पीएम मोदी ने गोवा में हुए पर्पल फेस्ट इवेंट का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि गोवा में पर्पल फेस्ट इवेंट हुआ। दिव्यांगजनों के कल्याण को लेकर यह अपने-आप में एक अनूठा प्रयास था। 50 हजार से भी ज्यादा हमारे भाई-बहन इसमें शामिल हुए। यहां आए लोग इस बात को लेकर रोमांचित थे कि वो अब 'मीरामार बीच' घूमने का भरपूर आनंद उठा सकते हैं
भगवान बुद्ध और अंबेडकर का जिक्र
मन की बात कार्यक्रम में पीएम मोदी ने कहा डॉ अम्बेडकर ने बौद्ध भिक्षु संघ की तुलना भारतीय संसद से की थी। उन्होंने उसे एक ऐसी संस्था बताया था, जहां प्रस्ताव, संकल्प, कोरम और वोटों की गिनती के लिए कई नियम थे। बाबासाहेब का मानना था कि भगवान बुद्ध को इसकी प्रेरणा उस समय की राजनीतिक व्यवस्थाओं से मिली होगी। इसके अलावा पीएम मोदी ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र ने अंतरराष्ट्रीय योग दिवस और अंतरराष्ट्रीय बाजरा वर्ष दोनों का निर्णय भारत के प्रस्ताव के बाद लिया है। योग भी स्वास्थय से जुड़ा है और बाजरा भी स्वास्थय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। दोनों अभियानों में जनता की भागीदारी के कारण एक क्रांति रास्ते पर है।
'ई-वेस्ट का सदुपयोग कचरे को कंचन बनाने से कम नहीं'
पीएम मोदी ने कहा कि इस कार्यक्रम में पहले भी हमने Waste to Wealth यानी ‘कचरे से कंचन’ के बारे में बातें की हैं, लेकिन आइए, आज, इसी से जुड़ी E-Waste की चर्चा करते हैं। आज के लेटेस्ट डिवाइस भविष्य के E-Waste भी होते हैं। जब भी कोई नई डिवाइस खरीदता है या फिर अपनी पुरानी डिवाइस को बदलता है, तो यह ध्यान रखना जरूरी हो जाता है कि उसे सही तरीके से डिस्कार्ड किया जाता है या नहीं। अगर E-Waste को ठीक से डिस्पोज नहीं किया गया, तो यह, हमारे पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचा सकता है। लेकिन, अगर सावधानीपूर्वक ऐसा किया जाता है, तो, यह Recycle और Reuse की Circular Economy की बहुत बड़ी ताकत बन सकता है। मानव इतिहास में जितने कमर्शियल बने हैं, उन सभी का वजन मिला दिया जाए, तो भी जितना E-Waste निकल रहा है, उसके बराबर, नहीं होगा। ये ऐसा है जैसे हर सेकेंड 800 लैपचॉप फेंक दिए जा रहे हों। संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में बताया गया था कि हर साल 50 मिलियन टन E-Waste फेंका जा रहा है। E-Waste का सदुपयोग करना, ‘कचरे को कंचन’ बनाने से कम नहीं है।
