कपड़ों का बिजनस अच्छा चलने लगा तो उन्होंने दूसरे क्षेत्रों में भी हाथ आजमाना शुरू किया। 1996 से 1999 के बीच उन्होंने एक एसएपी ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट खोला और केमिकल डाई का बिजनस भी शुरू किया। साथ ही एक वेबसाइट भी खोली। लेकिन, डॉट कॉम का बुलबुला जल्द फूट गया और उनके बाकी बिजनस भी घाटे में चले गए। हालत यह हो गई कि उन पर 18 करोड़ का कर्ज चढ़ गया। उनके पास बस में सफर करने के लिए भी पैसे नहीं थे। उन्हें दो बार सोचना पड़ता था कि बस से जाएं या फिर पैदल ही चलें। इस मुश्किल घड़ी में उन्होंने अपने बड़े भाई अपूर्व कुमत के दोस्त और पारिवारिक मित्र अरविंद मेहता को स्नैक्स बिजनस में 15 लाख रुपये का निवेश करने के लिए अप्रोच किया। तीनों ने लखनऊ में चीज बॉल बनवाए और इन्हें इंदौर तथा दूसरे शहरों में बेचा। उनका यह बिजनस चल निकला।
