शौकिया तौर पर शुरू की थी फूलों की खेती, अब पौधे बेचकर हर महीने 5 लाख की कमाई
Updated on
07-09-2024 01:37 PM
नई दिल्ली: किसी भी शौक को बिजनेस में कैसे बदला जा सकता है, यह कोई सबीरा मोहम्मद मूसा से सीखे। सबीरा ने केरल के पालघाट (Palakkad) में स्थित अपने मकान की छत पर शौकिया तौर पर फूलों की खेती शुरू की थी। अब वह ऑर्किड नर्सरी में बदल चुकी है। इससे वह हर महीने 5 लाख रुपये तक की कमाई कर रही हैं। सबीरा थाईलैंड, चीन और दूसरे देशों से पौधे आयात करती हैं और पूरे भारत में बेचती हैं। हालांकि इनका यहां तक का सफर इतना आसान भी नहीं रहा।
सबीरा 90 के दशक में सात साल तक संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में रहने के बाद केरल के पलक्कड़ लौटी थीं। उनके तीन बच्चे थे। पति के काम पर और बच्चों के स्कूल चले जाने के बाद वह घर में खाली रहती थीं। इस दौरान उनका मन नहीं लगता था और खुद को व्यस्त रखना मुश्किल होता था। तभी सबीरा को आइडिया आया कि छत पर बागवानी शुरू की जाए। साल 1998 में सबीरा ने चमेली और एंथुरियम जैसे पौधों से बागवानी शुरू की। वह बताती हैं कि उन्होंने पूरे भारत से फूलों के पौधे इकट्ठे करने शुरू किए। वह उन्हें कूरियर के जरिए मंगवाती थी।
शुरू की ऑर्किड की खेती
सबीरा ने बताया कि जैसे-जैसे उनका बगीचा फलता-फूलता गया, उन्होंने ऑर्किड की खेती शुरू की। उन्होंने बताया कि उन्होंने पलक्कड़ के कृषि भवन और अन्य स्थानों से पौधे इकट्ठा करने शुरू किए। कुछ ही समय बाद उनकी छत वाला बगीचा ऑर्किड से भर गया। साल 2006 में सबीरा की ऑर्किड की खेती को तब पहचान मिली जब उन्हें बागवानी में उनके काम के योगदान को देखते हुए केरल राज्य सरकार की ओर से 'उद्यान श्रेष्ठ' पुरस्कार मिला। इसके बाद उनके बगीचे पर ज्यादा लोगों का ध्यान गया।
दूसरे जिलों से भी आने लगी मांग
सबीरा बताती हैं कि उन्होंने कुछ लोगों को पौधे बेचना शुरू किए। धीरे-धीरे दूसरे जिलों से भी मांग आने लगी और उन्हें भी पौधे कूरियर करना शुरू कर दिया। इसके बाद उनके पति मोहम्मद मूसा ने उन्हें थाईलैंड से ऑर्किड के पौधे मंगाने को कहा। थाईलैंड दुनिया का सबसे बड़ा ऑर्किड निर्यातक है। इस फूल की लगभग 1300 प्रजातियां मिलती हैं।
कई देशों से मंगाए पौधे
छत भरने के बाद सबीरा ने एक एकड़ जमीन पर अपनी पहली नर्सरी बनाई। उन्होंने बाद में चीन, ताइवान और दूसरे दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों से ऑर्किड के पौधे आयात करना शुरू कर दिए। सबीरा ने पलक्कड़ जिले के कोझिनजम्पारा में दो एकड़ में दूसरी नर्सरी भी बनाई है और अपने बिजनेस का नाम पर्ल ऑर्किड रखा है। सबीरा अपनी दो नर्सरियों में डेंड्रोबियम, कैटलियस, वंडास, ऑन्सीडियम, पैफियोपेडिलम, बल्बोफिलम और फेलेनोप्सिस सहित ऑर्किड की 600 से ज्यादा किस्में उगाती हैं।
पूरे देश में होती है सप्लाई
आज सबीरा पूरे देश में ऑर्किड और दूसरे सजावटी पौधे बेचती हैं। वह हर महीने 5 हजार से 7 हजार पौधे बेचती हैं। इससे उन्हें 4 लाख से 5 लाख रुपये के बीच कमाई होती है। वह बताती हैं कि उनकी कंपनी करीब 50 रुपये प्रति ऑर्किड के हिसाब से पौधे आयात करती है और उन्हें किस्म के आधार पर 80 से 100 रुपये में बेचती है। अगर पौधा बड़ा है तो उसके आकार और उम्र के आधार पर यह 250 से 350 रुपये प्रति पीस बिकते हैं।
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