चीन और अमेरिका में तनाव
चीन की इकॉनमी को कई मोर्चों पर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। साथ ही चीन और अमेरिका के बीच लंबे समय से तनातनी चल रही है। इससे विदेशी निवेशक और कंपनियां बुरी तरह घबराई हुई हैं और वहां से अपना पैसा निकाल रही हैं। दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी एसेट मैनेजमेंट कंपनी Vanguard ने भी चीन से बोरिया बिस्तर समेट लिया है। कंपनी ने कहा है कि वह दिसंबर तक शंघाई में अपना दफ्तर बंद कर देगी। कंपनी ने चीन में अपने जॉइंट वेंचर की हिस्सेदारी स्थानीय कंपनी को बेच दी है।इकॉनमी में जान फूंकने के सरकार के सारे प्रयास नाकाम हुए हैं। पिछले महीने सरकार ने 137 अरब डॉलर का सॉवरेन बॉन्ड मंजूर किया था। इसका इस्तेमाल मुख्य रूप से इन्फ्रा प्रोजेक्ट्स को फंड करने के लिए किया जाएगा। सितंबर में सरकार ने देश के दो सबसे बड़े शहरों बीजिंग और शंघाई में कैपिटल कंट्रोल में भी ढील देने की घोषणा की थी ताकि विदेशी निवेशक आसानी से देश से अपना पैसा ला सकें और ले जा सकें। चीन के प्रमुख बैंक ने भी विदेशी निवेशकों की चिंताओं को दूर करने के लिए कई टॉप वेस्टर्न कंपनियों से बात की है। लेकिन विदेशी कंपनियां इस बात से घबराई हुई हैं कि चीन की सरकार ने उनकी निगरानी बढ़ा दी है।
