दिवालिया होने का डर, हर्षद मेहता स्कैम, डॉटकॉम का बुलबुला... कैसा रहा सेंसेक्स का 45 साल का सफर
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11-04-2024 02:45 PM
मुझे आज भी वह दिन याद है, जब मैंने पहली बार शेयर बाजार में निवेश किया था। वह साल था 1979, जब BSE सेंसेक्स की शुरुआत 100 अंकों के साथ हुई थी। 45 साल हो चुके हैं और इस दौरान 100 अंकों से बढ़कर यह 75,000 के करीब आ गया है। यानी सेंसेक्स में इस बीच 15.85% की चक्रवृद्धि दर से तेजी आई है।
दिवालिया होने का डर
सेंसेक्स की कहानी एक तरह से भारत की दास्तान भी है। 1979 में भारत की आर्थिक हालत अच्छी नहीं थी। तब उसकी GDP 130 बिलियन डॉलर थी और 1990 में देश करीब-करीब दिवालिया हो गया था।
जबरदस्त ग्रोथ
भारत को आजादी के बाद 1 लाख करोड़ डॉलर की GDP तक पहुंचने में 60 वर्ष लग गए। यह लंबा अरसा था, लेकिन 2 लाख करोड़ और 3 लाख करोड़ डॉलर की GDP तक पहुंचने में सात-सात साल ही लगे। और अब हम 4 लाख करोड़ डॉलर की GDP तक पहुंचने के करीब हैं। इसमें तो सिर्फ तीन साल का ही वक्त लगा है।
5वीं बड़ी इकॉनमी
इस ग्रोथ की बदौलत भारत आज दुनिया की पांचवीं बड़ी अर्थव्यवस्था है। दुनिया की तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था बनने के लिए भी हमें बहुत इंतजार नहीं करना पड़ेगा। बेशक, अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार की इस कहानी में कई उतार-चढ़ाव आए हैं। 1992 में हर्षद मेहता घोटाला। साल 2000 में डॉटकॉम का बुलबुला। साल 2008-09 में वैश्विक वित्तीय संकट और फिर कोरोना महामारी के आने पर बाजार में बड़ी गिरावट के बाद तेजी का दौर।
15% की दर
अब आपके मन में यही सवाल आ रहा होगा कि 75,000 के बाद सेंसेक्स का क्या होगा? इस सवाल का जवाब कई तरह से दिया जा सकता है। पहली बात तो यह है कि 37,500 से 75,000 का सफर सेंसेक्स ने सिर्फ 5 साल में तय किया है। यह 15% चक्रवृद्धि दर है। यहां यह याद रखना चाहिए कि पिछले 45 वर्षों से सेंसेक्स की ग्रोथ यही रही है।
सेंसेक्स होगा डबल
दूसरी, भारत में कॉरपोरेट सेक्टर के मुनाफे में बढ़ोतरी पिछले तीन दशकों में 17% की चक्रवृद्धि दर से हुई है। इसलिए आगे प्रॉफिट ग्रोथ 15% रहने का अनुमान लगाया जाए तो इसे ठीक ही माना जाएगा। आज मार्केट 25 के प्राइस टु अर्निंग रेश्यो पर ट्रेड कर रहा है। अगर भविष्य में भी उसे यही वैल्यूएशन मिलता है तो पांच साल में सेंसेक्स डबल हो जाएगा। यानी 2029 में यह 1,50,000 पर होगा।
छोटे निवेशक
यहां आलोचक यह सवाल कर सकते हैं कि सेंसेक्स पांच साल में भले ही 37,500 से 75,000 पर पहुंच गया, लेकिन इस स्तर से 1,50,000 तक पहुंचने की बात में कितना दम है? दरअसल, भारत में छोटे निवेशकों की ओर से एक क्रांति हो रही है। कोरोना महामारी से पहले हर महीने देश में 3,50,000 नए डीमैट खाते खुल रहे थे। आज यह आंकड़ा 30 लाख से ऊपर पहुंच चुका है। मार्च 2020 में डीमैट खातों की संख्या 4 करोड़ थी, जो आज 15 करोड़ पहुंच चुकी है। इस दौरान हर महीने SIP से म्युचुअल फंड में आने वाला निवेश भी 8,000 करोड़ से बढ़कर 19,000 करोड़ हो गया है।
विन-विन डील
इससे कंपनियों के लिए IPO से पैसा जुटाना आसान हो गया है। उन्हें धंधे में निवेश के लिए आसानी से ग्रोथ कैपिटल मिल रहा है। दूसरा, शेयर बाजार में तेजी से निवेशकों के हाथ में अधिक पैसा आ रहा है। इसका एक हिस्सा वे कंजम्पशन के लिए कर रहे हैं, जिससे GDP ग्रोथ अच्छी बनी हुई है।
आगे क्या होगा
सेंसेक्स की इस विकास यात्रा का एक आखिरी आयाम टेक्नॉलजी और डिजिटाइजेशन है। पहले देश में कई इक्विटी एक्सचेंज हुआ करते थे, आज सिर्फ दो हैं। ट्रेडिंग ऑनलाइन हो गई है। यह बात सही है कि कल क्या होगा, किसी को पता नहीं है। लेकिन इसकी काफी संभावना है कि पिछले 45 वर्षों से सेंसेक्स में जो 15% की चक्रवृद्धि दर से तेजी बनी हुई है, वह शायद आने वाले 45 वर्षों में भी बनी रहे।
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