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क्या सिर्फ 143 करोड़ में नीलाम हुई टीपू सुल्तान की तलवार, विजय माल्या से है कनेक्शन, क्यों है खास? जानिए सबकुछ

Updated on 29-05-2023 08:49 PM
नई दिल्ली: मैसूर के महान शासक टीपू सुल्तान के बारे में कौन नहीं जानता। उसे मैसूर का शेर कहा जाता था। इतिहास के पन्नों में उसका जिक्र है। आज से करीब 225 साल पहले 4 मई 1799 को जब टीपू सुल्तान की राजधानी श्रीरंगापतनम का पतन हुआ था तब, अंग्रेजों ने कई बहुमूल्य चीजों को जब्त कर लिया था। उनमें से टीपू सुल्तान की तलवार सुलेखा भी थी। इसे 204 साल तक अंग्रेज जनरल डेविड बैयर्ड के परिवार वालों के पास थी। बेयर्ड वही व्यक्ति था जिसे टीपू ने अपने राज में बंदी बनाया था। टीपू सुल्तान की बेशकीमती तलवार को बाद में बेयर्ड के परिवार ने साल 2003 में नीलाम कर दिया था। इसे ब्रिटेन के डिक्स नूनान जिसे अब नूनान्स कहते हैं वहां नीलाम किया था। तो फिर आज इसकी चर्चा क्यों हो रही है। इस तलवार को उसी साल यानी 2003 में भगोड़े कारोबारी विजय माल्या ने खरीदा था। वहीं बीते मंगलवार को एक और नीलामी हाउस ने यह दावा किया कि हमने इस तलवार को नीलाम कर दिया है। जो तलवार साल 2003 में बेयर्ड फैमिली से नीलामी में भगौडे़ माल्या ने खरीदा था उसे फिर से फिर कैसे नीलाम किया गया है। इस तलवार की कीमत 143 करोड़ रुपये लगाई गई है। ऐसे में सवाल उठना लाजमी है। क्या टीपू सुल्तान के पास दो तलवारें थीं?
जनरल बेयर्ड के पास ऐसे पहुंची तलवार, यह है इतिहास
4 मई और साल 1799, आज से करीब 225 साल पहले की बात है। टीपू सुल्तान की राजधानी श्रीरंगपट्टनम पर अंग्रेजों ने कब्जा कर लिया था। उस समय ईस्ट इंडिया कंपनी भारत पर राज कर रही थी। ईस्ट इंडिया कंपनी ने टीपू सुल्तान की कई बेशकीमती चीजें जब्त कर ली थीं। इनमें से एक टीपू सुल्तान की तलवार भी थी। उस दौरान अंग्रेज जनरल डेविड बेयर्ड को तोहफे के रूप में टीपू की यह तलवार दी गई थी। बेयर्ड को तलवार देखते ही अपना अतीत याद आ गया। असल में, बेयर्ड इससे पहले 3 साल तक टीपू की कैद में थे। उस दौरान उनसे बहुत बुरे तरीके से पेश आया गया था। बेयर्ड ने टीपू की यह तलवार अपने पास काफी समय तक रखी थी। 204 साल बाद बेयर्ड के परिवारवालों ने इसे ब्रिटेन के हाउस डिक्स नूनन वेब को दिया गया था। इसे उस दौरान भी नीलामी में रखा गया था। तब कारोबारी विजय माल्या ने इसे खरीदा था।
अब चर्चा में क्यों है तलवार?
असल में इस साल 23 मई यानी पिछले मंगलवार को एक अन्य ऑक्शन हाउस बोनहाम्स के मुताबिक, इसने अपनी वेबसाइट में टीपू के तलवार को नीलाम करने का दावा किया था। बोनहाम्स ने बताया कि टीपू की यह तलवार मेजर जनरल डेविड बेयर्ड को उनके साहस दिखाने के लिए दी गई थी। हालांकि बोनहाम्स ने यह नहीं बताया कि यह तलवार उनके पास आई कहां से। इसमें उन्होंने किसी भी तरह से साल 2003 में हुई नीलामी का भी जिक्र नहीं किया है। तो फिर माल्या के पास से यह तलवार बोनहाम्स के पास कैसे पहुंची। तो क्या टीपू के पास दो तलवारें थीं? दावा यह भी है कि जब टीपू की बेशकीमती चीजें जब्त की गई थीं तब क्या बेयर्ड को एक की जगह 2 तलवारें दी गई थीं?
क्या दोनों तलवारें एक ही हैं?
दावे की पड़ताल के लिए हमें लंदन के मीडिया आउटलेट और एक न्यूजपेपर का दावा है कि नूनान्स और बोनहाम्स दोनों की तलवारें एक ही हैं। उनके मुताबिक, बेडबेंचर तलवार 2003 तक बेयर्ड के परिवारवालों के पास ही थी। इसे बाद में डिक्स नूनान वेब पर नीलाम कर दिया गया था। हमारे सहयोगी टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक, इतिहासकार निधिन ओलिनकार का मानना है कि बोनहैम्स ने जो तलवार नीलाम की है वह माल्या की है। साल 2018 में कई भारतीय समाचार पत्रों में यह छापा गया कि विजय माल्या ने वो तलवार जो उसने नीलामी में खरीदी थी उसे वापस दे दी है। क्योंकि माल्या को लगता था कि इसके कारण उनका बुरा दौर आना शुरू हुआ था। उसके बाद से वह गायब हो गई थी। ये माल्या के हवाले से कहा गया था। इस साल 23 मई को जब उसे नीलाम किया गया तब, यह अटकलें लगाई गईं कि बोनहाम्स ने ये तलवार माल्या से ली होगी। इस बारे में बोनहाम्स से ईमेल के जरिए यह जानने की कोशिश भी की गई थी। लेकिन, उन्होंने इसका जवाब नहीं दिया और तलवार खरीदने वाले की पहचान भी छुपा कर रखी थी।
टीपू सुल्तान की तलवार की खासियत क्या थी?

जानकारों का कहना है कि टीपू सुल्तान इस तलवार का उपयोग युद्ध के दौरान नहीं करते थे। यह तलवार टीपू के बेडचेंबर में लटकी रहती थी। इस तलवार की ब्लेड को 16वीं शताब्दी की जर्मन ब्लेड्स की स्टाइल में बनाया गया था। इस तरह की ब्लेड्स को तब भारत आयात करके लाया जाता था। लोगों का यह भी कहना है कि इस तलवार में तलवार में लिखी बातें जिहाद के लिए उकसाने के साथ हिंदुओं के मर्डर की बात भी करती हैं। लेकिन यह पूरी तरह से झूठ है। इसमें ऐसा कुछ भी नहीं लिखा है। इसमें शमशीर-ए-मलिक यानी राजा की तलवार या शमशीर-ए-मुल्क यानी राज्य की तलवार है।

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