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शुरु में लगे 58 साल, फिर 12 और अब 5 साल, जानिए किस ओर इशारा कर रहे हैं अडानी

Updated on 08-01-2023 06:20 PM
नई दिल्ली: भारत विकास के पढ़ पर आरुढ़ है। देश की इकोनॉमी (Indian Economy) तेजी से डेवलप हो रही है। अपनी जीडीपी (India GDP) किस हिसाब से बढ़ रही है, इसकी झलक देखिए। भारत को एक ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी बनने में 58 साल लगे। दो ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी बनने में 12 साल लगे। दो से तीन ट्रिलियन डॉलर का सफर तो महज 5 साल में पूरा हो गया। अब जिस तरह से इकोनॉमी में ग्रोथ हो रहा है, भारत सन 2050 तक 30 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी बन जाएगा। यह कहना है दुनिया के तीसरे सबसे अमीर व्यक्ति गौतम अडानी (Gautam Adani) का।
देश काफी तेजी से तरक्की कर रहा है
अडानी आप की अदालत (Aap ki Adalat) टीवी शो में पूछे गए एक सवाल के जवाब में कहा कि देश काफी तरक्की कर रहा है। भारत को 1 ट्रिलियन डालर वाली अर्थव्यवस्था बनने में 58 साल लगे, 2 ट्रिलियन डालर तक पहुंचने में 12 साल और लगे, 3 ट्रिलियन डालर अर्थव्यवस्था पिछले 5 साल के अन्दर बनी। जिस तरह से हमारे युवाओं की आकांक्षाएं बढ़ रही है, भारत इस वक्त विश्व मे ऐसी स्थिति में है कि सन 2050 तक 30 ट्रिलियन डॉलर वाली अर्थव्यवस्था से भी आगे बढ़ जाएगी। इससे प्रति व्यक्ति आय बढेगी, विकास से रोज़गार के अवसर पैदा होंगे।आने वाले समय में भारत को कोई रोक नहीं सकता।

अडानी की कंपनियों को बैंक से कैसे मिले पैसे
इस कार्यक्रम में दौरान अडानी ने बताया कि उन्हें बैंकों से कैसे पैसे मिले। उन्होंने कहा कोई भी इन्फ्रा प्रोजेक्ट (Infra Project) शुरू करने से पहले हम इक्विटी लगाते हैं, बैंक से कर्ज लेते हैं। इसमें 40:60 परसेंट का अनुपात रहता है। अडानी ग्रुप भारत में अकेला ग्रुप है, जिसकी कंपनियों की साख भारत की sovereign rating के बराबर है। वो रेटिंग कोई राजनीतिक दल या बैंक नहीं देती, उसे स्वतंत्र रेटिंग एजेंसी पूरा वित्तीय आकलन करने के बाद देती है। और उसी के आधार पर बैंक कर्ज़ देते हैं।

रिपेमेंट में कभी नहीं हुई देरी
देश के सबसे बड़े अमीर व्यक्ति गौतम अडानी ने कहा कि बैंकों से कर्ज तो सभी लेते हैं। लेकिन महत्वपूर्ण बात है उसका रिपेमेंट। अडानी ग्रुप का 25 साल का इतिहास देख लें। ग्रुप ने इसके रिपेमेंट में एक दिन भी कभी देरी नहीं हुई। उन्होंने बताया कि साल 2013 के बाद उन्होंने 80 फीसदी कर्ज भारतीय बैंकों से लिया था। उस पर ब्याज 35 फीसदी तक हो गया। उसके बाद ग्रुप इंटरनेशनल मार्केट में ग्लोबल रेटिंग की तरफ गया। ग्लोबल इंस्टीच्यूशन भारत के किसी के कहने से कोई पैसा नहीं देता। वो तो अपनी रोटिंग और गवर्नेन्स के हिसाब से धन देते हैं।
अडानी का कर्ज 11 फीसदी जबकि आमदनी 24 फीसदी बढ़ी
अडानी ने बताया कि पिछले 7-8 साल के अंदर उनके कर्ज में 11 फीसदी की बढोत्तरी हुई। साथ ही बढ़ी उनकी आमदनी भी। इस दौरान उनकी आमदनी में 24 फीसदी की शानदार बढ़ोत्तरी हुई। उनकी मुनाफे वाली स्थिति (प्रॉफिटेबिलिटी) के कारण ही ग्रुप की रेटिंग में सुधार आया। उनका कहना है "आज हमारी प्रॉफिटेबिलिटी हमारे कर्ज़ से भी ज्यादा बढ़ गई है"।

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