जापान खत्म करेगा चीन की दादागिरी, समुद्र से निकालेगा सोने से भी कीमती कीचड़
Updated on
30-01-2026 01:05 PM
टोक्यो: जापान ने रेयर अर्थ एलीमेंट पर चीन की दादागिरी की खत्म करने करने के लिए बड़ा कदम उठाने जा रहा है। निक्केई एशिया अखबार के अनुसार, जापान ने 2027 तक गहरे समुद्र से दुर्लभ खनिज निकालने और उन्हें रिफाइन करने की एक योजना बनाई है। रिपोर्ट के अनुसार, जापान समुद्र की सतह से 6000 मीटर नीचे समुद्र तल में दुर्लभ खनिजों की तलाश करेगा। इसके लिए समुद्र तल से मिट्टी निकालकर उसे मुख्य भूमि पर प्रोसेस किया जाएगा। जापान खास तौर पर डिस्प्रोसियम जैसे दुर्लभ खनिजों की तलाश कर रहा है जिनका इस्तेमाल ऑटोमाबाइल इंडस्ट्री में होता है।
जापान के पास दुनिया की सबसे बड़ी ऑटोमाबाइल इंडस्ट्री में से एक है, जिसमें टोयोटा, होंडा, सुजुकी और निसान जैसे ब्रांड दुनिया के कई हिस्सों में जाने-माने नाम हैं। लेकिन साल 2010 में सेनकाकू द्वीपों पर विवाद के कारण चीन ने रेयर अर्थ मिनरल्स की सप्लाई रोक दी जिससे जापानी इंडस्ट्री को मुश्किल का सामना करना पड़ा था। इसके बाद से ही जापान अपने रेयर अर्थ की सप्लाई में विविधता लानी शुरू कर दी थी। पिछले कुछ सालों में वह चीन पर अपनी निर्भरता को एक तिहाई तक कम करने में कामयाब रहा है।
चीन को जवाब देने का प्लान
चीन दुनिया भर में रेयर अर्थ की सप्लाई का लगभग 70 फीसदी नियंत्रित करता है। रिफाइनिंग क्षमता में यह 90 प्रतिशत पहुंच जाता है। 2010 की घटना के बाद जापान ने ऑस्ट्रेलियाई कंपनी Lynas में हिस्सेदारी खरीदी। इससे चीन पर निर्भर हुए बिना जापान के लिए दुर्लभ खनिजों को दीर्घ अवधि के लिए सप्लाई पक्की हुई।
जापान निकालेगा समुद्र से रेयर अर्थ मिनरल
अब जापान की योजना अपने समुद्री क्षेत्र से दुर्लभ खनिजों का दोहन करना है। निक्केई एशिया के अनुसार, जापान अपने दूर द्वीप पर स्थित मिनमिटोरिशिमा पर एक फैसिलिटी बनाएगा, जहां समुद्र का कीचड़ निकाला जा सके। इस कीचड़ को समुद्र तल से अलग करके फाइनल रिफाइनिंग के लिए मुख्य भूमिक पर ले जाया जाएगा। रिपोर्ट के अनुसार, यह काम जनवरी और फरवरी 2026 में शुरू होगा। जापान एजेंसी फॉर मरीन-अर्थ साइंस एंड टेक्नोलॉजी गहरे समुद्र में रिसर्च शिप का इस्तेमाल करके टेस्ट माइनिंग करेगी, ताकि पाइपों के कीचड़ निकाला जा सके।योजना के अनुसार, समुद्र से निकाले गए कीचड़ को मिनमिटोरिशिमा पर एक फैसिलिटी में लाया जाएगा, जहां समुद्र का पानी अलग किया जाएगा। बाकी कीचड़ को रिफाइनिंग और रेयर अर्थ मेटल्स के प्रोडक्शन के लिए जहाज से जापान की मुख्य भूमि पर भेजा जाएगा। निक्केई एशिया की रिपोर्ट के अनुसार, जापान ने इस योजना के लिए 16.4 अरब येन (लगभग 105 मिलियन डॉलर) की राशि आवंटित की है।
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