जर्मनी ने बाद में दी थी टैंक भेजने की मंजूरी
जर्मनी जनवरी में यूक्रेन को टैंकों की आपूर्ति करने के लिए तैयार हुआ था। शुरू में ऐसा करने के लिए अनिच्छुक होने के बाद जर्मनी ने अमेरिका के दबाव में अपनी स्वीकृति दी थी। जर्मन कानूनों के तहत लेपर्ड-2 टैंकों को वर्तमान ऑपरेटर देशों को किसी तीसरे देश में ट्रांसफर करने के लिए बर्लिन की अनुमति लेना आवश्यक है। जर्मन रक्षा मंत्री बोरिस पिस्टोरियस ने कहा कि टैंक वादे के मुताबिक सही समय पर हमारे यूक्रेनी दोस्तों के हाथों में आ गए हैं। जर्मन सेना ने पिछले कई हफ्तों में यूक्रेनी टैंक ऑपरेटर्स को लेपर्ड-2 के उन्नत A6 वेरिएंट का उपयोग करने के लिए प्रशिक्षित किया है।
रूस के टी-90 से होगा लेपर्ड का मुकाबला
जर्मनी के लेपर्ड-2 टैंक को विशेष रूप से रूसी टी-90 टैंकों के साथ युद्ध के लिए तैयार किया गया है। इसका मेंटीनेंस टी-90 के मुकाबले काफी आसान है और अधिकांश पश्चिमी टैंकों की तुलना में काफी ईंधन कुशल माना जाता है। लेपर्ड-2 टैंक के साथ जर्मनी ने यूक्रेन को दो टैंक एक्सपर्ट, टैंक रिकवरी वाहन और 40 मॉडर्न इंफ्रेंट्री कॉम्बेट व्हीकर भेजे हैं। यूक्रेनी रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता इरीना ज़ोलोटार ने कहा है कि उनके देश को ब्रिटेन से चैलेंजर-2 टैंक मिल चुके हैं।
