उत्तराधिकार का हक, लड़कियों की शादी 21 साल में... उत्तराखंड में यूनिफॉर्म सिविल कोड के लिए विशेष सत्र
Updated on
01-07-2023 06:30 PM
देहरादून: उत्तराखंड में पुष्कर सिंह धामी सरकार लोकसभा चुनाव से पहले यूनिफॉर्म सिविल कोड का मास्टरस्ट्रोक खेलने जा रही है। इस एक घोषणा ने प्रदेश की राजनीति को गरमा दिया है। मार्च 2022 में धामी सरकार ने शपथ के बाद ही यूनिफॉर्म सिविल कोड पर कमेटी गठन की घोषणा कर दी थी। दरअसल, उत्तराखंड चुनाव के प्रचार मैदान में धामी ने समान नागरिक संहिता का मुद्दा छेड़ा और लोगों ने जोरदार समर्थन देकर लगातार भाजपा को दूसरी बार सत्ता में वापसी का मौका दे दिया। इसके बाद से सीएम धामी लगातार लोगों से किए गए वादे को पूरा करने पर जोर दे रहे हैं। सरकार की ओर गठित यूनिफॉर्म सिविल कोड ड्राफ्ट कमेटी ने प्रारूप को आखिरी रूप दे दिया। अब इसे सरकार को सौंपने की तैयारी है। प्रारूप की छपाई के बाद इसे सरकार को सौंपा जाएगा। धामी सरकार इसी माह में उत्तराखंड विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर यूनिफॉर्म सिविल कोड को प्रदेश में लागू करने की तैयारी में जुटी हुई है। वहीं, इस नए कानून की कुछ बातें बाहर भी आई हैं।
पर्सनल लॉ की जगह एक कानून
संविधान की धारा 44 में यूनिफॉर्म सिविल कोड का जिक्र किया गया है। देश में रहने वाले तमाम लोगों के लिए समान नागरिक संहिता की चर्चा की गई है। संविधान के इसी प्रावधान के आधार पर धामी सरकार की ओर से यूनिफॉर्म सिविल कोड का प्रस्ताव तैयार किया गया है। ड्राफ्ट प्रपोजल के मिलने के बाद इसे धामी सरकार कैबिनेट की बैठक में रख सकती है। कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर इस प्रस्ताव को हरी झंडी दी जाएगी।
मुस्लिमों में भी लड़की को अधिकार
यूनिफॉर्म सिविल कोड के प्रावधानों को लेकर सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, मुस्लिम लड़कियों को भी उत्तराधिकार मिल सकता है। मुस्लिम पर्सनल लॉ में मुस्लिम लड़कियों को पैत्रिक संपत्ति में अधिकार का प्रावधान नहीं है। हालांकि, उत्तराखंड सरकार की ओर से तैयार कराए गए ड्राफ्ट में लड़कियों और बच्चों को लेकर कई प्रावधान किए जाने की बात कही जा रही है। उत्तराधिकार के मसले यह पर भी तय किया गया है कि अब गोद लिए बच्चे भी उत्तराधिकारी बन सकेंगे। मुस्लिम और पारसी समाज में इस प्रकार की व्यवस्था अभी नहीं है। समान नागरिक संहिता के तहत हिंदू समाज की तरह उन्हें भी इस नियम के दायरे में लाया जा सकता है।
लड़कियों की शादी की न्यूनतम उम्र में वृद्धि का मामला लंबे समय से चल रहा है। बढ़ती आबादी को काबू में करने के लिए इस प्रस्ताव पर विचार किया जा रहा है। उत्तराखंड समान नागरिक संहिता के ड्राफ्ट में इस पर भी चर्चा की बात कही जा रही है। दावा किया जा रहा है कि लड़कियों की शादी की न्यूनतम उम्र को 18 साल से बढ़ाकर 21 साल किया जा सकता है। अभी लड़कों की शादी की उम्र 21 साल है। लड़कियों को भी उनके समान कानूनी अधिकार मिल सकता है।
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