- स्कूल में लड़कियों की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है। अब प्राइवेट ट्यूशन का चलन बढ़ रहा है। पहली से आठवीं तक के लगभग एक-तिहाई छात्र प्राइवेट ट्यूशन ले रहे हैं। देश भर में महामारी से पहले के स्तरों की तुलना में प्राइवेट ट्यूशन लेने वालों की संख्या में चार प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है। उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड सहित कुछ राज्यों में बढ़ोतरी आठ प्रतिशत तक है। पिछले एक दशक में, ग्रामीण भारत में पहली से आठवीं कक्षा के बच्चों के ट्यूशन लेने के अनुपात में बढ़ोतरी हुई है। पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड में सबसे ज्यादा छात्र प्राइवेट कोचिंग ले रहे हैं। उत्तर प्रदेश में भी यह आंकड़ा बढ़ रहा है।
- 2006 में पूरे देश में 11-14 साल की 10.3 प्रतिशत लड़कियां स्कूल सिस्टम से बाहर थीं और यह आंकड़ा 2018 में 4.1 प्रतिशत रह गया। यह अनुपात लगातार गिर रहा है। 2022 में भारत में 11-14 आयु वर्ग की 2 प्रतिशत लड़कियां स्कूल सिस्टम से बाहर थीं। यह आंकड़ा उत्तर प्रदेश में करीब चार प्रतिशत है और अन्य सभी राज्यों में इससे कम है।
- पिछले एक दशक में 60 से कम छात्रों वाले सरकारी स्कूलों का अनुपात हर साल बढ़ा है। 2022 में छोटे स्कूलों के उच्चतम अनुपात वाले राज्यों में हिमाचल प्रदेश (81.4 प्रतिशत) और उत्तराखंड (74 प्रतिशत) शामिल हैं। इन दोनों राज्यों में कम छात्रों वाले स्कूलों की संख्या सबसे ज्यादा है।
- - औसत टीचर अटेंडेंस 2018 में 85.4 प्रतिशत थी जो 2022 में बढ़कर 87.1 प्रतिशत रही है। लड़कियों के लिए टॉयलट की सुविधा वाले स्कूलों का प्रतिशत बढ़कर 68.4 प्रतिशत हो गया है। औसत स्टूडेंट अटेंडेंस पिछले कई सालों से 72 प्रतिशत पर बरकरार है।
