दुनियाभर में 'मेड इन इंडिया' स्मार्टफोन की धूम, चीन-वियतनाम की निकलने लगी हवा
Updated on
01-07-2024 05:13 PM
नई दिल्ली: मोबाइल फोन निर्यात के मामले में भारत तेजी से दुनिया के नक्शे पर उभर रहा है। दुनियाभर में मेड इन इंडिया स्मार्टफोन धूम मचा रहे हैं। इसके साथ ही भारत तेजी से चीन और वियतनाम के साथ अंतर को पाट रहा है। अधिकारियों ने ग्लोबल ट्रेड डेटा का हवाला देते हुए बताया कि फाइनेंशियल ईयर 2024 में चीन और वियतनाम से मोबाइल निर्यात में पिछले साल की तुलना में क्रमश: 2.78% और 17.6% की गिरावट आई। इस दौरान भारत से निर्यात में 40.5% की बढ़ोतरी हुई। अधिकारियों ने साथ ही कहा कि भारत ने चीन और वियतनाम से मोबाइल फोन निर्यात में आई कमी का लगभग 50% हिस्सा हासिल कर लिया है। इससे साफ है कि चीन से आपूर्ति श्रृंखला में हुए शिफ्ट का एक बड़ा हिस्सा हासिल करने का उद्देश्य पूरा हो गया है।
एक अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि स्मार्टफोन पीएलआई स्कीम की घोषणा चीन से सप्लाई चेन में बदलाव को पकड़ने के उद्देश्य से की गई थी। इसके परिणाम अब दिखने लगे हैं। चीन मोबाइल फोन का टॉप एक्सपोर्टर बना हुआ है, लेकिन भारत भी उसके बराबर आता दिख रहा है। इंटरनेशनल ट्रेड सेंटर (ITC) के आंकड़ों के अनुसार, मोबाइल फोन का चीनी निर्यात वित्त वर्ष 2023 में 136.3 अरब डॉलर से घटकर वित्त वर्ष 2024 में 132.5 अरब डॉलर रह गया। इसमें 3.8 अरब डॉलर यानी 2.8% की गिरावट रही। इसी तरह, वियतनाम में भी मोबाइल निर्यात में गिरावट देखी गई है। वित्त वर्ष 2023 में 31.9 अरब डॉलर से घटकर वित्त वर्ष 2024 में यह 26.27 अरब डॉलर रह गया। यानी कुल निर्यात में 17.6% यानी 5.6 अरब डॉलर की गिरावट आई। दोनों देशों के निर्यात में कुल मिलाकर 9.4 अरब डॉलर रही।
पीएलआई स्कीम
आईटीसी संयुक्त राष्ट्र और विश्व व्यापार संगठन की एक संयुक्त एजेंसी है। यह 1968 से काम कर रही है। इसमें 220 देश और 5,300 उत्पाद शामिल हैं। भारत का मोबाइल फोन निर्यात वित्त वर्ष 2023 के 11.1 अरब डॉलर से 40% बढ़कर वित्त वर्ष 2024 में 15.6 अरब डॉलर तक पहुंच गया है, जो 4.5 अरब डॉलर की वृद्धि है। एक अन्य अधिकारी ने कहा, 'आंकड़ों से पता चलता है कि चीन और वियतनाम से मोबाइल निर्यात में आई कुल गिरावट का लगभग 50% हिस्सा भारत ने कब्जा लिया है।' विशेषज्ञों का कहना है कि मोबाइल फोन निर्यात क्षेत्र में भारत द्वारा अपने अवसर का लाभ उठाना सरकार के लिए बड़ी जीत है। भू-राजनीतिक स्थिति और चीन के साथ तनाव के मद्देनजर इंटरनेशनल कंपनियां चाइना प्लस 1 की रणनीति पर काम कर रही हैं। मोदी सरकार इन्हीं कंपनियों को लुभाने का प्रयास कर रही है। अधिकारियों का दावा है कि स्मार्टफोन पीएलआई योजना सफल रही है। आईफोन बनाने वाली कंपनी ऐपल ने इस योजना के तहत देश में आईफोन का उत्पादन शुरू किया। इसके तीन प्रमुख आईफोन वेंडर्स फॉक्सकॉन, पेगाट्रॉन और विस्ट्रॉन ने योजना के लॉन्च के बाद भारत में अपने प्लांट स्थापित किए हैं। पिछले दो वित्तीय वर्षों में Apple ने भारत से उत्पादन और निर्यात को दोगुना कर दिया है। वित्त वर्ष 23 में कंपनी का उत्पादन 7 अरब डॉलर से बढ़कर वित्त वर्ष 24 में 14 अरब डॉलर हो गया। इस अवधि में उसका निर्यात 5 अरब डॉलर से बढ़कर 10 अरब डॉलर से अधिक हो गया। भारत के मोबाइल निर्यात में आईफोन की हिस्सेदारी 65% और इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात में एक तिहाई से अधिक है।
सैमसंग भी रेस में
अधिकारियों ने कहा कि सैमसंग जैसी कंपनियां भी भारत से बड़ी मात्रा में मोबाइल निर्यात करना शुरू कर देंगी। दक्षिण कोरियाई दिग्गज भी PLI योजना की लाभार्थी है और वित्त वर्ष 24 में भारत से इसका मोबाइल फोन निर्यात लगभग 3.5 अरब डॉलर था। यह Apple के निर्यात का करीब एक तिहाई था। सैमसंग वर्तमान में वियतनाम से मोबाइल फोन का सबसे बड़ा निर्यातक है। एक रिपोर्ट के मुताबिक 2023 के अंत तक सैमसंग ने वियतनाम में 20 अरब डॉलर का निवेश किया था। अभी दुनिया भर में बिकने वाले सैमसंग के 50% से अधिक प्रॉडक्ट वियतनाम में बनाए जाते हैं।
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