नई संसद, अध्यादेश... 2024 से पहले विपक्षी एकता का 'लिटमस टेस्ट' चल रहा
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24-05-2023 06:39 PM
नई दिल्ली : प्रधानमंत्री मोदी (PM Modi) द्वारा नए संसद भवन (New Parliament Building) के उद्घाटन का विपक्ष की ओर से बहिष्कार किए जाने की संभावना अब बढ़ती दिख रही है। कांग्रेस (Congress) सूत्रों का कहना है कि गैर-बीजेपी दलों ने नए भवन का उद्घाटन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू (President Draupadi Murmu) से कराए जाने की बात कही है। कांग्रेस ने इस कार्यक्रम के बहिष्कार के विचार पर विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया पर संतोष जाहिर किया है। हालांकि कांग्रेस की ओर से औपचारिक रूप से बहिष्कार की घोषणा नहीं की गई है। विपक्षी दलों (Opposition Parties) की ओर से जल्द एक संयुक्त बयान जारी किया जाएगा जिसमें उद्घाटन कार्यक्रम के संयुक्त बहिष्कार की घोषणा की जाएगी। वहीं इस बीच कई दलों की ओर से इसका ऐलान कर दिया गया है। नीतीश की पार्टी जेडीयू, आरजेडी भी कांग्रेस के फैसले के साथ है।
आम आदमी पार्टी, टीएमसी, जेडीयू, आरजेडी, वामदल, शिवसेना,डीएमके ने इस कार्यक्रम के बहिष्कार का ऐलान कर दिया है। आम आदमी पार्टी ने कहा है कि वह निराश है कि राष्ट्रपति द्वारा संसद भवन का उद्घाटन नहीं किया जा रहा है। तृणमूल कांग्रेस की ओर से भी ऐसी ही घोषणा की गई है। यह दोनों दल फिलहाल कांग्रेस के सहयोगी नहीं हैं। 2024 लोकसभा चुनाव से पहले विपक्षी एकजुता के लिए प्रयास जारी है लेकिन इससे पहले दो ऐसे मुद्दे हैं जिससे काफी हद तक तस्वीर साफ होगी। कांग्रेस की ओर से जहां नई संसद भवन का मामला है तो वहीं आम आदमी पार्टी दिल्ली वाले अध्यादेश के खिलाफ समर्थन जुटा रही है।
एक के बाद एक कई दलों की ओर से घोषणा के बाद यह क्लियर है कि कांग्रेस के साथ कई दल आने वाले हैं। जेडीयू की ओर से कहा गया है कि पार्टी सभी विपक्षी दलों को एक साथ लाने में प्रमुख भूमिका में है, इसलिए पार्टी ऐसा कोई कदम नहीं उठाएगी जिससे विपक्षी एकता की दिशा में चल रहे प्रयासों में बाधा खड़ी हो। पार्टी के प्रवक्ता की ओर से कहा गया कि भारतीय राजनीति टकराव वाली हो गई है क्योंकि पीएम मोदी सुलह और आम सहमति में विश्वास नहीं करते हैं। उन्होंने वीर सावरकर की जयंती पर नए संसद भवन का उद्घाटन करना चुना। उन्होंने इसे महात्मा गांधी या पहले स्पीकर डीएस मावलंकर को समर्पित क्यों नहीं किया।
राज्यसभा में टीएमसी नेता डेरेक ओ ब्रायन ने मोदी पर हमला बोलते हुए ट्विटर पर लिखा कि संसद सिर्फ एक नई इमारत नहीं है, यह भारतीय लोकतंत्र की नींव है। पीएम मोदी को यह समझ नहीं आ रहा है। बंगाल की सीएम ममता बनर्जी 27 मई को नीति अयोग की बैठक के लिए दिल्ली में होंगी, जिसकी अध्यक्षता मोदी करेंगे, लेकिन अगले दिन वह कार्यक्रम में शामिल नहीं होंगी। जबकि CPI ने बहिष्कार के आह्वान का समर्थन किया है।
बीजू जनता दल और जगन की पार्टी YSR कांग्रेस की ओर से अभी तक इस बारे में कोई घोषणा नहीं की गई है। वहीं इस मुद्दे पर बसपा की ओर से कोई बयान जारी नहीं किया गया है। अखिलेश यादव की ओर से भी इस पूरे विवाद पर स्थिति स्पष्ट नहीं की गई है। बीआरएस का फैसला आना भी बाकी है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि इन दो मुद्दों पर विपक्षी दल कैसे एक साथ आते हैं।
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