क्या न्यू टैक्स रिजीम के कारण NPS को लेकर प्राइवेट सेक्टर में बढ़ी उदासीनता?
Updated on
06-04-2024 01:12 PM
नई दिल्ली: वित्त मंत्रालय ने वित्त वर्ष 2023-24 के लिए न्यू टैक्स रिजीम और पुरानी टैक्स रिजीम दोनों को लागू कर रखा है। टैक्सपेयर्स दोनों में से कोई भी एक टैक्स रिजीम का ऑप्शन चुनकर आईटीआर फाइल कर सकते हैं और कई तरह की टैक्स छूट का फायदा ले सकते हैं। लेकिन पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डिवेलपमेंट अथॉरिटी (PFRDA) की पेंशन योजना को न्यू टैक्स रिजीम से नुकसान हुआ है। इसमें टैक्स की दरें कम हैं, लेकिन निवेश पर टैक्स जैसी कोई छूट नहीं दी जाएगी।
PFRDA की ओर से गुरुवार को जारी आंकड़ों से अनुमान लगाया गया है कि कुल सब्सक्राइबर्स आधार में वृद्धि पिछले वित्त वर्ष के दौरान 16.3% तक कमी हो गई। नैशनल पैंशन सिस्टम (NPS) में 36 लाख से कम ग्राहकों के साथ प्राइवेट सेक्टर के कंट्रीब्यूटर्स की हिस्सेदारी, जिसमें कॉरपोरेट स्कीम (जहां कंपनी और कर्मचारी दानों योगदान करते हैं) और व्यक्तिगत पेंशन खाते शामिल हैं, का अनुमान 7.5% था। पिछले वित्तीय वर्ष में कॉरपोरेट स्कीम के लिए यह 16.1% तक कम हो गई, 2020-21 के बाद से यह सबसे कम है, जब कोविड-19 ने अर्थव्यवस्था पर प्रहार किया था।
क्यों बढ़ रही है उदासीनता?
सरकारी कर्मचारियों और निजी क्षेत्र के बीच भी जो इसे लेकर उदासीनता बढ़ रही है, वह कंपनी द्वारा किए जा रहे अतिरिक्त योगदान पर टैक्स छूट नहीं होना है। जब NPS शुरू हुआ तो कर्मचारी और कंपनी पेंशन कॉर्पस में 10% योगदान दे रहे थे। इसके बाद, राज्यों और केंद्र सरकार ने कर्मचारी के वेतन का 14% योगदान बढ़ा दिया। लेकिन टैक्स छूट नहीं बढ़ाया गया था। मार्च-2024 के अंत में NPS के तहत AUM 30% से अधिक बढ़कर 11.7 लाख करोड़ हो गई, जिसमें सरकारी कर्मचारियों की तीन-चौथाई हिस्सेदारी से अधिक हिस्सेदारी थी, जबकि प्राइवेट सेक्टर की हिस्सेदारी बढ़कर 19.3% थी।
कर्मचारी क्या कहते हैं?
अधिकारियों और विशेषज्ञों ने इसके लिए न्यू टैक्स रिजीम को जिम्मेदार ठहराया है। कई कंपनियों द्वारा साझा की गई प्रतिक्रिया से ये बात सामने आई हैं। न्यू टैक्स रिजीम डिफॉल्ट विकल्प है। इसमें प्राइवेट सेक्टर के कंपनी के मामले में भी एनपीएस में योगदान के लिए टैक्स छूट है, लेकिन कर्मचारी के हिस्से का टैक्स लाभ नहीं मिलेगा। पीएफ और कर्मचारी पेंशन योजना, कंपनियों में डिफॉल्ट ऑप्शन होने के कारण PFRDA की पेंशन योजना के लिए बाधा के रूप में देखा जा रहा है। इंडस्ट्री के एक सूत्र का कहना है कि जब भी कोई कर्मचारी किसी कंपनी में शामिल होता है, तो उसे अन्य विकल्पों के बारे में जागरूक किए बिना ग्रैच्युटी और पीएफ पेपर दिए जाते हैं।
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