अडानी ग्रुप के शेयरों पर टूटे विदेशी निवेशक, जानिए क्यों बढ़ा रहे हिस्सेदारी
Updated on
16-04-2024 03:02 PM
नई दिल्ली: गौतम अडानी (Gautam Adani) की कंपनियों में पिछले एक साल में भारी तेजी देखने को मिली है। विदेशी निवेशकों ने भी इस मौके को हाथोंहाथ लिया है। मार्च तिमाही में एफआईआई ने अडानी ग्रुप की दस लिस्टेड कंपनियों में से छह में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई है। अमेरिका की शॉर्ट सेलिंग फर्म हिंडनबर्ग रिसर्च ने पिछले साल जनवरी में अडानी ग्रुप के खिलाफ एक रिपोर्ट जारी की थी। इससे ग्रुप के शेयरों में भारी गिरावट आई थी और उसका मार्केट कैप 150 अरब डॉलर तक कम हो गया था। लेकिन हाल के दिनों में अडानी ग्रुप के शेयरों में काफी तेजी आई है और वे काफी हद तक हिंडनबर्ग रिसर्च के असर से उबर चुके हैं। यही वजह है कि विदेशी निवेशकों ने अडानी ग्रुप के शेयरों में हिस्सेदारी बढ़ानी शुरू कर दी है।
आंकड़ों के मुताबिक मार्च तिमाही के दौरान अडानी पोर्ट्स में विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी 26 बीपीएस बढ़कर 14.98% है। अडानी ग्रीन एनर्जी और अडानी विल्मर में भी एफआईआई होल्डिंग में 12 बीपीएस की बढ़ोतरी हुई है। इसी तरह अडानी पावर, अडानी टोटल गैस और एनडीटीवी में विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी बढ़ी है। म्यूचुअल फंड्स ने भी मार्च तिमाही में एसीसी, अडानी एंटरप्राइजेज, अडानी ग्रीन एनर्जी और अडानी पावर में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई है। दूसरी ओर रिटेल इन्वेस्टर्स ने अडानी एनर्जी को छोड़कर बाकी सभी शेयरों में मुनाफावसूली की। इस साल अब तक अडानी पोर्ट्स के शेयरों में सबसे ज्यादा 31 फीसदी तेजी आई है।
एलआईसी की हिस्सेदारी
इस बीच सबसे बड़ी घरेलू संस्थागत निवेशक एलआईसी ने अडानी ग्रुप की दो सीमेंट कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी मार्च तिमाही में कम की है। एलआईसी की अडानी ग्रुप की सात कंपनियों में हिस्सेदारी है। एलआईसी ने एसीसी में अपनी हिस्सेदारी में मामूली कटौती की है लेकिन अंबूजा सीमेंट्स में 60 बीपीएस स्टेक बेच दिया। दिसंबर के अंत में अडानी ग्रुप के शेयरों में एलआईसी की हिस्सेदारी की कीमत 52,779 करोड़ रुपये थी जो मार्च तिमाही के अंत में बढ़कर 61,660 करोड़ रुपये हो गई। इस तरह तीन महीने में इसमें 8,900 करोड़ रुपये का इजाफा हुआ। अगर पूरे फाइनेंशियल ईयर की बात करें तो इस दौरान अडानी ग्रुप में एलआईसी की होल्डिंग की वैल्यू में 22,378 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई है।
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