Select Date:

ट्रंप के टैरिफ से लेकर फेड की धौंस तक... क्या डॉलर का दबदबा हो रहा है खत्म? भारत के लिए कैसा मौका

Updated on 20-11-2025 12:58 PM
नई दिल्ली: क्या दुनिया से अमेरिकी डॉलर का दबदबा खत्म हो रहा है? हाल ही में अमेरिका के साथ ही रही कुछ चीजों को देखें तो ऐसा ही नजर आ रहा है। एक रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से लगाए गए टैरिफ और अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व पर दादागिरी के कारण डॉलर को नुकसान हो रहा है। वहीं यह भारत के लिए अच्छा मौका हो सकता है कि वह डॉलर के दबाव के बाहर निकले।

न्यू इकोनॉमी फोरम के लिए तैयार की गई ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया के विकासशील देश, जिन्हें 'ग्लोबल साउथ' कहा जाता है, अब डॉलर पर अपना भरोसा खो रहे हैं। इसके पीछे कई वजहें हैं। इनमें ट्रंप के फैसले, अमेरिका का बढ़ता कर्ज, मिडिल ईस्ट देशों के साथ पुराने समझौते टूटना और चीन से बढ़ती प्रतिस्पर्धा शामिल हैं। रिपोर्ट के मुताबिक ट्रंप के फैसलों ने डॉलर की स्थिति को और भी कमजोर कर दिया है।

डॉलर की हिस्सेदारी हो रही कम

अमेरिकी डॉलर को किसी समय दुनिया की सबसे मजबूत करेंसी माना जाता था। लेकिन अब स्थिति बदली हुई नजर आ रही है। दुनिया के विदेशी मुद्रा भंडार (global forex reserves) में डॉलर की हिस्सेदारी कम हो रही है। यह दिखाता है कि डॉलर शायद दुनिया की सबसे प्रमुख करेंसी के तौर पर अपनी जगह खो रहा है।

डॉलर से क्यों उठ रहा भरोसा?

रिपोर्ट में उन कारणों की लिस्ट दी गई है जिनकी वजह से दुनिया डॉलर के अलावा दूसरे विकल्पों की तलाश कर रही है। रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका ने अपने दोस्तों और दुश्मनों, दोनों पर टैरिफ लगाए। इससे अमेरिका के प्रति नाराजगी बढ़ी। इसके अलावा, अमेरिका पर आरोप है कि वह फेडरल रिजर्व पर 'दादागिरी' करता है। अमेरिका का कर्ज भी लगातार बढ़ रहा है और मिडिल ईस्ट के कई देशों के साथ अमेरिका के पुराने समझौते टूट गए हैं।

कितना घटा डॉलर का हिस्सा?

रिपोर्ट के मुताबिक 2000 के दशक की शुरुआत में ग्लोबल फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व का 70% से ज्यादा हिस्सा डॉलर में था, लेकिन अब यह 60% से भी नीचे चला गया है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अगर यूरो क्षेत्र इतना बिखरा हुआ न होता और चीनी वित्तीय प्रणाली इतनी बंद न होती, तो डॉलर के विकल्प और भी आकर्षक होते और इसकी गिरावट और तेज होती।

भारत को कैसे फायदा?

डॉलर के कमजोर होने से भारत को फायदा मिल सकता है। भारत ब्रिक्स देशों में शामिल है। ये ब्रिक्स देश पहले भी अपनी-अपनी करेंसी में व्यापार करने की बात कर चुके हैं। अगर डॉलर में ऐसे ही गिरावट रही तो भारत डॉलर की जगह अपनी करेंसी में व्यापार करना शुरू कर सकता है।

दुनिया का ज्यादातर व्यापार, जिसमें कच्चा तेल जैसी जरूरी चीजें भी शामिल हैं, अमेरिकी डॉलर में ही तय होता है। अमेरिकी डॉलर कमजोर होने से भारतीय कंपनियों के लिए दूसरे देशों से सामान खरीदना और बेचना आसान हो जाएगा। वहीं विदेशी निवेशक भारतीय शेयर मार्केट में अपना निवेश बढ़ा सकते हैं।0

अन्य महत्वपुर्ण खबरें

 23 July 2026
नई दिल्ली: रेयर अर्थ को नए जमाने की टेक्नोलॉजी की रीढ़ कहा जाता है। इनका यूज इलेक्टिक वीकल, इंडस्ट्रियल ऑटोमेशन और डिफेंस में होता है। अभी इसकी सप्लाई चेन पर…
 23 July 2026
नई दिल्ली: होर्मुज जलडमरूमध्य में एक बार फिर से संकट गहरा गया है। यही वजह है कि कच्चे तेल की ढुलाई पर एक बार फिर से जियोपोलिटकल रिस्क प्रीमियम (Geopolitical…
 23 July 2026
नई दिल्‍ली: सरकार ने अनुराग जैन को नीति आयोग का नया सीईओ नियुक्‍त किया है। अनुराग जैन मध्‍य प्रदेश कैडर के 1989 बैच के IAS अधिकारी हैं। कैबिनेट की नियुक्ति…
 23 July 2026
नई दिल्ली: सोने और चांदी की तस्करी में हाल में काफी तेजी देखने को मिली है। सरकार ने 12 मई को सोने और चांदी पर इंपोर्ट ड्यूटी में बढ़ोतरी की…
 22 July 2026
नई दिल्ली: देश के सबसे बड़े औद्योगिक घराने टाटा ग्रुप की कंपनी इंडियन होटल्स कंपनी (IHCL) के शेयरों में आज शुरुआती कारोबार में करीब 2% गिरावट आई। बीएसई पर यह…
 22 July 2026
नई दिल्ली: पूंजी बाजार में एथिकल इन्वेस्टिंग को बढ़ावा देने के लिए NSE ने निफ्टी 500 अहिंसा इंडेक्स की शुरुआत की है। इसमें निफ्टी 500 की उन कंपनियों को शामिल…
 22 July 2026
नई दिल्ली: निवेशक अक्सर इस ताक में रहते हैं कि कब भाव गिरे तो वे शेयर खरीदें और कब बढ़े तो बेचें। लेकिन आंकड़ों की मानें तो बाजार की इस…
 22 July 2026
नई दिल्ली: घरेलू शेयर बाजार में आज लगातार तीसरे दिन गिरावट आई है। इसकी वजह यह है कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इंपोर्टेड जेनेरिक दवाओं पर चरणबद्ध तरीके…
 22 July 2026
नई दिल्ली: सोने और चांदी की कीमत में आज तेजी आई है। एमसीएक्स पर शुरुआती कारोबार में सोने की कीमत में 2,000 रुपये प्रति 10 ग्राम की तेजी आई है…
Advt.