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सैटेलाइट इंटरनेट की रेस में मुकेश अंबानी ने मारी बाजी, पीछे छूट गए एलन मस्क और जेफ बेजोस

Updated on 13-06-2024 02:50 PM
नई दिल्ली: भारत और एशिया के सबसे बड़े रईस मुकेश अंबानी (Mukesh Ambani) ने सैटेलाइट इंटरनेट की रेस में बाजी मार ली है। रिलायंस इंडस्ट्रीज (Reliance Industries) के जियो प्लेटफॉर्म्स (Jio Platforms) और लक्जमबर्ग की कंपनी एसईएस के जॉइंट वेंचर को देश में गीगाबिट फाइबर इंटरनेट प्रदान करने के लिए सैटेलाइट ऑपरेट करने की मंजूरी मिल गई है। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक एक सरकारी अधिकारी ने बताया कि स्पेस रेगुलेटर ने इन कंपनियों के जॉइंट वेंचर ऑर्बिट कनेक्ट इंडिया को भारत के आकाश में सैटेलाइट ऑपरेट करने की मंजूरी दे दी है। ऑर्बिट कनेक्ट इंडिया को तीन तरह की मंजूरियां दी गई हैं। कंपनी को ये मंजूरियां ऐसे समय मिली हैं जब जेफ बेजोस की ऐमजॉन डॉट कॉम से लेकर एलन मस्क की स्टारलिंक जैसी कंपनियां भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवा शुरू करने के लिए हरी झंडी का इंतजार कर रही हैं।

अधिकारी ने बताया कि ऑर्बिट कनेक्ट इंडिया को सैटेलाइट आधारित हाई-स्पीड इंटरनेट सुविधा उपलब्ध कराने के लिए अप्रैल और जून में जरूरी मंजूरी दी गई। Indian National Space Promotion and Authorisation Centre (IN-SPACe) ने कंपनी को यह अनुमति दी है। इससे कंपनी भारत के आकाश में सैटेलाइट्स को ऑपरेट कर सकती है लेकिन परिचालन शुरू करने के लिए उसे देश के दूरसंचार विभाग से और अधिक मंजूरियों की जरूरत है। जियो की मूल कंपनी रिलायंस ने इस बारे में और जानकारी के लिए भेजे गए ईमेल का जवाब नहीं दिया।

कौन-कौन हैं रेस में

IN-SPACe के चेयरमैन पवन गोयनका ने रॉयटर्स को बताया कि एक और कंपनी Inmarsat को भी भारत में सैटेलाइट ऑपरेट करने की मंजूरी मिल गई है। दो अन्य कंपनियों एलन मस्क की स्टारलिंक और ऐमजॉन की Kuiper ने भी इसके लिए आवेदन किया है। यूटेलसैट की भारती एंटरप्राइजेज के निवेश वाली कंपनी वनवेब को पिछले साल के अंत में सभी तरह की मंजूरियां दे दी गई थीं। डेलॉइट के अनुसार भारत का सैटेलाइट ब्रॉडबैंड सर्विस मार्केट अगले पांच वर्षों में सालाना 36% की दर से बढ़ने और 2030 तक 1.9 अरब डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है। वैश्विक स्तर पर स्पेस-बेस्ड इंटरनेट के जरिए ग्रामीण इलाकों को जोड़ने की दौड़ तेज हो रही है। ऐमजॉन के Kuiper ने 10 अरब डॉलर के निवेश करने की योजना बनाई है। इसकी घोषणा 2019 में की गई थी। उसी साल स्पेसएक्स ने अपने पहले ऑपरेशनल स्टारलिंक सैटेलाइट्स को तैनात करना शुरू किया था।

पिछले हफ्ते श्रीलंका ने स्टारलिंक को इंटरनेट सेवाएं प्रदान करने के लिए शुरुआती मंजूरी दे दी थी। गोयनका ने कहा कि भारत में इस क्षेत्र में जितनी अधिक कंपनियां शामिल होंगी, उपभोक्ताओं के लिए उतना ही बेहतर होगा। उन्होंने कहा कि भारत में कम्युनिकेशंस सर्विसेज दूसरे देशों से सस्ती हैं। इसलिए वैश्विक कंपनियों को अपनी कीमतें कम करने के लिए इनोवेशन का सहारा लेना होगा। उन्होंने कहा कि IN-SPACe जल्द ही निजी कंपनियों को ग्राउंड स्टेशन ऑपरेट करने के लिए अधिकृत करेगा, जिससे सैटेलाइट ऑपरेटर भारत से गुजरते समय डेटा डाउनलोड कर सकेंगे।

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