WWA इनिशिएटिव के तहत वैज्ञानिकों ने अप्रैल में लगातार चार दिन तक एवरेज मैक्सिमम और मिनिमम हीट इंडेक्स का एनालिसिस किया। WWA का हीट इंडेक्स इंसानी शरीर पर गर्मी के प्रभाव को बेहतर ढंग से मापता है। रिसर्चर्स ने पाया कि जलवायु परिवर्तन की वजह से इन चार देशों में गर्मी 2 डिग्री ज्यादा बढ़ी। रिपोर्ट के अनुसार, जब तक ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन पर रोक नहीं लगती, ग्लोबल टेम्प्रेचर बढ़ता रहेगा।
रिपोर्ट के अनुसार, भारत और बांग्लादेश में पहले सदी में एक बार कहीं लू की घटनाएं होती थीं। अब हर पांच साल पर ऐसे वेदर इवेंट्स की आशंका है। अगर तापमान में इजाफा 2 डिग्री सेल्सियस बढ़ता है तो ऐसा करीब 30 साल में होने लगेगा। अगर GHGs के उत्सर्जन पर तेजी से रोक नहीं लगी तो ऐसे इवेंट्स हर दो साल पर होंगे।
