर्ण माना। कानूनी रूप से इस संस्था को 13.37 एकड़ पर अधिकार नहीं था।
- श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह क कुल विवादित जमीन 13.37 एकड़ है। इसमें 10.9 एकड़ में श्रीकृष्ण जन्मस्थान बना है। 2.5 एकड़ जमीन पर शाही ईदगाह मस्जिद का निर्माण हुआ है।
- हिंदू पक्ष का दावा है कि पूरी भूमि श्रीकृष्ण जन्मभूमि है। शाही ईदगाह की जमीन को लेकर दावा किया जाता रहा है कि वहां कंस की जेल थी। देवकी–वसुदेव ने यहीं श्रीकृष्ण को जन्म दिया था।
- कोर्ट में वर्ष 1968 के समझौते को अवैध घोषित करने और कटरा केशवदेव को भूमि वापस दी जाने की मांग को लेकर याचिकाएं दायर हैं।
