एक मां से छीन रहे थे उसकी ममता, दिल दहला देगी Mrs Chatterjee Vs Norway की 12 साल पुरानी असली कहानी
Updated on
24-02-2023 07:42 PM
हाल ही रानी मुखर्जी की फिल्म 'मिसेज चटर्जी वर्सेज नॉर्वे' का ट्रेलर रिलीज हुआ, जिसमें रानी मुखर्जी ने हर किसी को हैरान कर दिया। नॉर्वे की सरकार से अपने बच्चों को वापस पाने के लिए रानी मुखर्जी जिस तरह से मिसेज चटर्जी के रोल में रोती-बिलखतीं, तड़पतीं और लड़तीं नजर आईं, उसने हर किसी को झकझोर दिया। फिल्म के ट्रेलर को देखकर 12 साल पुराने उस दर्दनाक केस की यादें ताजा हो गईं, जब एक भारतीय कपल के बच्चों की कस्टडी नॉर्वे की सरकार ने छीन ली थी। वह भी सिर्फ इस आधार पर कि यह कपल अपने बच्चों की परवरिश नॉर्वे के कायदे-कानून के हिसाब से नहीं कर रहा था। उस कपल को बच्चे वापस पाने के लिए जी-जान से लड़ना पड़ा था। यह फिल्म उसी सच्ची घटना और उसी कपल की लड़ाई पर आधारित है।
'फिल्मी फ्राइडे' सीरीज में हम आपको उसी भारतीय कपल और उसकी कहानी बता रहे हैं, जिसकी जिंदगी पर Mrs Chatterjee Vs Norway बनी। इस फिल्म में Rani Mukerji देबिका चटर्जी के रोल में हैं, जिसके बच्चे नॉर्वे की चाइल्ड केयर संस्था द्वारा छीन लिए जाते हैं। अपने बच्चों को वापस पाने के लिए देबिका चटर्जी जो जद्दोजहद करती है, वह झकझोर देती है। जिस मां के बच्चे उससे छिन जाएं और चेहरा तक देखने को न मिले, उस मां के दुख-दर्द, तड़प और पीड़ा को रानी मुखर्जी ने बहुत ही गहराई से उतारा है, जिसकी झलक ट्रेलर में नजर आती है। अब बात उस भारतीय कपल की, जिसे इस दर्द से गुजरना पड़ा।
सागरिका-अनुरूप भट्टाचार्य की दर्दनाक कहानी
दरअसल 2007 में जियोफिजिस्ट अनुरूप भट्टाचार्य से शादी करने के बाद सागरिका भट्टाचार्य नॉर्वे जाकर रहने लगीं। लेकिन 2008 में वह कोलकाता अपने घर लौट आईं ताकि पहले बच्चे को जन्म दे सकें। यहां उन्होंने बेटे अभिज्ञान को जन्म दिया। सागरिका बेटे के साथ करीब एक साल तक कोलकाता में रहीं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, धीरे-धीरे सागरिका को पता चला कि उनके बेटे में ऑटिज्म के लक्षण हैं, जोकि एक दिमागी बीमारी है। यह देख सागरिका पति अनुरूप के साथ 2009 में नॉर्वे चली गईं, ताकि बेटे का इलाज हो सके। उस वक्त उनका बेटा 14 महीने का था। लेकिन बेटे की स्थिति में सुधार नहीं हुआ और वक्त के साथ उसकी हालत और खराब हो गई।
नॉर्वे की संस्था ने छीन लिए दोनों बच्चे
फिर 2010 में सागरिका और अनुरूप ने बेटे को नॉर्वे में ही एक फैमिली किंडरगार्टन में डाल दिया। तब तक सागिरका दोबारा मां बनने की स्थिति में पहुंच चुकी थीं। कुछ समय बाद सागरिका ने बेटी ऐश्वर्या को जन्म दिया। बेटी के आने के बाद से सागरिका के लिए और मुश्किल हो गई क्योंकि तब वह बेटे अभिज्ञान को ज्यादा समय नहीं दे पा रही थीं। लेकिन जैसे-जैसे सब सही चल रहा था। पर 2011 में सागरिका और अनुरूप पर उस वक्त दुखों का पहाड़ टूट पड़ा जब नॉर्वे की चाइल्ड वेलफेयर सर्विसेज ने उनके दोनों बच्चों को छीन लिया। साथ ही यह आरोप लगाया कि पैरेंट्स बच्चों के साथ एक ही बिस्तर पर सोते हैं और बच्चों को जबरदस्ती खाना खिलाते हैं।
घुमाने का बहाना करके ले गए थे बच्चे
'बीबीसी' के साथ बातचीत में अनुरूप भट्टाचार्य ने 2012 में बताया था कि वह 2006 से परिवार के साथ नॉर्वे में रह रहे थे। तभी एक दिन उनके पास नोटिस आया, जिसमें बताया गया कि वो अपने बच्चों का पालन-पोषण ढंग से नहीं कर रहे हैं। फिर कुछ दिन बाद चाइल्ड केयर संस्था कुछ लोग उनके घर गए और समझाने लगे कि बच्चों की परवरिश कैसे करनी है। अनुरूप के मुताबिक, वो लोग फिर उनके बच्चों को यह कहकर साथ ले गए कि घुमाने ले जा रहे हैं। लेकिन फिर वापस नहीं लाए। बाद में पता चला कि बच्चों को उन लोगों ने फोस्टर होम में दाखिल करवा दिया है।
परिवरिश में गिनाईं कमियां, लगाए थे ये आरोप
अनुरूप भट्टाचार्य ने बताया था कि नॉर्व की सरकार उनकी परवरिश में जो कमियां गिनाईं, वो असल में भारतीय संस्कृति में बच्चों की परवरिश का अभिन्न अंग हैं। नॉर्वे की चाइल्ड केयर संस्था ने बच्चों को हाथ से खिलाने, साथ सोने और यहां तक कि दही खिलाने को गलत माना। अनुरूप ने बताया था कि इस तरह की संस्थाएं अपने देश में अन्य जगहों के रहने वाले लोगों के साथ अकसर ऐसा ही बर्ताव करती हैं क्योंकि वो चाहती हैं कि बच्चों को अपने कंट्रोल में लें और फिर उन्हें अपने देश की नियम, कायदे-कानून के हिसाब से ढालें।
भारत सरकार की मदद, दो साल बाद मिले बच्चे
चाइल्ड केयर संस्था के अधिकारियों ने सागरिका और अनुरूप पर अपने बच्चों के साथ मारपीट करने, उन्हें सही तरह से न रखने का आरोप भी लगाया था। सागरिका और अनुरूप के तो जैसे बुरे दिन शुरू हो गए थे। अपने बच्चों को वापस पाने के लिए उन्हें नॉर्वे के सिस्टम से लंबी लड़ाई लड़नी पड़ी। इसके लिए उन्हें भारत की सरकार की भी मदद लेनी पड़ी। अपने ही बच्चों को वापस पाने में सागरिका और अनुरूप को दो साल लग गए। दो साल तक मां-बाप बच्चों के लिए किस कदर तड़पे थे, इसका अंदाजा भी लगा पाना मुश्किल है। अब यही कहानी और सागरिका के इसी दर्द को रानी मुखर्जी 'मिसेज चटर्जी वर्सेज नॉर्वे' में लेकर आ रही हैं।
21 मार्च को रिलीज होगी फिल्म
'मिसेज चटर्जी वर्सेज नॉर्वे' 21 मार्च को थिएटर्स में रिलीज होगी। फिल्म में नीना गुप्ता, जिम सार्भ और अनिर्बान भट्टाचार्य नजर आएंगे। 'मिसेज चटर्जी वर्सेज नॉर्वे' को आशिमा छिब्बर ने डायरेक्ट किया है।
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