आरबीआई के पूर्व गवर्नर ने कहा कि भारत के लिए चिप मैन्यूफैक्चरिंग से भी जरूरी कई काम हैं। जैसे कॉलेजों में स्पेक्ट्रोमीटर लगाना ताकि साइंस के बेहतर छात्र पैदा कर सके। यह साफ नहीं है कि सरकार कैसे तय करती है कि किस इंडस्ट्री, सेक्यर या कंपनी को सब्सिडी चाहिए। चिप मैन्यूफैक्चरिंग में ज्यादा लेबर की जरूरत नहीं है जबकि इस समय रोजगार हमारी सबसे बड़ी चुनौती हैं। राजन ने कहा कि यह कहना गलत है कि भारत को चिप सेगमेंट में भागीदारी के लिए पूरी सप्लाई चेन की जरूरत है। आईटी मिनिस्टर ने खुद यह बात स्वीकार की है कि भारत के पास 300,000 चिप डिजाइनर हैं जबकि भारत चिप नहीं बना रहा है। Nvidia और Qualcomm चिप नहीं बनाते हैं और न ही Apple ऐसा करती है। वे इसका डिजाइन बनाती हैं और इन्हें ताइवान में बनाया जाता है। हॉलैंड की कंपनी ASML चिप बनाने वाली मशीन बनाती है। इसलिए मुझे लगता है कि चिप सब्सिडी की नीति बनाने में सरकार ने ज्यादा सोचविचार नहीं किया।
