जानकारों का कहना है कि टीपू सुल्तान इस तलवार का उपयोग युद्ध के दौरान नहीं करते थे। यह तलवार टीपू के बेडचेंबर में लटकी रहती थी। इस तलवार की ब्लेड को 16वीं शताब्दी की जर्मन ब्लेड्स की स्टाइल में बनाया गया था। इस तरह की ब्लेड्स को तब भारत आयात करके लाया जाता था। लोगों का यह भी कहना है कि इस तलवार में तलवार में लिखी बातें जिहाद के लिए उकसाने के साथ हिंदुओं के मर्डर की बात भी करती हैं। लेकिन यह पूरी तरह से झूठ है। इसमें ऐसा कुछ भी नहीं लिखा है। इसमें शमशीर-ए-मलिक यानी राजा की तलवार या शमशीर-ए-मुल्क यानी राज्य की तलवार है।
जानकारों का कहना है कि टीपू सुल्तान इस तलवार का उपयोग युद्ध के दौरान नहीं करते थे। यह तलवार टीपू के बेडचेंबर में लटकी रहती थी। इस तलवार की ब्लेड को 16वीं शताब्दी की जर्मन ब्लेड्स की स्टाइल में बनाया गया था। इस तरह की ब्लेड्स को तब भारत आयात करके लाया जाता था। लोगों का यह भी कहना है कि इस तलवार में तलवार में लिखी बातें जिहाद के लिए उकसाने के साथ हिंदुओं के मर्डर की बात भी करती हैं। लेकिन यह पूरी तरह से झूठ है। इसमें ऐसा कुछ भी नहीं लिखा है। इसमें शमशीर-ए-मलिक यानी राजा की तलवार या शमशीर-ए-मुल्क यानी राज्य की तलवार है।
