डगमगाता रहता है कंपनी का नजरिया
कुछ लोगों का कहना है कि इस तरह के कृत्यों और व्यवहार के लिए एक संगठन की प्रतिक्रिया सोशल रिस्पांस पर निर्भर करती है। एक्सफेनो के को-फाउंडर कमल कारंत कहते हैं कि कर्मचारियों के कदाचार का आकलन करने और प्रतिक्रिया देने के लिए नियोक्ताओं के पास डगमगाने वाला नैतिक कम्पास होता है। वह कहते हैं कि सीनियरिटी और मीडिया स्पॉटलाइट जैसे कारक कुछ वेरिएबल्स हैं, जो कंपनी के रुख को प्रभावित करते हैं।
सीनियर पोस्ट पर हैं तो अलग ट्रीटमेंट
कारंत ने कहा, 'मुझे याद है कि एक बार मैं एक होटल में रुका था जहाँ एक बड़ी MNC की पार्टी थी। दो वाइस प्रेसिडेंट्स में कहासुनी हो गई, जो मारपीट में बदल गई। मुझे पता चला कि दोनों वीपी को बस अलग-अलग होटलों में रहने के लिए कहा गया था और पार्टी जारी रहा। जब मैंने उन्हें कुछ साल बाद ट्रैक किया, तब भी वे वहीं थे। उनमें से एक अब एक प्रतिस्पर्धी फर्म का सीईओ है।' सिंपलीएचआर के को-फाउंडर रजनीश सिंह का कहना है कि कंपनी कर्मचारियों से क्या उम्मीद करती है, इस बारे में स्पष्ट समझ होनी चाहिए।
