आठ बच्चों समेत 142 में मिला कोरोना
नोएडा में एक सप्ताह से हर रोज 100 से ज्यादा संक्रमित मिल रहे हैं। बुधवार को जारी रिपोर्ट में आठ बच्चों समेत 142 मरीजों में कोरोना संक्रमण की पुष्टि हुई। नोएडा-ग्रेनो में 1793 संदिग्ध लोगों की जांच हुई थी। पॉजिटिविटी रेट 7.91 प्रतिशत रहा। बुधवार को 99 लोग ठीक हुए। सक्रिय केसों में 27 मरीज अस्पताल में भर्ती हैं सभी की हालत स्थित बताई जा रही है। मंगलवार की देर रात कोरोना संक्रमित एक बुजुर्ग की सेक्टर-39 के कोविड अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हुई थी। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि बुजुर्ग की मौत सिर्फ कोरोना से नहीं हुई है। वह पहले से ही गंभीर बीमारी के शिकार थे। उनकी मौत एमओडीएस (मल्टी आर्गन डिसफंक्शन सिंड्रोम) से हुई है। बुजुर्ग गंभीर एनीमिया बीमारी से भी पीड़ित थे।कोरोना से रहें सतर्क
अभी तक दिल्ली में कोरोना नियंत्रण में देखा जा रहा है। नए मरीज और संक्रमण दर में जरूर इजाफा हुआ है, लेकिन एक्सपर्ट का मानना है कि स्थिति पूरी तरह से काबू में है। वहीं पिछले कुछ दिनों से दिल्ली में कोरोना की वजह से हो रही मौत में से कुछ की मौत की प्राइमरी वजह कोरोना बताया जा रहा है। हालांकि, इसके बाद भी एक्सपर्ट का कहना है कि यह बहुत रेयर है। हेल्दी इंसान में इस बार कोरोना खतरनाक नहीं हो रहा है।एलएनजेपी हॉस्पिटल के मेडिकल डायरेक्टर ने कहा कि अभी 20 मरीज एडमिट हैं, जिसमें से 2 वेंटिलेटर पर हैं। वेंटिलेटर वाले दोनों मरीज पहले से बीमार थे, इसलिए वेंटिलेटर की जरूरत हुई। उन्होंने कहा कि हेल्दी इंसान में इस बार संक्रमण नहीं हो रहा है, जिसे हो भी रहा है, उनमें से ज्यादातर पहले से बीमार हैं या उनकी इम्यूनिटी कमजोर है या फिर उनकी ऐसी दवा चल रही है जिससे इम्यूनिटी कम होती है। ज्यादातर मरीज दो से तीन दिनों में ठीक हो रहे हैं। बुखार भी लंबा नहीं चल रहा है।
क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स
डॉ. सुरेश ने कहा कि कई बार हेल्दी इंसान गलती कर बैठता है। वो बुखार को हल्के में लेते हैं। न तो जांच कराते हैं और न ही आइसोलेट होते हैं। ऐेसे में बीमारी बढ़ने का भी खतरा रहता है। कई बार कोरोना की वजह से ब्लड क्लॉट बनने का भी खतरा रहता है। कुछ लोगों का इम्यून उतना रिएक्ट नहीं करता है, ऐसे लोगों को ज्यादा खतरा नहीं होता है। लेकिन कुछ लोगों में इम्यून सिस्टम रिएक्ट कर देता है, उनमें रिएक्शन ज्यादा हो जाता है। उन्होंने कहा कि कोरोना ही नहीं, कई बार सीजनल इंफ्लूएंजा भी खतरनाक हो जाता है, इसलिए संक्रमण को हल्के में नहीं लेना चाहिए। समय पर जांच व इलाज जरूर कराना चाहिए।आकाश हॉस्पिटल के इंटरनल मेडिसिन के डॉ. प्रभात सिन्हा ने कहा कि अभी तक उन्होंने जितने मरीज देखे हैं, सभी दो से तीन दिनों में ठीक हो रहे हैं। बहुत ज्यादा इलाज की भी जरूरत नहीं हो रही है। अक्सर यह देखा जा रहा है कि मरीज अपनी किसी अन्य बीमारी के इलाज के लिए अस्पताल पहुंच रहा है, उन्हें हल्की सर्दी या खांसी हो रही होती है, जांच कराने पर कोविड आ रहा है। उन्होंने कहा कि अभी गंभीर बीमारी उन्हें ही हो रही है जो पहले से बीमार हैं। हेल्दी इंसान को कोरोना का यह वेरिएंट ज्यादा बीमार नहीं कर पा रहा है। बावजूद सतर्क रहना चाहिए। बुखार हो तो जांच जरूर कराएं, खुद आइसोलेट हों, ताकि दूसरे को संक्रमण न हो।
