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जल उठा था कश्मीर, दर्जनों युवक बन गए थे आतंकी... 2 डॉक्टरों की पाकिस्तान के साथ मिल 2009 की वह साजिश क्या थी?

Updated on 23-06-2023 06:28 PM
श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने गुरुवार को दो सरकारी डॉक्टरों को सेवा से बर्खास्त कर दिया। दोनों डॉक्टरों की जो करतूत सामने आई, वह धरती के भगवान कहे जाने वाले डॉक्टरों के पेशे को बदनाम करने वाला है। दोनों डॉक्टरों ने 2009 में शोपियां में डूबने से मरने वाली दो युवा कश्मीरी महिलाओं आसिया जान और नीलोफर जान की फर्जी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट बनाई थी। डूबने से मौत को रेप के बाद हत्या बताया था। यह मामला तूल पकड़ा था और जम्मू-कश्मीर समेत पूरे देश में आसिया-नीलोफर केस चर्चा बन गया था। मामले में की जांच में सामने आया कि दोनों डॉक्टर्स ने पाकिस्तान की आईएसआई के साथ मिलकर साजिश रची थी। दोनों डॉक्टरों ने केस को रेप के बाद हत्या दिखाकर सांप्रदायिक दंगे करारा और घाटी को जलाने की थी। मामला तूल पकड़ा और तमाम विवाद के बाद यह केस जांच के लिए सीबीआई को दे दिया गया था।


सीबीआई ने आसिया-नीलोफर केस की जांच की और चौंकाने वाले खुलासे किए। सीबीआई ने जांच में पाया गया कि डॉक्टरों की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट गलत तैयार की थी। एम्स और सेंट्रल फरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (सीएफएसएल) के निष्कर्षों में दोनों की मौत के कारण दुर्घटनावश डूबने के कारण होना पता चला।

एम्स की रिपोर्ट ने किया खुलासा

एम्स की रिपोर्ट में बताया गया कि डूबने से पहले भी दोनों युवतियों के साथ कोई जबरदस्ती नहीं हुई थी। वह डूबीं और पानी में दम घुटने के बाद उनकी मौत प्राकृतिक रूप से हुई। किसी भी तरह के रेप या जबरदस्ती के सबूत नहीं मिले थे।

पाकिस्तानी एजेंसी के लिए कर रहे थे काम

डॉ. निघत शाहीन चिलू एक सलाहकार स्त्री रोग विशेषज्ञ थीं। वह चाडूरा, बडगाम के उपजिला अस्पताल में तैनात थीं। डॉ. बिलाल अहमद दलाल, एक चिकित्सा अधिकारी, जो पिछली बार एनटीपीएचसी, शोपियां में तैनात थे दोनों को हटा दिया गया है। दोनों डॉक्टर के पेशे के पीछे पाकिस्तान की एंजेंसी के लिए काम कर रहे थे।

कश्मीर में भड़की थी हिंसा

दोनों ने तथ्यों को गलत साबित करके, दोनों महिलाओं के साथ बलात्कार और हत्या का संकेत देने वाली चार झूठी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट तैयार कीं। यह साजिश भारत के खिलाफ एक षडयंत्र के तहत किया गया। दोनों डॉक्टरों की इस साजिश में अहम रोल था। 17 वर्षीय आसिया जान और 22 वर्षीय नीलोफर जान के बलात्कार और हत्या की झूठी खबर से कश्मीर में हिसा भड़क उठी थी। कई जगहों पर भीड़ की सुरक्षा बलों से झड़प भी हुई।

जल उठा था कश्मीर

अलगाववादियों ने आसिया और नीलोफर जान रेप और हत्याकांड को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल की थी। इस केस ने पूरी कश्मीर घाटी को जला दिया था। शिक्षा और स्थानीय अर्थव्यवस्था पंगु बन गई थी। अशांति के बाद, तत्कालीन राज्य सरकार ने शोपियां जिले के तत्कालीन पुलिस अधीक्षक सहित चार पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया था, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया।

6,000 करोड़ के कारोबार का हुआ था नुकसान

कश्मीर में हिंसा के दौरान 42 हड़ताल के आह्वान किए गए। 600 कानून-व्यवस्था की घटनाएं हुईं। जगह-जगह हिंसा में सात नागरिकों की मौत हो गई थी। 35 पुलिस और अर्धसैनिक कर्मियों सहित 135 लोग घायल हुए थे। इस दौरान 6,000 करोड़ रुपये के कारोबार का नुकसान हुआ था। मनगढ़ंत रिपोर्टों से उपजे जनाक्रोश के कारण सैकड़ों असंतुष्ट और क्रोधित युवा आतंकवादी समूहों में शामिल हो गए।

कई युवा आतंकी संगठनों में हो गए थे शामिल

गलत जांच के कारण बलात्कार, हत्या या डूबने से महिलाओं की मौत की पुष्टि नहीं हो सकी। इसके बाद मामले को सीबीआई को सौंप दिया गया। जांच में दो डॉक्टरों की संलिप्तता का पता चला, जो देश को बदनाम करने के लिए अलगाववादियों के साथ मिलकर काम कर रहे थे। सीबीआई जांच में कुछ और तथ्य सामने आए। जांच के दौरान स्पष्ट हुआ कि दोनों महिलाओं के साथ दुष्कर्म नहीं हुआ था। दोनों डॉक्टरों का मकसद सुरक्षाबलों पर रेप का झूठा आरोप लगाकर राज्य के खिलाफ असंतोष पैदा करना था।

जांच में यह बात सामने आई कि इन अधिकारियों को सही तथ्यों के बारे में पता था, इनकी वजह से ही कश्मीर में हिंसा भड़क गई थी। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट को गलत साबित करने के लिए साजिश रचने के कारण दोनों डॉक्टरों को अब सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है।

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