पहले अमेरिका समेत पश्चिमी देश नहीं चाहते थे कि भारत मिसाइल पावर बने, लेकिन 1971 में पाकिस्तान के दो टुकड़े करने के बाद दुनिया को भारत की ताकत का एहसास हुआ। आगे परमाणु परीक्षण ने भारत को न्यूक्लियर वेपन स्टेट की श्रेणी में लाकर खड़ा कर दिया। आज भारत दुनिया के गिने चुने देशों में से एक है जिनके पास स्वदेशी मिसाइल सिस्टम है।
राजपथ पर पहली बार कब दिखी मिसाइल
पहली बार 1973 में दिल्ली के राजपथ पर सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल दिखी। दरअसल, 1971 की लड़ाई में पाकिस्तान के दो टुकड़े करने के बाद भारत ने इसी साल से शक्ति प्रदर्शन करना शुरू कर दिया था। भारत की मदद से दुनिया के नक्शे पर बांग्लादेश एक नया मुल्क बनकर उभरा था। राजपथ पर तब बांग्लादेशियों पर हुए जुल्म की कहानी भी दिखाई गई थी।आजादी के समय की बात करें तो मिसाइल डिजाइन और विकास की नींव 1962 में पड़ी। आगे दो वर्षों के दौरान रक्षा और अंतरिक्ष अनुसंधान के संस्थान डिफेंस रिसर्च एंड डिवेलपमेंट लेबोरेट्री और इंडियन कमेटी फॉर स्पेस रिसर्च अस्तित्व में आए। 1963 में थुंबा रॉकेट स्टेशन से अमेरिका में बना रॉकेट लॉन्च किया गया था। इसके बाद 1975 तक अमेरिका, फ्रांस, सोवियत संघ और ब्रिटिश रॉकेट लॉन्च किए जाते रहे।
अगली बार मिसाइल का जिक्र आए तो भारत के ग्रंथों में वर्णित सुदर्शन, त्रिशूल, वैष्णवास्त्र, नागपाश और ब्रह्मास्त्र जैसे अस्त्रों को याद कर लीजिएगा। यही वजह है कि भारत में जब मिसाइलें बनीं तो उनके नाम भी वैदिक काल से ही लिए गए। ब्रह्मोस, नाग, अग्नि ये नाम वहीं से लिए गए हैं। अस्त्र मिसाइलों की भी सीरीज हमारे पास है। पुराणों में जिस ब्रह्मास्त्र का जिक्र होता है, उसके बारे में कहा जाता है कि ये चल गया तो फिर रोकना असंभव था। यह दुश्मन के इलाके में भीषण तबाही मचाता था।
