एक महीने में 12 लाख करोड़ की कमाई... इन कंपनियों ने भर दी सरकार की झोली
Updated on
16-07-2024 02:48 PM
नई दिल्ली: लोकसभा चुनावों के चार जून को आए परिणाम ने सरकारी कंपनियों के शेयरों (PSU) में नई जान फूंक दी है। पिछले करीब एक महीने में इन शेयरों में भारी तेजी आई है। इससे PSU के मार्केट कैप में करीब ₹12 लाख करोड़ की बढ़ोतरी की है। इस साल अब तक PSU शेयरों की मार्केट वैल्यू में लगभग ₹22.5 लाख करोड़ की बढ़ोतरी हुई है। इस तेजी से इन अटकलों को भी बल मिला है कि सरकार इन कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी बेचकर पैसे जुटाने के बारे में सोच सकती है। फंड मैनेजरों का कहना है कि ऐसा होने पर शेयरों की तेजी प्रभावित हो सकती है।
MojoPMS के चीफ इनवेस्टमेंट ऑफिसर सुनील दमानिया ने कहा कि इस बात की काफी संभावना है कि सरकार कुछ PSU में अपनी हिस्सेदारी कम करके धन जुटाना चाहेगी, जिससे उनकी कीमतों पर दबाव पड़ सकता है। चुनाव परिणामों के बाद PSU के शेयरों में और तेजी आई। उम्मीद जताई जा रही थी कि सरकार की नीतियों को जारी रखने से इन कंपनियों को फायदा होगा। एक जुलाई से रेल विकास, इंडियन रिन्यूएबल, शिपिंग कॉरपोरेशन, मझगांव डॉक, ऑयल इंडिया, रेलटेल कॉर्प और कोचीन शिपयार्ड के शेयरों में 25% से 50% की तेजी आई है। 31 मार्च तक के आंकड़ों के मुताबिक सरकार के पास LIC, IRFC, यूको बैंक सहित लगभग 10 लिस्टेड कंपनियों में 75% से अधिक हिस्सेदारी थी।
कितने शेयर बेच सकती है सरकार
इंडियन ओवरसीज बैंक, मझगांव डॉक, फर्टिलाइजर्स एंड केमिकल्स त्रावणकोर (FACT) और जनरल इंश्योरेंस कॉर्प में भी सरकार की बड़ी हिस्सेदारी है। न्यूनतम सार्वजनिक हिस्सेदारी नियम के तहत प्रमोटरों के पास किसी कंपनी के 75% से अधिक शेयर नहीं होने चाहिए। ETIG के अनुमान के अनुसार, अगर सरकार इस सीमा को पूरा करने के लिए शेयर बेचती है तो वह कम से कम ₹2.9 लाख करोड़ कमा सकती है। मार्केट रेगुलेटर सेबी ने LIC को पहले 10% सार्वजनिक हिस्सेदारी हासिल करने के लिए मई 2027 तक का समय दिया है। 12 में से पांच सरकारी बैंकों में सार्वजनिक हिस्सेदारी अभी भी 25% से कम है। इन बैंकों के लिए न्यूनतम सार्वजनिक हिस्सेदारी को पूरा करने की मौजूदा समय सीमा अगस्त 2024 है। हालांकि सरकार एसेट सेल के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए कोई जल्दबाजी नहीं कर रही है। पिछले साल के बजट में विनिवेश का लक्ष्य ₹51,000 करोड़ रखा गया था, जिसे बाद में घटाकर ₹30,000 करोड़ कर दिया गया था। फंड मैनेजरों और विश्लेषकों ने कहा कि हालिया उछाल के बाद इनमें से कई शेयरों का मूल्यांकन महंगा है। जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेज के चीफ इनवेस्टमेंट स्ट्रैटजिस्ट वीके विजयकुमार ने कहा कि कई PSU ऐसे शेयर बन गए हैं जिनमें सट्टेबाज बहुत ज्यादा कारोबार करते हैं। भले ही इन क्षेत्रों के लिए संभावनाए कई वर्षों तक उज्ज्वल दिखती हैं, लेकिन इन क्षेत्रों में मूल्यांकन के लिहाज से कोई राहत नहीं है क्योंकि उनमें से कई ने पहले ही कुछ वर्षों के लिए आय में कटौती कर दी है।
क्या करें निवेशक
भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स (BHEL), FACT, हिंदुस्तान कॉपर, मिश्र धातु निगम और रेलटेल कॉर्प जैसे PSU शेयर 100 से अधिक के प्राइस-टू-अर्निंग (PE) अनुपात पर कारोबार कर रहे हैं। निफ्टी लगभग 22 गुना के PE अनुपात पर कारोबार कर रहा है। दमानिया ने कहा कि कई PSU कंपनियों के लिए स्थिर व्यावसायिक दृष्टिकोण के बावजूद, इन समृद्ध मूल्यांकनों से आगे कीमतों में वृद्धि की संभावना सीमित है। शेयरखान के प्रमुख (कैपिटल मार्केट स्ट्रैटजी) गौरव दुआ ने कहा कि खुदरा निवेशक सेंट्रल पब्लिक सेक्टर एंटरप्राइजेज एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (CPSE ETF) के जरिए शेयरों में तेजी का फायदा उठा सकते हैं। उन्होंने कहा, 'हमारा मानना है कि कई PSU इंजीनियरिंग शेयर और PSU बैंक शेयर फंडामेंटल्स से आगे निकल गए हैं और अब बहुत सेलेक्टिव होने की जरूरत है। अब भी PSU पावर और गैस से संबंधित शेयरों में संभावनाएं हैं।
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