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इंटरव्यू: 'मॉनसून पर बस दो ही बार गलत हुए हम', स्काईमेट के फाउंडर जतिन सिंह से खास बातचीत

Updated on 29-04-2023 06:55 PM
नई दिल्ली: भारत की पहली प्राइवेट वेदर कंपनी स्काईमेट का कहना है कि इस साल भारत में बारिश कम हो सकती है। वहीं मौसम विभाग (IMD) के मुताबिक बारिश सामान्य रहने के आसार हैं। दोनों के बारिश के पूर्वानुमानों में इस बार जरा सा फर्क है। वहीं गर्मी पर भी इस महीने भारत को लेकर कई चिंतित करने वाली रिपोर्टें आ चुकी हैं। मौसम के मसलों पर स्काईमेट के फाउंडर और मैनेजिंग डायरेक्टर जतिन सिंह से बात की राहुल पाण्डेय ने। पेश हैं अहम अंश :
  1. इस साल गर्मी का क्या हाल रहने वाला है?
    गर्मी का हाल बहुत ऊपर-नीचे रहेगा। खासकर मई के पहले हफ्ते में। IMD ने जितना बोला था कि गर्मी होगी, उतनी तो अब तक हुई नहीं है। मार्च में बारिश हो गई। अप्रैल में आप देख रहे हैं कि कहीं हीटवेव है, कहीं बारिश हो रही है। अभी 30 अप्रैल से लेकर मई के पहले हफ्ते तक आप देखेंगे कि पूरे भारत में बारिश हो रही होगी। मुझे लगता है कि लंबी गर्मी जुलाई के पहले हफ्ते में आ सकती है। यह मेरा अंदाजा है जो गलत भी हो सकता है कि मॉनसून इस बार कमजोर होगा और देर से आएगा।
  2. कई रिपोर्टें आई हैं कि भारत इस साल गर्मी से सबसे अधिक प्रभावित रहने वाला है?
    इन सबका कोई आधार नहीं है। देखिए, अल निनो का संबंध गर्मी से उतना नहीं होता, जितना बारिश की कमी से होता है। और गर्मी लगातार बढ़ भी रही है और कम भी हो रही है। आप देखिए, दिल्ली में कितने दिनों से बारिश हो रही है। मैं यह नहीं कह रहा कि हीटवेव नहीं आ रही। वह आ रही है, लेकिन जिस तीव्रता से उसके आने का अनुमान लगाया गया था, वह अभी तक नहीं दिखा है। आठ-नौ मई को बात करिएगा, तो पूरे भारत में बारिश हुई होगी और तापमान कंट्रोल में होगा। अल निनो को मैं गर्मी से कम और बारिश से ज्यादा जोड़कर देख रहा हूं। उससे मॉनसून के कमजोर होने की आशंका है। हो सकता है जून के पहले हफ्ते में ज्यादा गर्मी हो, क्योंकि मॉनसून के आने में देरी होगी।
  3. इस बार मॉनसून कैसा रहने की उम्मीद है? सूखे को लेकर आपका क्या अनुमान है?
    मॉनसूनी बारिश तो सामान्य से कम होगी। सामान्य बारिश होती है-868 मिलिमीटर। यह कम होगी और बीस फीसदी चांस हैं कि अकाल पड़ेगा, बारिश नॉर्मल से कम रहेगी। सूखे के ऊपर और सामान्य के बीच में कैटिगरी होती है- सामान्य से कम (बिलो नॉर्मल)। कम बारिश होती है तो उसमें एकाध राज्यों में अकाल आता है। यह बताना बहुत मुश्किल है कि जून, जुलाई, अगस्त, सितंबर महीने में कब बारिश में कमी होगी, किस राज्य में कमी होगी। इसमें बहुत फर्क होता है और आमतौर पर जब कम बारिश होती है तो महाराष्ट्र, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में ज्यादा असर पड़ता है क्योंकि वहां वैसे ही बारिश कम होती है।
  4. IMD का आकलन आपसे अलग है। इस पर आप क्या कहेंगे?
    IMD मुझसे बिलकुल असहमत नहीं है। IMD का जो अनुमान है, वह लोएस्ट नॉर्मल नंबर है- 96, मेरा है 94। सिर्फ दो फीसदी का फर्क है। दूसरे, उनका आप उनकी ओर से जताई गई संभावना का चार्ट देखिएगा तो उसमें 51 फीसदी चांसेज सामान्य से कम बारिश के हैं। मैं इसे 60 फीसदी मानकर चल रहा हूं। वे संकेत दे रहे हैं कि इस साल अगर सबसे अच्छी बारिश होती है तो वह नॉर्मल कैटिगरी पर आकर रुकेगी, उससे ज्यादा नहीं। अगर IMD 100 बोलता तो आप कह सकते थे कि मुझसे डिफर कर रहे हैं। मगर 96 फीसदी पर वे मुझसे उतना डिफर नहीं कर रहे हैं। जैसा पहले बताया, सामान्य बारिश का एक औसत होता है- 868 मिलिमीटर- चार महीने- जून, जुलाई, अगस्त, सितंबर के अंदर। अगर 868 मिमी से 90 फीसदी से कम हो तो उसे सूखा बोला जाता है। 90 से 95 के बीच उसे सामान्य से कम कहा जाता है। 96 से से 104 के बीच में उसे सामान्य बोला जाता है। 105 से 110 में सामान्य से अधिक और 110 से ज्यादा में उसे एक्सेस बोला जाता है।
  5. दो बार स्काईमेट का अनुमान गलत निकला। कोई कैसे भरोसा करे आपके पूर्वानुमानों पर?
    मॉनसून की भविष्यवाणी सिर्फ इसी देश में होती है। उसके 60 से 70 फीसदी से अधिक सही होने की उम्मीद करना मुश्किल है। आने वाले वर्षों में अनुमान और सटीक होंगे क्योंकि अनुभव बढ़ रहा है। 2015 और 2019 में हमारा अनुमान गलत था, बाकी वर्षों में सही। अब 2023 में एक चांस है कि बारिश कम होगी। हो सकता है अनुमान गलत हो जाए। अगर मेरा अनुमान गलत हो भी जाता है तो यही होगा कि बारिश अच्छी हो जाएगी। और अगर सही हो जाता है और बारिश कम होती है तो आपके पास इतना समय तो है ही कि आप उसके लिए तैयारी कर लें। सबसे ज्यादा तैयारी तो केंद्र और राज्य सरकारों को करनी पड़ेगी, जो शायद उन्होंने कर भी ली होगी। फूड स्टॉक पूरे करने पड़ेंगे, पीडीएस में सर्कुलेट करना पड़ेगा, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को अच्छी तरह तैयार रहना पड़ेगा, किसानों को तेजी से लोन देना पड़ेगा। चारे का इंतजाम करना पड़ेगा कि जानवरों को तकलीफ न हो। और मैं तो कहूंगा कि एक ऐसा तरीका हो जिससे सारे किसानों को उनके इलाके के मौसम का पूर्वानुमान दस-दस दिन पर दिया जा सके तो वे सही समय पर समझ पाएंगे कि उन्हें क्या करना है।

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