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ईरान-इजरायल संघर्ष से बढ़ सकती है भारत की मुश्किल, हमारे लिए क्यों खास हैं ये दोनों देश

Updated on 14-06-2025 02:39 PM
नई दिल्ली: ईरान पर इजरायली हमले से बने हालात में क्रूड ऑयल के करीब 10% उछलने के साथ रुपये पर दबाव बढ़ने और महंगाई को हवा मिलने का रिस्क बन गया है। वहीं, निर्यात पर भी आंच आ सकती है, जिस पर पहले ही अमेरिकी टैरिफ्स की तलवार लटकी हुई है। फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशंस (FIEO) के डीजी डॉ अजय सहाय ने कहा, ‘इस टकराव से स्वेज नहर और रेड सी सहित महत्वपूर्ण शिपिंग लाइंस के लिए रिस्क बन गया है। ये यूरोप, अमेरिका, अफ्रीका और पश्चिम एशिया के साथ भारत के व्यापार के लिए अहम हैं। इस रूट में बाधा पड़ने से शिपमेंट्स में देर होगी और लॉजिस्टिक्स कॉस्ट बढ़ेगी।’

भारत इजरायल को मुख्य रूप से रिफाइंड पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स और केमिकल्स के अलावा इंजीनियरिंग गुड्स और मशीनरी, जेम्स एंड जूलरी और टेक्सटाइल्स का निर्यात करता है। ईरान सहित पश्चिम एशिया को दवाओं, कपड़ों और मीट का निर्यात भी होता है। डॉ सहाय ने कहा, ‘इजरायल को भारत के पॉलिश्ड डायमंड एक्सपोर्ट पर असर पड़ सकता है। रिटेल नेटवर्क्स में बाधा पड़ने से टेक्सटाइल्स ऑर्डर में देर होने या कैंसलेशन बढ़ने का खतरा है। वहीं, चावल और मीट का ईरान को होने वाला एक्सपोर्ट शिपमेंट में देरी के लिहाज से बहुत संवेदनशील है।‘ डॉ सहाय ने कहा, ‘वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता बढ़ने और क्रूड ऑयल के दाम चढ़ने से एक्सपोर्ट के लिए डिमांड घट सकती है। पश्चिम एशिया को माल भेजने वाले निर्यातकों को पेमेंट में देर और कॉन्ट्रैक्ट टलने का सामना करना पड़ सकता है।’

क्रूड का हाल

ईरान पर इजरायली हमले के बाद ब्रेंट क्रूड 9% से ज्यादा उछल गया। खबर लिखे जाने तक यह 7.6% बढ़त के साथ 74.6 डॉलर प्रति बैरल पर था। भारत ईरान से क्रूड इंपोर्ट नहीं करता है। लेकिन होरमुज की खाड़ी से करीब 2 करोड़ बैरल प्रतिदिन क्रूड की आवाजाही होती है।एमके ग्लोबल फाइनैंशल सर्विसेज की चीफ इकनॉमिस्ट माधवी अरोड़ा ने कहा, ‘ईरान होरमुज स्ट्रेट बंद करने की चेतावनी पहले भी दे चुका है। अगर ऐसा हुआ तो सऊदी अरब, कुवैत, इराक और यूएई की तेल सप्लाई पर असर पड़ेगा और कीमतों में बड़ा उछाल आ सकता है।‘ उन्होंने कहा, ‘हालांकि OPEC+ देशों ने जुलाई में ऑयल प्रोडक्शन बढ़ाने की घोषणा की है। ऐसा होता है तो अच्छी सप्लाई बनी रहेगी, जिससे ईरानी सप्लाई कट का खास असर नहीं होगा।
मोतीलाल ओसवाल फाइनैंशल सर्विसेज के कमोडिटी रिसर्च हेड नवनीत दमानी ने कहा, ‘इजरायली हमले के बाद सप्लाई में बाधा पड़ने का डर बढ़ा है। इससे क्रूड ऑयल प्राइसेज में उछाल आया। अगर लड़ाई बढ़ी तो कीमतें और चढ़ सकती हैं। दाम पहले ही 10% उछल चुके हैं। लड़ाई बढ़ने पर और 8-9% का इजाफा हो सकता है।

महंगाई और रुपये पर असर

भारत अपनी जरूरत का करीब 85% क्रूड आयात करता है। क्रूड प्राइस में प्रति बैरल 10 डॉलर की बढ़त होने पर रिटेल इंफ्लेशन पर 0.5% तक असर पड़ता है। ताजा आंकड़ों में मई में रिटेल इंफ्लेशन 2.82% के साथ 75 महीनों के निचले स्तर पर चली गई थी। खाने-पीने की चीजों, खासतौर से दालों और सब्जियों के दाम में बड़ी गिरावट से खुदरा महंगाई दर पर असर पड़ा। वहीं, 17% से ज्यादा दाम बढ़ने के साथ खाद्य तेलों का मामला चिंताजनक बना हुआ है क्योंकि सरकार ने पिछले साल इनके इंपोर्ट पर ड्यूटी बढ़ा दी थी और उसके बाद वैश्विक स्तर पर कीमतें भी चढ़ने लगीं। भारत खाद्य तेलों के आयात पर बहुत हद तक निर्भर है।
अब क्रूड ऑयल में उछाल इसका इंपोर्ट बिल बढ़ा देगा। इसका असर ट्रेड डेफिसिट और करंट अकाउंट डेफिसिट पर पड़ेगा। इससे महंगाई का दबाव बढ़ सकता है। लड़ाई बढ़ी तो सेफ हेवन असेट के रूप में डॉलर की डिमांड भी बढ़ेगी। इससे रुपये पर दबाव बढ़ेगा। डॉलर के मुकाबले रुपया शुक्रवार को 55 पैसे गिरकर 86.07 पर बंद हुआ। LKP सिक्योरिटीज के रिसर्च एनालिस्ट जतीन त्रिवेदी ने कहा, ‘इजरायल के अटैक के बाद रिस्क सेंटिमेंट खराब हुआ है। क्रूड उछलने से रुपये पर काफी दबाव आया। निकट भविष्य में रुपया 85.60 से 86.50 की रेंज में रह सकता है।

शेयर बाजार में क्या?

ईरान पर इजरायल के हमले के बाद क्रूड ऑयल में उछाल और कमजोर वैश्विक संकेतों के बीच भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार को बड़ी गिरावट रही। निफ्टी बाद में संभाला और 0.7% की गिरावट के साथ 24719 पॉइंट्स पर बंद हुआ। क्रूड प्राइस उछलने से ऑयल मार्केट कंपनियों, पेंट्स, टायर और ल्यूब्रिकेंट स्टॉक्स पर बिकवाली का दबाव आया, वहीं तेल उत्पादक कंपनियों में मामूली बढ़त रही। साथ ही, डिफेंस स्टॉक्स में अच्छी तेजी दिखी। निफ्टी इंडिया डिफेंस 1.5% चढ़ गया।

मोतीलाल ओसवाल फाइनैंशल सर्विसेज के रिसर्च हेड सिद्धार्थ खेमका ने कहा, ‘क्रूड प्राइसेज में बढ़त के चलते ऑयल एक्सप्लोरेशन कंपनियों पर मार्केट का फोकस बने रहने की उम्मीद है। संघर्ष बढ़ने पर देश की रक्षा कंपनियों पर सकारात्मक असर होगा क्योंकि उन्हें ज्यादा एक्सपोर्ट ऑर्डर मिल सकते हैं।’

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